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अमेरिका गए मनिंदर की वतन वापसी ऐसी हुई जैसी परिवार ने कभी कल्पना भी नहीं की थी

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असंध क्षेत्र के डेरा साइयां वाला वासी मनिंदर के शव को आखिरकार अपनी मिट्टी नसीब हो गई। उसका शव सुबह छह बजे कैलिफोर्निया से अपने घर पहुंचा, जहां करीब चार घंटे बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। अमेरिका के कैलिफोर्निया में लुटेरों ने गो ली मा रकर उसकी ह त्‍या कर दी थी।

मनिंदर का शव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया और उसकी अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। इनमें विधायक शमशेर सिंह गोगी के भाई काका सिंह, इनेलो जिलाध्यक्ष यशवीर राणा, भाजपा के युवा नेता दिलबाग लाडी आदि प्रमुख रहे।

Manindar

मृतक मनिंदर।

डेरा साईया वाले (उपलाना) का रहने वाला मनिंदर लगभग 9 महीने पहले ही अमेरिका गया था। वहां लगभग 6 महीने जेल में रहने के बाद बाहर आया था। इसके बाद वह कार्लिफॉर्निया में एक ग्रोसरी स्टोर पर नौकरी करने लगा था। इसी के चलते वह 22 फरवरी को अपनी डयूटी पर था तो उसी दौरान एक नीग्रो चोरी करने की नीयत से वहां पहुंचा। मनिंदर ने उसका सामना किया और चोरी नहीं करने दी तो आ रोपित ने उसकी गो ली मा रकर ह त्या कर दी थी।

हर रोज की तरह उसकी पत्नी अमनदीप कौर उसके पास सुबह पांच बजे फोन करती रही, लेकिन फोन नहीं उठाया तो उसने उसके ममेरे भाई हरप्रीत को फोन किया तो मनिंदर की ह त्या कर दिए जाने का पता चल सका। इससे परिवार में कोहराम मच गया था तो वहीं उनके सामने मनिंदर का शव यहां लाने के लिए आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया था।

मनिंदर का ह त्‍यारा केविन।

मीडिया में जब मामला सामने आया तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मनिंदर का शव लाने के लिए 10 लाख रुपये की सहायता की तो वहीं उसकी पत्नी को भी डीसी रेट पर नौकरी का ऐलान किया। वहीं प्रशासनिक तौर पर विदेश मंत्रालय से संपर्क कर शव लाए जाने की प्रक्रिया शुरू कराई। लोगों ने मनिंदर का शव लाए जाने में सहयोग करने पर प्रदेश सरकार का आभार भी जताया। बता दें कि मनिंदर अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और परिवार को अपने गुजर बसर से लिए उसी से उम्मीद थी।

सोशल मीडिया के जरिए जुटाई मदद

स्वजन शव आने का अब तक इंतजार कर रहे थे तो इसी बीच यह मामला पूरे क्षेत्र में फैल गया था, जिसके चलते लोगों ने भी आर्थिक सहायता की। यहीं नहीं, सोशल मीडिया पर भी सहायता को लेकर मुहिम चलाई गई तो करीब 30 लाख रुपये तक एकत्रित हुए। बता दें कि इतने प्रयासों के बाद भी मां सरबजीत कौर व पिता जोगिंद्र सिंह टकटकी लगाए अपने बेटे के शव का इंतजार कर रहे थे। अब शव पहुंचा तो उन्हें सुकून मिला।

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