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कुरुक्षेत्र

इस अस्पताल में अगर आप जा रहे हैं तो जरा सोच समझकर जाइए, यहां थ्री इडियट्स जैसे कारनामे होते हैं

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Spread the love  इस अस्पताल में अगर आप जा रहे हैं तो जरा सोच समझकर जाइए। यहां थ्री इडियट्स जैसे कारनामे होते हैं। डॉक्टर अपनी जान पर खेलकर मरीज की जान से खेलते हैं। सुनने में थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन ये सच है। बिजली गुल हो जाने पर टार्च में रोशनी में डिलीवरी कराई जाती […]

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 इस अस्पताल में अगर आप जा रहे हैं तो जरा सोच समझकर जाइए। यहां थ्री इडियट्स जैसे कारनामे होते हैं। डॉक्टर अपनी जान पर खेलकर मरीज की जान से खेलते हैं। सुनने में थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन ये सच है। बिजली गुल हो जाने पर टार्च में रोशनी में डिलीवरी कराई जाती है। अब आप खुद ही सोच लीजिए ये कारनामा है या फिर लापरवाही।

लोकनायक जयप्रकाश नागरिक अस्पताल के प्रसूति केंद्र में रविवार को दिन में साढ़े तीन घंटे बत्ती गुल रहने से टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी करानी पड़ी। इस दौरान न तो अस्पताल में रखे हुए बड़े जनरेटर काम आए और न ही प्रशासन इनवर्टर की व्यवस्था कर पाया। इसकी वजह से सारा अस्पताल अंधेरे में डूबा रहा। वार्डों के साथ-साथ आपरेशन थियेटर, प्रसूति केंद्र और नवजात शिशु देखरेख इकाई जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी या तो खिड़कियों से मिलने वाली नाकाफी रोशनी से काम चलाया गया या फिर टॉर्च का सहारा लिया गया। इस दौरान स्टाफ के भी हाथ पांव फूल गए।

बिजली बाधित होने की पूर्व सूचना के बाद भी नहीं दिया ध्यान 

एलएनजेपी अस्पताल हॉट लाइन से जुड़ा हुआ है और अस्पताल में बिजली आपूर्ति के लिए दो बड़े जनरेटर भी उपलब्ध है। एक दिन पहले ही अस्पताल प्रशासन ने रविवार को सुबह 11 बजे से लेकर सांय पांच बजे तक बिजली बाधित रहने सूचना जारी कर दी थी, ताकि बिजली लाइन की मरम्मत हो सके। मगर इस दौरान तकनीकी खामी होने के चलते जनरेटर से भी सप्लाई नहीं हो पाई और अस्पताल पूरी तरह से अंधेरे की आगोश में आ गया, जबकि जिला के मुख्य प्रसूति विभाग में इनवर्टर की अतिरिक्त व्यवस्था नहीं होने से लेबर रूम के पर्दे खोलने पड़े और उसी रोशनी में डिलीवरी भी करानी पड़ी। नाकाफी रोशनी के कारण प्रसूताओं को टांके टॉर्च की रोशनी में लगाने पड़े।

दो प्रसूताओं को किया गया रेफर

आपरेशन थियेटर में भी बिजली की व्यवस्था नहीं हो पाई, जिसकी वजह से सिजेरियन से होने वाली डिलीवरी को स्टाफ ने रेफर कर दिया। अस्पताल के एक कर्मचारी ने बताया कि ऐसी दो प्रसूताओं को ऐसी स्थिति में रेफर किया गया है। बच्चों को मशीनों की बजाय गर्म कंबलों में रखना पड़ा।

इनवर्टर की व्यवस्था जरूरी 

एलएनजेपी अस्पताल में भले ही बड़े जनरेटरों की व्यवस्था की गई हो, लेकिन आपातकालीन स्थिति के दौरान आपरेशन थियेटर, लेबर रूम और अति संवेदनशील स्थिति में आने वाले नवजात शिशुओं को उपचार देने के लिए उचित रोशनी व उपकरणों की व्यवस्था होनी चाहिए। खासकर लेबर रूम व आपरेशन थियेटर में इनवर्टर की व्यवस्था होनी चाहिए, क्योंकि पहले भी इस तरह की स्थिति अस्पताल प्रशासन के सामने आ चुकी है।

मामला नहीं संज्ञान में : डॉ. सुखबीर 

जिला सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर ने बताया कि उनके संज्ञान में यह मामला नहीं है। इस मामले में अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी और उचित कार्रवाई की जाएगी।

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