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करनाल

करनाल : शहीद के अंतिम दर्शन करने उमड़ी भीड़

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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में शहीद हुए जवान बलजीत सिंह (35) का पार्थिव शरीर बुधवार को पैतृक गांव डिंगर माजरा पहुंचा। गांव में लोगों ने भारत माता के जयकारों के साथ शहीद के अंतिम दर्शन किए। मंगलवार शाम को ही शहीद का पार्थिव शरीर जम्मू-कश्मीर से हेलीकॉप्टर द्वारा अम्बाला कैंट ले आया गया था। शहीद के अंतिम संस्कार में स्थानीय विधायक हरविंदर कल्याण पहुंचे।

सोमवार रात 2.30 बजे हुई थी मुठभेड़

शहीद बलजीत सिंह 50 राष्ट्रीय राइफल में हवलदार के पद पर तैनात थे। सोमवार रात 2:30 बजे आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर रत्नीपोरा  इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। आतंकी एक घर व स्कूल में जा छिपे। आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी।

शहीद को श्रद्धांजली देते हुए विधायक हरविंदर कल्याण।
इस दौरान हवलदार बलजीत सिंह ने एक आतंकी को ढेर कर दिया। तभी सामने से आतंकियों की दो गोली बलजीत सिंह को लग गई।

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में शहीद हुए बलजीत सिंह।

दो अन्य जवान भी घायल हो गए। घायल नायक सानीद व हवलदार बलजीत सिंह की अस्पताल में मौत हो गई। वहीं, जवान चंदर पाल को 92 बेस अस्पताल में रेफर किया है।

संस्कार के लिए लेकर जाते हुए सेना के जवान।

जनवरी 2002 में हवलदार बलजीत सिंह 2 मैक इनफेंट्री में भर्ती हुआ था व महाराष्ट्र के अहमदनगर में ट्रेनिंग की थी। इसके बाद अपनी अच्छी फिटनेश के चलते हवलदार बलजीत ने एनएसजी कमांडो की ट्रेनिंग पूरी की थी व वर्ष 2015 से वर्ष 2017 तक नई दिल्ली में एनएसजी में वीवीआईपी डयूटी में तैनात रहे।

बड़ी संख्या में उमड़ी भीड़।

इससे पहले भी तीन साल तक हवलदार बलजीत राष्ट्रीय राइफल में पोस्टिंग था। पिछले तीन वर्षों से 50 राष्ट्रीय राइफल में श्रीनगर क्षेत्र में पोस्टिंग था।

भारत माता के जयकारों से गूंजा डिंगर माजरा गांव।

परिवार में हवलदार बलजीत की पत्नी अरूणा, एक तीन वर्षीय बेटा अरनव, सात वर्षीय बेटी जन्नत, 75 वर्षीय किसान पिता किशनचंद है। शहीद की माता मूर्ति का पहले ही देहांत हो चुका है।

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