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पानीपत

करनाल सीट की उम्मीदवारी पानीपत के संजय को इनाम या भाजपा की सोची-समझी रणनीति

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करनाल से संजय भाटिया को टिकट देना भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं है। संजय भाटिया पानीपत से हैं। शनिवार को भाटिया को टिकट की घोषणा होते ही भाजपा में सियासी गुण गणित शुरू हो गया। भाटिया को ही तवज्जो मिलने के पीछे उनकी संगठन के प्रति निष्ठा व समर्पण भी अहम है।

भाजपा सरकार में एक तरफ जहां नेताओं में चेयरमैनी लेने की होड़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ संजय भाटिया ने खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के चेयरमैन का पद यह कहकर छोड़ दिया था कि उन्हें संगठन का काम करने के लिए समय चाहिए। यही बात सीएम मनोहर लाल के दिल में घर कर गई। उन्हें पार्टी ने उम्मीदवार बनाकर इनाम भी दिया है।

पानीपत से उम्मीदवार संजय भाटिया।

करनाल सीट पारंपरिक तौर पर ब्राह्मण सीट के तौर पर पहचानी जाती रही है। लेकिन इस धारणा को वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अश्विनी चोपड़ा ने तोड़ा था और शानदार जीत दर्ज की थी। इसके बाद विधानसभा चुनाव और फिर नगर निगम चुनाव में पंजाबी बिरादरी का झुकाव भाजपा की ओर रहा। इन बातों को ध्यान में रखकर पार्टी ने फिर से पंजाबी चेहरा जनता के सामने उतारा है।

संजय भाटिया मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नजदीकी हैं। मुख्यमंत्री भी करनाल सीट से ऐसा ही उम्मीदवार चाहते थे, जो उनके नजदीक हो। संगठन स्तर पर भी यह अंदरखाने निर्णय हो गया था कि करनाल की टिकट सीएम के विश्वासपात्र को ही जाएगी। लिहाजा संजय भाटिया ही सबसे उपयुक्त दावेदार बनकर सामने आए।

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संजय भाटिया के पक्ष में एक बात यह भी गई कि वह पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं। संगठन को आगे बढ़ाने में उनका योगदान रहा है। इसी बीच स्थानीय व बाहरी के मुद्दे से बचने के लिए भी पार्टी का फोकस रहा। यही वजह रही कि हाल ही में या कुछ समय पहले तक पार्टी में आकर टिकट मांगनें वालों की बजाए भाटिया के नाम को फाइनल किया गया।

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