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पानीपत

क़रीब 2 साल से चल रहे इस घपले को मेयर अवनीत ने पकड़ा और लिए बोल्ड क़दम…

बड़ी सीधी सी बात है, कंपनी से कहा हुआ कि भैया सॉफ़्टवेयर बना दो और छः महीने बाद निगम के कर्मियों को सिखा के चले जाना। मगर कंपनी और अधिकारियों की ग़ज़ब सोच या किसी प्रकार की सेटिंग का नतीजा ये कि आज भी वही कंपनी निगम का सीएफसी सेंटर चला रही है और मोटे […]

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बड़ी सीधी सी बात है, कंपनी से कहा हुआ कि भैया सॉफ़्टवेयर बना दो और छः महीने बाद निगम के कर्मियों को सिखा के चले जाना।

मगर कंपनी और अधिकारियों की ग़ज़ब सोच या किसी प्रकार की सेटिंग का नतीजा ये कि आज भी वही कंपनी निगम का सीएफसी सेंटर चला रही है और मोटे पैसे एँठ रही है। भास्कर में प्रकाशित ख़बर के अनुसार…

देवीलाल कॉम्प्लेक्स स्थित नगर निगम कार्यालय के ग्राउंड फ्लोर में चल रहा कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) अब नगर निगम खुद ही चलाएगा। निगम ने इसे 2016 में 6 महीने तक चलाने और कर्मचारियों को काम समझाने के लिए एक कंपनी को सौंपा था। इन्हीं 6 महीनों में कर्मचारियों को साॅफ्टवेयर की पूरी प्रक्रिया समझानी थी।

गुरुग्राम की जिस कंपनी ने साफ्टवेयर उपलब्ध कराया था, उसे ही कर्मचारियों को इसकी कार्य प्रणाली समझाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। कंपनी तय समय में कर्मचारियों को प्रक्रिया समझाने और इसे निगम को हैंड ओवर करने की बजाय अब तक खुद ही चला रही है। अब मेयर अवनीत कौर से इसे चलाने वाली कंपनी की पेमेंट रुकवा दी है और निगम को खुद ही चलाने के लिए कमिश्नर व शहरी स्थानीय निकाय को पत्र भी लिख दिया गया है।

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मेयर का कहना है कि कंपनी को अब तक 36 लाख रुपए की पेमेंट हो गई है। यह गलत तरीके से गई है। इसकी रिकवरी की जाएगी। यह पेमेंट या तो कंपनी देगी या फिर उन संबंधित कमिश्नर या ज्वाइंट कमिश्नर को देनी होगी, जिनके हस्ताक्षर से कंपनी को पेमेंट हुई है। इसके लिए सरकार व शहरी स्थानीय निकाय को भी पत्र लिखे गए हैं।

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