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कोरोना: बड़ों की दवाई बच्चे के काम न आएगी, खुद से न बनें डॉक्टर, पढ़ें सरकार की गाइडलाइंस

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देश में कोरोना की दूसरी लहर धीरे-धीरे शांत हो रही है लेकिन एक्सपर्ट अभी से तीसरी लहर की आशंका और उसे लेकर जरूरी तैयारियों पर जोर दे रहे हैं। बच्चों को तीसरी लहर से बचाने की तैयारियों पर खास जोर दिया जा रहा है। इस बीच सरकार ने बच्चों के कोरोना इलाज को लेकर अहम गाइडलाइंस जारी की है। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि एडल्ट के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों का बच्चों पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

खुद से न बनें डॉक्टर, गलती पड़ सकती है भारी

दरअसल, कोरोना महामारी के दौरान यह भी देखा गया है कि कई लोग लक्षण के बाद बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के सीधे बाजार से दवाइयां खरीदकर उनका सेवन कर रहे थे। यह खतरनाक है और जानलेवा भी हो सकता है। सरकार और एक्सपर्ट बार-बार कहते रहे हैं कि बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी तरह की दवा न खाएं। ऐसे में लोगों के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि सोशल मीडिया या किसी अन्य स्रोत से अगर कुछ दवाओं के बारे में आपको जानकारी मिल रही है तो बिना डॉक्टर की सलाह के न लें। बच्चों के बारे में तो और भी ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि कोरोना के इलाज में एडल्ट को दी जाने वाली दवाइयां ही बच्चों को नहीं दी जा सकती।

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सरकार ने बच्चों के इलाज और देखरेख के लिए जारी किए दिशानिर्देश

सरकार ने बुधवार को जारी अपने दिशा-निर्देशों में कहा कि कोविड-19 के वयस्क रोगियों के उपचार में काम आने वाली आइवरमेक्टिन, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, फैविपिराविर जैसी दवाएं और डॉक्सीसाइक्लिन, एजिथ्रोमाइसिन जैसी एंटीबायोटिक दवाओं का बच्चों के इलाज में इस्तेमाल न करने की सलाह दी गई है। इन आशंकाओं के बीच कि महामारी के मामलों में एक अंतराल के बाद फिर से वृद्धि हो सकती है, सरकार ने बच्चों के लिए कोविड देखरेख केंद्रों के संचालन के वास्ते दिशा-निर्देश तैयार किए हैं।

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बच्चों के लिए वैक्सीन उपलब्ध होने पर गंभीर रोग से पीड़ितों को मिलेगी तरजीह

दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि गंभीर कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित बच्चों को चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराने के लिए मौजूदा कोविड देखरेख प्रतिष्ठानों की क्षमता में वृद्धि की जानी चाहिए। इनमें कहा गया है कि बच्चों के लिए कोविड रोधी टीके को स्वीकृति मिलने की स्थिति में टीकाकरण में ऐसे बच्चों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो अन्य रोगों से पीड़ित हैं और जिन्हें कोविड-19 का गंभीर जोखिम है।

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बच्चों पर परीक्षण के बाद ही दवाओं को कहा जा सकता है सुरक्षित

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से बच्चों के उपचार के बारे में जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि वयस्क कोविड रोगियों के उपचार में काम आने वाली अधिकतर दवाएं जैसे कि आइवरमेक्टिन, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, फैविपिराविर जैसी औषधियां और डॉक्सीसाइक्लिन तथा एजिथ्रोमाइसिन जैसी एंटीबायोटिक दवाओं का कोविड-19 से पीड़ित बच्चों पर परीक्षण नहीं किया गया है। इसलिए बच्चों के इलाज में इनके इस्तेमाल की सिफारिश नहीं की गई है।

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सरकारी और निजी क्षेत्र को साथ मिलकर महामारी से लड़ना होगा
गाइडलाइंस में कहा गया है, ‘लॉकडाउन हटने या स्कूलों के फिर से खुलने के बाद या अगले तीन-चार महीनों में संभावित तीसरी लहर के दौरान संक्रमण के मामलों में किसी भी वृद्धि से निपटने के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र को संयुक्त रूप से प्रयास करने की जरूरत है। देखभाल के मूल सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए।’

दूसरी लहर के पीक के लिहाज से अतिरिक्त बिस्तरों का अनुमान लगाने की सलाह
दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया है कि बच्चों की देखरेख के लिए अतिरिक्त बिस्तरों का अनुमान महामारी की दूसरी लहर के दौरान विभिन्न जिलों में संक्रमण के दैनिक मामलों के चरम के आधार पर लगाया जा सकता है। मंत्रालय ने कहा कि इससे, बच्चों में संक्रमण के मामलों के बारे में और साथ में यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि उनमें से कितने मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ेगी।

बच्चों के लिहाज से हेल्थ इन्फ्रा बढ़ाने पर जोर
दिशा-निर्देशों में कहा गया है, ‘कोविड से गंभीर रूप से बीमार बच्चों को देखभाल (चिकित्सा) उपलब्ध कराने के लिए मौजूदा कोविड देखरेख केंद्रों की क्षमता को बढ़ाना जरूरी है। इस क्रम में बच्चों के उपचार से जुड़े अतिरिक्त विशिष्ट उपकरणों और संबंधित बुनियादी ढांचे की जरूरत होगी।’

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