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पानीपत

सीधी टक्कर, संजय अग्रवाल की प्रमोद विज से..

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पानीपत शहर की सीट में सीधे मुक़ाबले में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी है, दोनो नए चेहरे। भाजपा ने टिकट के खेल में उलझा कर शहर को आख़िरी मौक़े पर प्रत्याशी का नाम दिया, वहीं कांग्रेस ने भी सबको हैरान करते हुए नए चेहरे को उतरा। मगर कांग्रेस आज भी पानीपत में एकजुट हैं वहीं भाजपा में भीतरघात से पार्टी दो हिस्सों में बँटी हुई है।

शहर के ये बड़े मुद्दे

हैंडलूम इंडस्ट्री के लिए अलग से सेक्टर।

उद्यमियों को पर्याप्त बिजली।

औद्योगिक सेक्टर में मूलभूत सुविधाएं।

नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार।

जाम की समस्या।

पानी निकासी के पुख्ता प्रबंध।

भाजपा में भितरघात का फायद संजय अग्रवाल को

कांग्रेस प्रत्याशी संजय अग्रवाल प्रमोद विज के सामने खड़े हैं। संजय अग्रवाल औद्योगिक परिवार से संबंध रखते हैं। उनके पास कांग्रेस में व्यापार प्रकोष्ठ में प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी है। पिता जगदीश अग्रवाल पानीपत यार्न डीलर एसोसिएशन के संरक्षक और उनके चाचा रोशनलाल गुप्ता हरियाणा उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश के चेयरमैन हैं। संजय अग्रवाल पिछले एक साल से शहर समेत प्रदेश की राजनीति में हैं। संजय अग्रवाल की मजबूती कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र सिंह बुल्लेशाह का साथ है। संजय अग्रवाल अपनी बिरादरी के वोट लेकर जीत का दावा कर रहे हैं। भाजपा के भितराघात का फायदा भी उठाना चाहते हैं।

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पानीपत शहरी विस वर्ष 2014 से पहले कांग्रेस की सीट रही है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष बलबीर पाल शाह 2000 से लगातार विधायक बनते आ रहे थे। भाजपा की टिकट पर पहली बार मैदान में उतरी रोहिता रेवड़ी ने 2014 में शाह परिवार की जीत पर ब्रेक लगाया। इसके बाद भाजपा शहर में मजबूत होती चली गई।

संगठन ने इस बार विधायक रोहिता रेवड़ी का टिकट काट कर जिलाध्यक्ष प्रमोद विज को प्रत्याशी बना कर उतारा है। प्रमोद विज पूर्व विधायक फतेहचंद विज के पुत्र हैं। प्रमोद विज को अपने पिता की राजनीति विरासत को फिर से स्थापित करने का अवसर मिला। शहर के कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़े हैं। यह उनकी मजबूती का सबसे बड़ा आधार बन रहा है।

वर्ष 2014 में पहली बार भाजपा के टिकट पर रोहिता रेवड़ी ने चुनाव लड़ा। कांग्रेस ने वीरेंद्र सिंह बुल्लेशाह को चुनाव मैदान में उतारा था। रेवड़ी ने शाह को सीधे मुकाबले में 53721 वोटों से मात दी थी। रेवड़ी को 92757 वोट मिले थे, जबकि शाह 39036 वोट ही ले पाए थे।

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