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पानीपत

गलत बिल आने की समस्या बहुत पुरानी है.. आख़िरी क्या है वजह!! वसूली ऐरवयस ग़बन के भी हैं क़िस्से

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उद्यमी का 7.91 करोड़ रुपये का बिजली बिल निगम अधिकारियों ने ठीक करा दिया है। इसे ठीक कराने के लिए उद्यमी दो महीने से धक्के खा रहा था, लेकिन कहीं उसकी सुनवाई नहीं हो रही थी। रविवार 24 मार्च के अंक में जागरण ने मुद्दे को उठाया। समाचार प्रकाशित होते ही निगम अधिकारियों ने कर्मचारियों को तुरंत बिल ठीक करने के निर्देश दिए। अब बिल घटकर 65 हजार रह गया है। उद्यमी ने दैनिक जागरण का आभार जताया।

जाटल रोड पर स्थित भगवती टेक्सटाइल का बिजली का बिल 7.67 करोड़ रुपये का आया था। उद्यमी रजनीश गुप्ता ने इसे ठीक कराने के लिए निगम में शिकायत दी तो निगम ने अगले माह 7.91 करोड़ रुपये का बिल भेज दिया।

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बिजली वितरण निगम में गलत बिल आने की समस्या बहुत पुरानी है। बिल ठीक कराने के लिए उपभोक्ता निगम कार्यालय के चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन समस्या का जल्द समाधान नहीं होता। बिजली वितरण निगम 1998 से समस्या दूर करने के लिए प्रयासरत है, लेकिन मर्ज बढ़ता ही जा रहा है।

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1998 में जोगेंद्र नामक ठेकेदार को बिजली निगम ने रीडिग लेने व बिल भेजने का काम सौंपा। कुछ महीने बाद ठेकेदार कई लाख का गबन कर रफूचक्कर हो गया। उसके बाद वीना रानी नामक महिला को ठेका दिया गया। यह भी बिलिंग का पैसा लेकर भाग गई।

गलत बिलिग की समस्या हल करने के लिए सैंडस कंपनी को सनौली रोड सब डिविजन में स्पोट बिलिग का ठेका दिया गया। फिर पुरानी कहानी दोहराई गई। काफी लोगों से बिलिग के पैसे लेने के बाद ठेकेदार ने निगम में जमा नहीं कराए।

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इसके बाद कभी आइटीआइ के छात्रों तो कभी सेवानिवृत्त सैनिकों जिम्मेवारी सौंपी गई, पर समस्या हल नहीं हुई। निगम ने एक सितंबर 2017 को बीसीआइटीएस कंपनी को रीडिग लेने व बिल देने का काम सौंपा। इस कंपनी ने भी उपभोक्ताओं के पास लाखों-करोड़ों के बिल भेज दिए।

ठेकेदार की जवाबदेही नहीं

हरियाणा सर्वकर्मचारी संघ के प्रधान तेजपाल का कहना है कि ठेकेदार की जवाबदेही नहीं होती। पहले नियमित कर्मचारी रीडिग लेने व बिल देने का काम करते थे, गलती होने पर उन्हें चार्जशीट किया जाता था। कारण बताओ नोटिस के अलावा सस्पेंड कर दिया जाता था।

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