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पानीपत

डूबताें का सहारा हैं ये 3 पानीपत के जांबाज, बचा चुके हैं 527 जिंदगियां

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शहर के 3 जांबाज 20 साल में नहरों में डूबने से 527 लोगों को बचा चुके हैं। इसके अलावा 425 शव भी जान जोखिम में डालकर निकाल चुके हैं। इसके पीछे इनका न कोई लालच है और न ही ये किसी से भी कोई डिमांड रखते हैं। गजब की बात यह है कि इन्हें कई बार किसी कि जान बचाने पर थप्पड़ भी खाने पड़ जाते हैं और कई बार किसी डूबने वाले को बचाकर भी ये उसे थप्पड़ जड़ देते हैं। इतना कुछ करने के बाद भी प्रशासन व सरकार का इनकी और कोई ध्यान नहीं है। हालांकि इनकी और इनके आसपास रहने वालों की मांग है कि प्रशासन और सरकार इनकी मदद करे। क्योंकि ये लोग समाज हित में ही काम कर रहे हैं।

 

150 को जिंदा बचाया और 75 शव निकाले

मैं वेल्डिंग शेड लगाने का काम करता हूं। 16 साल में 150 लोगों काे डूबने से बचाया है। 75 शव निकाले हैं। मूल रूप से अमृतसर का रहने वाला हूं। वहां के तालाबों में ही मैंने तैरना सीखा। 20 साल पहले हमारा परिवार पानीपत अा गया। वहां के तालाबों में तैरना सीखना मेरे लिए वरदान बन गया। यहां अक्सर शौक में नहर में नहाने के लिए आते थे। कई बार कम तैरने व कई बार जानबूझकर छलांग लगाने वालों को डूबने में बचाया। फिर यह जुनून बन गया।

ज्ञानी, गाेपाल कॉलोनी 

औरत की जान बचाने पर मिला था थप्पड़

मैं 10 साल में 263 लोगों को बचा चुका हूं। 83 शव निकाले हैं। फैक्ट्री में सिलाई मशीन चलाकर बाथमेट बनाता हूं। 3 साल पहले एक महिला नहर में कूद गई। नहर से बाहर निकालने के लिए मैंने उसको पीछे से पकड़कर बाहर धकेला। उसने बाहर आते ही मुझे जोर से थप्पड़ मारा, मैंने कारण पूछा तो बोली कि मुझे पीछे से क्यों पकड़ा। शर्म आनी चाहिए। आसपास के लोगों ने महिला को ही डांटा और मुझे शाबाशी दी।

मोनू, एकता विहार 

कपड़ों सहित नहर में कूद बचाया था युवक

मैं नहरी विभाग में कैनाल गार्ड हूं। 8 साल की नौकरी में 14 लोगों को जिंदा निकाल चुका हूं। एक घटना तो आज भी याद है, जब तीन दोस्तों में एक डूबने लगा तो दूसरा व तीसरा उसे बचाने के चक्कर में डूबने लगे। तीनों में एक के हाथ में रस्सी तो दूसरे के हाथ में झाड़ी आ गई तो दोनों निकल गए। तीसरा बीच में जा चुका था। मैं बिना कपड़े निकाले ही छलांग लगाकर उसे बचा लाया। मेरा मोबाइल जेब में होने के कारण खराब हो गया।

सुशील, अहर कुराना 

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