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पानीपत

दिल्ली के पास होने और बहुत प्रदूषित शहर होने के नाते पानीपत को Clean City बनाना आवश्यक है

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नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल (एनजीटी) ने प्रदेश के 4 शहरों को क्लीन सिटी का प्रथम दर्जा देने के लिए चुना है। इसमें पानीपत भी शामिल है। इसके लिए पांच माह का समय दिया है। शहर को सुंदर और साफ बनाने के लिए प्रशासन इस बार गंभीर प्रयास करेगा। क्योंकि, 19 सितंबर को हरियाणा के मुख्य सचिव को इस बारे में एनजीटी को रिपोर्ट सौंपनी है।

एनजीटी ने इसके लिए एक सब-कमेटी बनाई है। इसके चेयरमैन हरियाणा के लोकपाल रहे जस्टिस प्रीतमपाल को बनाया गया है। चार शहरों में पानीपत के अलावा करनाल, रोहतक और पंचकूला शामिल हैं। इस बारे में डीसी सुमेधा कटारिया ने कहा कि जस्टिस प्रीतमपाल तीन माह पर इसकी रिपोर्ट लेंगे। पहली बैठक तो वह 10 दिनों के बाद लेने आ रहे हैं। सफाई की प्रोग्रेस रिपोर्ट लेने के लिए डीसी अपने स्तर पर हर 15 दिनों में मीटिंग लेंगी। इसके लिए जिला स्तर पर भी एक कमेटी बनाई गई है। इसमें डीसी के साथ मेयर, पार्षद, आरडब्ल्यूए सहित निगम कमिश्नर व अन्य अफसर भी शामिल हैं। डीसी ने शुक्रवार को इस संदर्भ में मीटिंग भी बुलाई है।

अब प्रशासन के पास कार्रवाई का मौका 

एनजीटी से मिले दायित्व के रूप में प्रशासन को इस बार हथियार मिल गया है। इसलिए, इस बार कार्रवाई भी होगी। चाहे वह प्लॉट में कूड़ा फेंकने वाले हों, पॉलीथिन और प्लास्टिक का उपयोग करने वाले हों। सब तरह के लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

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निंबरी से भी उठाए जाएंगे कूड़े के ढेर 

डीसी सुमेधा कटारिया ने बताया निंबली से भी गीला और सूखा कूड़ा को अलग करके उठाया जाएगा. जिसे सोनीपत के प्लांट में भेजा जाएगा. इस कूड़े से बिजली बनेगी. अब देखना यह होगा कि पिछले 8-10 साल से जिस निंबड़ी में कूड़ा डंप किया जा रहा है उसे कैसे अलग किया जाता है।

यहां प्रयास करें तो दिखेगा असर 

इन 2 बड़ी चुनौती से पार पाना होगा

गीला और सूखा कूड़ा कैसे अलग करेंगे : एनजीटी की शर्तों के अनुरूप गीला और सूखा कूड़ा को अलग करना होगा। इसको कैसे लागू करेंगे यह प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है, क्योंकि अभी तो आधे शहर में ही डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन चल रहा है।

खाली प्लॉट में कूड़ा फेंकने से कैसे रोकेंगे : हर जगह खाली प्लॉट में कूड़ा फेंका जा रहा है। 80 से अधिक कॉलोनियों में ऐसे प्लॉट खाली हैं जहां कूड़ा फेंका जा रहा है। प्रशासन के लिए चुनौती होगी कि प्लॉट मालिक ढूंढा जाए व चिन्हित किया जाए कि कौन-कौन से लोग कूड़ा फेंकते हैंं।


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