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दुष्यंत ने खुद को साबित किया ‘देवी’ का असली भक्त, इस तरह समझिए उनकी राजनीति

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राष्ट्रीय राजनीति में हमेशा फलक पर रहे चौधरी देवीलाल के परिवार के उभरते चिराग दुष्यंत चौटाला में कुछ तो खास बात है, जो उन्हें दूसरों से अलग खड़ा करती है। दुष्यंत सत्ता तक यूं ही नहीं पहुंचे। 26 साल की उम्र में देश के सबसे युवा सांसद बनने का अनुभव ले चुके दुष्यंत ने पहले खुद को साबित किया, फिर भाजपा शासित हरियाणा सरकार में डिप्टी सीएम बने। इनेलो से अलग होकर अस्तित्व में आई जननायक जनता पार्टी के मुखिया के तौर पर दुष्यंत ने करीब 11 माह तक हर रोज अपने राजनीतिक कौशल की परीक्षा दी।

सोशल मीडिया पर दुष्यंत चौटाला के भाजपा सरकार में शामिल होने के फैसले पर भले ही अंगुली उठाई जा रही, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि यदि सत्ता की पावर नहीं होगी तो फिर जरूरतमंद लोगों व पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ समर्थकों के काम कैसे होंगे। भाजपा सरकार में डिप्टी सीएम बनने के बाद अब दुष्यंत के पास कहने के लिए यह नहीं बचेगा कि वह पावर में नहीं हैं। दुष्यंत चौटाला फिल्म एक्टर धर्मेंद्र के कद्रदान हैं। उन्होंने फिल्म शोले कई बार देखी और इस फिल्म का गाना यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे उन्हें खासा पसंद है। भाजपा के साथ जजपा की दोस्ती शोले फिल्म के इसी गाने की दुष्यंत की सोच पर आधारित मानी जा रही है।

जजपा को 11 माह के कार्यकाल में खड़ा करने के लिए दुष्यंत की अंदरूनी टीम को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनकी पार्टी के मुख्य रणनीतिकार सतीश बैनीवाल, मीनू बैनीवाल, धर्मपाल सिंह (डीपी सिंह), नितिन और नवीन तो रहे ही, साथ ही आइटी सेल की अहम भूमिका रही है। अपनी रणनीति के बूते जजपा एक साल के भीतर ही प्रदेश में छुपी रुस्तम साबित हुई है। इस बार के चुनाव में जजपा ने 10 सीटें हासिल की हैं। कांग्रेस व भाजपा के बड़े दिग्गजों को हराकर जजपा ने अपनी राजनीतिक हनक बनाई है।

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