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पानीपत

निगम की अनदेखी का सितम झेल रहा है आपका वार्ड? क्या आपका प्रतिनिधि वादे करके भूल गया है ?

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वार्ड-2 में पिछले प्लान में 41 करोड़ रुपये विकास कार्यो पर खर्च किए गए, बावजूद इसके कई कॉलोनियों में आज तक पेयजल नहीं पहुंच पाया है। लोग आज भी प्राइवेट ऑप्रेटर को चार्ज देकर पानी ले रहे हैं। गलियों में दूषित पानी जमा होने से घरों से निकलने तक का रास्ता नहीं है। भाजपा पार्षद अब विरोध में उतर आए हैं। उन्होंने अधिकारियों के साथ मेयर को कठघरे में खड़ा करते हुए विकास कार्यों में भाई-भतीजावाद बरतने के आरोप लगाए। उन्होंने चेतावनी दी कि वे विकास कार्य शुरू नहीं हुए तो वे अपनी कुर्सी तक छोड़ देंगे।

वार्ड में जनप्रतिनिधियों ने विकास का दावा किया और विकास कार्यों के जमकर नारियल तोड़े गए। इनमें 37.59 लाख की लागत से गीता कॉलोनी में गलियों के लिए सात नवंबर 2018 को काम शुरू किया। इंदिरा विहार कॉलोनी में 43.59 लाख का भी काम शुरू किया था। दोनों में एक भी काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है।

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वाल्मीकि समाज कीचड़ से होकर गुजरने को मजबूर

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पार्षद पवन वाल्मीकि ने बताया कि विधायक महीपाल ढांडा ने ग्रांट लाकर दे दी है। निगम अधिकारी अब विकास कार्य कराने में फेल साबित हो रहे हैं। वे कई बार अपनी मांगों को लिखकर अधिकारियों को दे चुके हैं। वे किसी तरह की सुनवाई नहीं करते। मेयर अवनीत कौर गत दिनों वार्ड में आई थी। उन्होंने अपने नजदीकियों की सड़क बनवा दी, जबकि वाल्मीकि समाज के लोग कीचड़ से होकर अपने घरों में आने को मजबूर हैं।

इन कॉलोनियों ने निगम नहीं है मेहरबान, जन प्रतिनिधि भी वादे करके भूले

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हर महीने देते हैं 200 रुपये 

रामपाल गीता कॉलोनी के मास्टर रामपाल ने बताया कि कॉलोनी में पीने का पानी तक नहीं दिया जा रहा। प्राइवेट ऑप्रेटर को हर महीने 200 रुपये प्रति घर के हिसाब चार्ज दिया जाता है। वार्ड में विकास कार्यों के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन आज भी 70 फीसद काम बाकी है।

बच्चों के लिए परेशानी 

राजरानी राजरानी ने बताया कि कॉलोनी की गलियों में पानी जमा रहता है। बच्चे कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। कई बार तो स्कूल पहुंचते-पहुंचते कीचड़ में गिर जाते हैं। उनको फिर वापस आकर कपड़े बदलने पड़ते हैं। घरों के बाहर खड़ा हो पाना भी मुश्किल है।

गंदगी से बीमार हो रहे

राजबाला राजबाला ने बताया कि गंदगी के चलते बीमारी फैल रही हैं। घरों में हर समय बुखार व टायफाइड रहता है। जनप्रतिनिधि चुनाव के दिनों में तो विकास के दावे करते हैं, लेकिन बाद में उनकी सुध लेने तक नहीं आते। कॉलोनियों में लोगों का जीवन नरक बन गया है।

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