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पानीपत

न मेयर की न अधिकारियों की, पानीपत निगम में चलती सिर्फ़ ठेकेदारों की

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नगर निगम में ठेकेदारों की चलती है। ठेकेदार अपनी मनमर्जी से काम करते हैं और इन पर अधिकारियों का कोई लगाम भी नहीं है। ये आरोप निगम पर अक्सर लगते रहते हैं। ठेकेदारों की मौजूदा कार्यप्रणाली देखें तो इस बात में सच्चाई भी नजर आती है। करोड़ों के वर्क ऑर्डर लेकर निर्माण कार्य को भूले बैठे ठेकेदार को सोमवार को मेयर ने होर्डिग लगाकर याद दिलाने की कोशिश की, लेकिन फायदा नहीं हुआ। दो में से एक होर्डिंग मंगलवार सुबह को जरूर गायब मिला। ठेकेदारों की मनमानी का आलम यह है कि मेयर के याद दिलाने के बाद भी औद्योगिक सेक्टरों को छोड़ सेक्टर-13, 17 की सड़कों को प्रमुखता से बनाया जा रहा है।

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नगर निगम ने सेक्टर-25 में हरिद्वार बाईपास से जीटी रोड खादी आश्रम के सामने तक 1.17 करोड़ और थाना चांदनी बाग से लेकर सेक्टर-29 पुलिस चौकी जीटी रोड तक 2.67 करोड़ की लागत से सड़क के दो वर्क ऑर्डर आठ मार्च को ओम टेक कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिए थे। कंपनी का काम शुरुआत में ही सुस्त रहा। स्थानीय लोगों के सामने आने के बाद ठेकेदार ने गड्ढों में रोड़े डाल दिए, लेकिन सड़कों को बनाने नहीं आया।

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निगम के जानकारों ने बताया कि उक्त ठेकेदार सेक्टर-13-17 में एक सड़क का वर्क ऑर्डर भी मिला हुआ है। ठेकेदार प्रदीप का कहना है कि सेक्टर-13-17 की सड़क का काम पूरा होने के बाद सेक्टर-25 और 29 की सड़कों को बनाया जाएगा। वहीं सेक्टर-13-17 के लोगों का आरोप है कि उनकी मुख्य सड़क के गड्ढों में रोड़े डालकर छोड़ दिया है।

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नगर निगम ने गत वर्ष सेक्टर-29-वन में करीब चार करोड़ की लागत से बनने वाली सड़कों के वर्क ऑर्डर जारी किए थे, लेकिन ठेकेदार काम करने को आगे नहीं आया। सेक्टर-29-वन के प्रधान श्रीभगवान अग्रवाल ने बताया कि वे नगर निगम अधिकारियों को 10-12 बार मिलकर ज्ञापन सौंप चुके हैं। अधिकारी हर बार आश्वासन देकर टाल जाते हैं। गत महीने कमिश्नर वीना हुड्डा ने भी सेक्टर का मौका देखा था। उन्होंने खुद सड़कों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के बाद नए सिरे से टेंडर लगाने का भरोसा दिया है। वे अब आचार संहिता हटने का इंतजार कर रहे हैं।


नगर निगम के 48 टेंडरों के काम भी अपेक्षाकृत गति में नहीं चल रहे। इनमें से कई कामों को बीच में ही छोड़ दिया गया है। वार्ड-2, तीन, पांच और छह के लोगों की सबसे ज्यादा शिकायत हैं। नगर निगम ने आचार संहिता के दौरान विकास कार्य प्रभावित होने के डर से पहले ही वर्क ऑर्डर जारी किए थे, लेकिन ठेकेदार सभी काम शुरू नहीं कर पाए। अधिकारियों के चुनाव में व्यस्त होने के चलते ठेकेदारों ने कामों को बंद ही कर दिया।

ठेकेदारों को वर्क ऑर्डर के तुरंत बाद काम शुरू करना होता है। कई बार ठेकेदार कोई दूसरा काम पहले से वर्किंग में होने के चलते शुरू नहीं कर पाता, लेकिन उसको सभी काम समय पर पूरे करने होते हैं। संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट ली जाएगी। ठेकेदारों से जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा।
रमेश कुमार, एसई, नगर निगम

Source Jagran

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