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पानीपत

पाइट कॉलेज के छात्र और अभिभावक डरे, कहीं बच्चों के भविष्य पर ना हो ख़तरा!!

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पानीपत इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (पाइट) पट्टीकल्याणा की एनओसी में फर्जीवाड़ा सामने आया है। मामला खुलने पर जिला नगर एवं योजनाकार विभाग के निदेशक ने डीसी को कार्रवाई के आदेश दिए लेकिन इस बीच डीसी कार्यालय से इसकी फाइल ही गुम हो गई। इसका खुलासा आरटीआइ के तहत मिली जानकारी में हुआ है।

राज्य सूचना आयुक्त ने अब सीटीएम को फाइल के साथ डायरी और डिस्पैच रजिस्ट्री भी गुम होने की रिपोर्ट शपथ-पत्र के साथ मांगी है। आरोप है कि विद्यापीठ एजुकेशन ट्रस्ट ने पाइट कॉलेज की एनओसी लेने के लिए फर्जी दस्तावेज लगाए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2019 को होगी। कमिश्नर ने आरोपित अधिकारी व कर्मचारी पर सर्विस रूल के तहत विभागीय कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मान्यता

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जिला नगर एवं योजनाकार विभाग के निदेशक ने 26 नवंबर 2008 को पत्र के माध्यम से आदेश जारी किया था। पत्र में कहा गया था कि विद्यापीठ एजुकेशन ट्रस्ट ने पाइट कॉलेज पट्टीकल्याणा की फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 16 दिसंबर 2004 को एनओसी ली है। विभागीय नॉर्म्‍स के अनुसार जीटी रोड से संस्थान को जाने वाला रास्ता 30 फीट का होना चाहिए। संस्थान का रास्ता 16.5 फीट ही है। बाकी रास्ता ग्राम पंचायत से गिफ्ट डीड है। निदेशक ने एनओसी रद कर कार्रवाई के लिए तत्कालीन डीसी को लिखा था। इसकी एक कॉपी वरिष्ठ टाउन प्लानर रोहतक और डीटीपी पानीपत को भी भेजी थी।

 

एसडीएम समालखा की पाइट कॉलेज पर कार्रवाई रिपोर्ट को अधिकारियों ने दबा दिया। 18 अक्टूबर 2009 को एसडीएम ने रिपोर्ट में कहा कि विद्यापीठ एजुकेशन ट्रस्ट ने पाइट कॉलेज की एनओसी लेने के लिए फर्जी दस्तावेज प्रयोग किए हैं। ट्रस्ट ने 16 दिसंबर 2004 को एनओसी के लिए आवेदन किया था। उन्होंने राजस्व से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की। कुछ जमीन पंचायत की मिली है। ग्राम पंचायत के प्रस्ताव पर ही जमीन दी जा सकती है।

फर्जी हस्ताक्षर किए गए

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जांच में सामने आया कि जींद के अनिल बंसल व अन्य के नाम जमीन हैं और अनिल के हस्ताक्षर फर्जी हैं। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा कि तीन करम का चौड़ा रास्ता जीटी रोड से पांच एकड़ लंबाई का है, लेकिन एजुकेशन ट्रस्ट की जमीन चार एकड़ की दूरी से शुरू हो जाती है। एनओसी के लिए चार एकड़ में तीन करम चौड़ा रास्ता साथ-साथ बनाया जाना था। जिसकी मल्कियत ग्राम पंचायत के नाम करनी थी। एनओसी के लिए 16 दिसंबर 2004 को आवेदन किया है। उस वक्त राजस्व रास्ता सिर्फ 16.5 फीट था। 30 जनवरी 2005 को तैयार शिजरा जानबूझकर तैयार किया है।

इकरारनामे पर पंचायत की तरफ से कोई प्रस्ताव नहीं लिया। अनिल बंसल ने भी बयान में बताया कि इंतकाल उनकी सहमति से नहीं हुआ है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार 33 फीट का रास्ता 23 जून 2007 के बाद ही जीटी रोड से विद्यापीठ एजुकेशन ट्रस्ट की भूमि तक बनता है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा कि एनओसी प्राप्त करने के कागजात जानबूझकर गलत तरीके से तैयार किए गए हैं। जिला नगर एवं योजनाकार विभाग ने एनओसी ठीक रद की है।

आरटीआइ में मांगी जानकारी 

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मोहन सिंह ने आरटीआई के तहत एसडीएम समालखा की डीसी को 16 अक्टूबर 2009 को पत्र क्रमांक 679-एसटी की कार्रवाई की सत्यापित कॉपी दी जाएगी। यह किस डायरी नंबर पर इंद्राज की गई है, उक्त पेज की सत्यापित कॉपी दी जाए। यह रिपोर्ट किस अधिकारी व कर्मचारी की टेबल पर कितने समय तक लंबित रही, मोहन सिंह की तीन अप्रैल 2018 को दी शिकायत पर किस-किस को तलब किया, इसकी जांच रिपोर्ट दी जाए। डीसी कार्यालय से एसडीएम की जांच रिपोर्ट को आगामी कार्रवाई के लिए कहां भेजा गया।

जन सूचना अधिकारी ने दी फाइल गायब होने की जानकारी 

जन सूचना एवं जिला राजस्व अधिकारी ने राज्य सूचना आयुक्त को 29 नवंंबर 2018 को अपनी रिपोर्ट दी। उन्होंने बताया कि एक अक्टूबर 2018 को जारी पत्र सीटीएम के माध्यम 17 अप्रैल 2018 को प्राप्त हुआ। बिंदु एक व तीन कार्यालय से संबंधित है। प्रार्थी की मांगी सूचना से संबंधित रिकॉर्ड व फाइल कार्यालय के स्थानांतरण के कारण खुर्द-बुर्द हो चुका है। काफी तलाश के बाद भी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

कॉलेज का अपना 16.5 फीट का रास्ता था। इस रास्ते के एक तरफ एक किसान और दूसरी तरफ ग्राम पंचायत की जमीन है। किसान से जमीन लेकर ग्राम पंचायत के नाम करा दी थी। विद्यापीठ एजुकेशन ट्रस्ट ने पानीपत इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी कॉलेज की नियमानुसार एनओसी ली थी। किसी ने कोई सूचना मांगी है तो उसको सूचना दी जाएगी। मैं किसी भी तरह की जांच को तैयार हूं।
हरिओम तायल, चेयरमैन, विद्यापीठ एजुकेशन ट्रस्ट

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पाइट कॉलेज की फाइल गुम होने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इतने पुराने मामले की जांच करा कर ही कुछ बता सकती हूं। किसी तरह की गड़बड़ी संज्ञान में आने के बाद विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
सुमेधा कटारिया, डीसी, पानीपत

Source jagran

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