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पानीपत

पानीपत की इस बेटी ने साबित कर दिया कि अगर महिला कुछ ठान लें तो वह पुरुषों से कम नहीं।

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Spread the love महिलाएं आज पुरुषों के बराबर कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। कोई ट्रेन चला रहा है तो कोई हवाई जहाज उड़ा रहा है। महिलाओं ने अपने हौसले के दम पर दुनिया को ये संदेश दिया है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बस उसे कर गुजरने का जज्बा […]

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महिलाएं आज पुरुषों के बराबर कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। कोई ट्रेन चला रहा है तो कोई हवाई जहाज उड़ा रहा है। महिलाओं ने अपने हौसले के दम पर दुनिया को ये संदेश दिया है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बस उसे कर गुजरने का जज्बा होना चाहिए। ऐसी ही एक मिसाल पानीपत की मीना रानी ने कायम की है।

36 साल की मीना भारी वाहन चलाने की ट्रेनिंग ले रही हैं। उनका इरादा सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि महिलाओं को आगे बढऩे के लिए प्रेरित करना है। अमर भवन चौक की मीना रानी बीए, डीएड, बीएड पास हैं। उन्होंने जब हेवी व्हीकल का लाइसेंस के लिए आवेदन किया तो रोडवेज विभाग के कर्मचारी भी प्रोत्साहित करते नजर आए। फिलहाल, मीना सीएम ङ्क्षवडो में अपनी सेवा दे रही हैं।

माता-पिता की हो चुकी मौत

मीना के माता-पिता की मौत हो चुकी है। बड़े भाई सुभाष शर्मा के परिवार के साथ रहती हैं। महिलाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से भाजपा महिला मोर्चा ज्वाइन किया। जनरल बॉडी में शहरी मंडल सचिव, मीडिया प्रभारी के रूप में सेवा दे चुकी हैं। फिलहाल, कार्यकारिणी सदस्य के रूप में कार्य कर रही हैं।

बदलाव की जागी तमन्ना

मीना ने दिसंबर 2014 में हल्के वाहन का लाइसेंस बनवाया था। मीना कहती हैं कि ट्रक और बस जैसे भारी वाहनों को चलाते पुरुष ड्राइवरों को देखा तो मन में सवाल उठा कि इस क्षेत्र में महिलाएं क्यों नहीं हैं। ऐसे में उन्होंने खुद बदलाव लाने की ठानी। अपना और भाई सुभाष का भारी वाहन के लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन सबमिट किया। महिलाओं के लिए बनी सरकारी नीतियों के आधार पर उन्हें लगभग 20 दिनों के भीतर ही ट्रेनिंग के बुला लिया गया। आगामी 26 जनवरी तक उनकी ट्रेनिंग चलेगी।

सीखना एक कला है, हमेशा परिवर्तनशील रहना चाहिए

मीना कुमारी का मानना है कि सीखना एक कला है। मनुष्य को जीवन में आगे बढऩे के लिए हमेशा सीखते रहना चाहिए। समय के हिसाब से बदलने के बाद ही हम आगे बढ़ सकते हैं। कहती हैं कि अक्सर लोगों की धारणा को गलत साबित करने वाला ही मिसाल बनता है। महिलाओं को जागरूकता का संदेश देना ही उनका ट्रेनिंग लेने का असल उद्देश्य है।

महिलाएं जागरूक हों

सरकारी नीतियों के आधार पर महिला को आवेदन जमा कराने के 20 दिन के भीतर ही ट्रेनिंग पर बुलाया गया है। ट्रेनिंग लेने वाली युवतियों और महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान है। महिलाएं जागरूक हों और आगे बढ़ें, इसके लिए ट्रेनिंग के दौरान भी हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
रामनिवास रावल, ट्रेनिंग स्कूल इंचार्ज

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