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पोस्टमार्टम की थी तैयारी, तभी स्ट्रेचर पर लेटे ‘मुर्दे’ ने पकड़ लिया हाथ और फिर..

देश में सरकारी अस्पतालों की बदहाली और लापरवाही की खबरे तो अक्सर सुनने को मिलती रहती हैं पर मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के अस्पताल ने तो लापरवाही की इतहां ही कर दी जब एक नौजवान युवक को मृत घोषित कर उसका शव मॉर्चुरी में रखवा दिया और उसके पोस्टमार्टम की तैयारी भी की जाने लगी.. […]

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देश में सरकारी अस्पतालों की बदहाली और लापरवाही की खबरे तो अक्सर सुनने को मिलती रहती हैं पर मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के अस्पताल ने तो लापरवाही की इतहां ही कर दी जब एक नौजवान युवक को मृत घोषित कर उसका शव मॉर्चुरी में रखवा दिया और उसके पोस्टमार्टम की तैयारी भी की जाने लगी..  लेकिन जैसे ही डॉक्टर और स्वीपर शव के पास पहुंचे तभी मुर्दे ने स्वीपर का हाथ पकड़ लिया और फिर पता चला कि जिसे मुर्दा समझ मॉर्चुरी में रखा गया था, वो युवक जिंदा था। ऐसे में इसके बाद तुरंत युवक का इलाज शुरू किया गया।

सड़क दुर्घटना में घायल हुआ था युवक

दरअसल पूरा मामला कुछ ऐसा है कि छिंदवाड़ा जिले का रहने वाला 30 वर्षीय हिमांशु रविवार की दोपहर कार एक्सीडेंट का शिकार हो गया था जिसमें उसके सिर में गंभीर चोटें आई थीं। वहीं वाहन में सवार उसकी पत्नी, बेटी और परिजनों को मामूली चोटें आई थी .. ऐसे में इस घटना के बाद हिमांशु के परिजन इलाज के लिए उसे तुरंत नागपुर ले गए, पर वहां डॉक्टरों ने ब्रेन डेड बताकर उन्हे वापस भेज दिया था। जिसके बाद परिजन हिमांशु को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे थे पर यहां भी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने चेकअप के बाद उसे मृत घोषित कर उसकी बॉडी मॉर्च्युरी में रखवा दी।

पोस्टमार्टम की हो रही थी तैयारी

छिंदवाड़ा अस्पताल के मॉर्चुरी में हिमांशु बॉडी लाए जाने के बाद उसके पोस्टमार्टम की तैयारी चल रही थी क्योंकि इसके बाद ही शव को परिजनों को सौंप जाना था..  ऐसे में करीब 4 घंटे तक पुलिस कार्रवाई चली और फिर शव को पोस्‍टमार्टम के लिए ले जाया गया .. पर पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टर और स्वीपर जैसे ही वे युवक के पास पहुंचे उसने उनका हाथ पकड़ लिया.. जिससे पहले तो वहां मौजूद डॉक्टर और दूसरे लोग दंग रह गए पर फिर डॉक्टर ने स्थिति को भांपते हुए युवक को वार्ड में भर्ती कराया, जहां जांच में पता चला कि युवक की सांसे चल रही है और फिर तब उसका इलाज शुरू किया गया। इसके बाद युवक की स्थिति नियंत्रण में आने के साथ ही उसे बेहतर इलाज के लिए दुबारा नागपुर अस्पताल रेफर कर दिया गया।

परिजनों में आक्रोश

ऐसे में इस घटना के बाद से युवक के परिजनों में आक्रोश है..वे सीधे तौर पर इसके लिए अस्पताल को कसूरवार ठहरा रहे हैं.. क्योंकि एक्सीडंट के बाद से हिमांशु के परिजन छिंदवाड़ा से लेकर नागपुर के अस्पतालों के खूब चक्कर काटे, पर हर जगह उसे मृत बताकर परिजनों को लौटा दिया गया था।

वहीं अस्पताल और डाक्टर्स इसे मेडिकल कंडिशन बता रहे हैं .. प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. सीएस गेडाम के अनुसार ब्रेन डेड की स्थिति में ऐसा होता है जिसे मेडिकल टर्म में ट्रांजिशनल कहते हैं.. इसमें व्यक्ति का हार्ट और पल्स काम करना बंद कर देते हैं..  जो कि फिर से शूरू भी हो सकते हैं। चूंकि ब्रेन डेड होने पर ब्रेन का संपर्क शरीर के दूसरे हिस्सों से टूट जाता है.. ऐसे में हिमांशु की स्थिति भी ट्रांजिशनल लग रही है।

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