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चंडीगढ़

बिना हेलमेट टू व्हीलर पर पीछे बैठी 24 साल की लड़की की मौत, कार की हेडलाइट पर जोर से लगा सिर

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टू व्हीलर पर महिलाओं के लिए हेलमेट को ऑप्शनल करने की प्रशासन की नोटिफिकेशन के अगले ही दिन इसका रिजल्ट भी देखने को मिल गया। मंगलवार को एक्सीडेंट में बिना हेलमेट टू व्हीलर पर पीछे बैठी एक 24 साल की लड़की की मौत हो गई। उसका सिर कार की हेडलाइट पर जोर से लगा। अगर उसने हेलमेट पहना होता तो उसकी जान नहीं जाती।

 

मृतक की पहचान 24 साल की ममता के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों व्हीकल को कब्जे में ले लिया है। पुलिस ने कार ड्राइवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। कार को प्रिसिंपल सेक्रेटरी, जेल (पंजाब) का पीए बलजिंदर सिंह ड्राइव कर रहे थे।

 

ममता हरियाणा के झज्झर की रहने वाली थी और सेक्टर-36 के देव समाज कॉलेज में गाइडेंस एंड काउंसिलिंग में डिप्लोमा कर रही थी। मंगलवार को उसे इंटरव्यू के लिए जाना था। हादसे के समय बाइक को काॅन्स्टेबल बलजीत चला रहा था। बलजीत मृतक के गांव का ही रहने वाला है। वह उसे अपनी बाइक पर इंटरव्यू दिलाने के लिए लेकर जा रहा था। बलजीत के भी हाथ में फ्रैक्चर आया है।

 

हादसा सेक्टर 36-23 डिवाइडिंग रोड पर हुआ। बलजीत अपनी बाइक से ममता को पिक करने के बाद निकला ही था कि सेक्टर-36 इस्कॉन मंदिर के सामने कार ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ममता कार की लेफ्ट हेडलाइट से जा टकराई। गाड़ी का बम्पर, फैंडर और हेड लाइट बुरी तरह से टूट गए। बलजीत को भी पांव और बाजू पर चोटें पहुंचीं। बलजिंदर सिंह की कार में ही दोनों घायलों को इलाज के लिए जीएमएसएच 16 पहुंचाया गया, जहां पर डॉक्टरों ने ममता को मृत घोषित कर दिया।

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चंडीगढ़

फिर सड़कों पर रोडवेज कर्मचारी, रोहतक में बैठक के बाद हड़ताल का एलान संभव

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किलोमीटर स्कीम के खिलाफ 18 दिन के चक्का जाम के बाद हाई कोर्ट के आदेश पर ठंडे पड़े रोडवेज कर्मचारी फिर उग्र होने लगे हैं। विगत 3 नवंबर को काम पर लौटने के ठीक एक महीने बाद सोमवार को पूरे प्रदेश में रोडवेज कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर दो घंटे तक प्रदर्शन किया। इस बार टकराव का मुद्दा बने हैं वर्ष 2016 में अनुबंध पर रखे गए 365 चालक, जिन्हें परिवहन निदेशालय ने नौकरी से हटाने का आदेश जारी कर दिया है।

चालक-परिचालकों का ओवरटाइम बंद करने और गांवों में बसों के रात्रि ठहराव को बंद करने से उपजे हालात पर रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी ने बुधवार को रोहतक में बैठक बुला रखी है। तालमेल कमेटी नेताओं ने धमकी दी है कि अगर फैसला नहीं बदला तो कर्मचारी फिर से हड़ताल पर जा सकते हैं।

तालमेल कमेटी के पदाधिकारियोंइंद्र सिंह बधाना, वीरेंद्र धनखड़, दलबीर किरमारा, हरिनारायण शर्मा, शरबत पूनिया, बलवान सिंह दोदवा ने कहा कि हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद फरीदाबाद में 37 रोडवेज चालकों को बाहर कर दिया गया है। सरकार सभी 365 चालकों को हटाने का आदेश वापस लेते हुए कानून में बदलाव कर इन्हें पक्का करे।

दो दिन में डिपुओं को मिलेंगे नए कंडक्टर

हाल ही में भर्ती 1010 कंडक्टरों को स्टेशन की अलॉटमेंट शुरू हो गई है। सोमवार को परिवहन निदेशालय में चयनित उम्मीदवारों की काउंसलिंग कर उनसे पसंद के स्टेशन मांगे गए। दो दिन में काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें संबंधित डिपुओं में भेज दिया जाएगा।

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अंबाला

हरियाणा में नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने खोले अपने पत्ते, लिया महत्वपूर्ण फ़ैसला

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हरियाणा में नगर निगम चुनाव में कांग्रेस अपने सिंबल पर उम्मीद्वारों को नहीं उतारेगी। इसका ऐलान दिल्ली में हुई कांग्रेस की बैठक में हुआ। बैठक में हरियाणा कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

हरियाणा के पांच नगर निगमों के चुनाव 16 दिसंबर को होने हैं। ऐसे में कांग्रेस की तरफ से चुनाव में उम्मीद्वारों को पार्टी निशान पर उतारने को लेकर कसमकश की स्थिति थी लेकिन अब यह साफ हो गई है।

कांग्रेस नेता पीसी चाको के नेतृत्व में हुई बैठक में हरियाणा में नगर निगम चुनाव में सिंबल पर चुनाव ना लड़ने का फैसला लिया गया है।

कांग्रेस की तरफ से दिल्ली में आयोजित इस बैठक में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, विधायक दल की नेता किरण चौधरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा, सांसद दीपेंद्र हुड्डा मौजूद रहे।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर चुनाव सिंबल पर लड़े जाने के पक्ष में थे, लेकिन दूसरे नेताओं के एतराज के बाद चुनाव सिंबल पर न लड़े जाने का निर्णय लिया गया।

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चंडीगढ़

हरियाणा में कांग्रेस को नया जीवन देने वाला मौक़ा, पर अपनी ही उलझन में है ये पार्टी

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हरियाणा के पांच नगर निगमों में होने वाले चुनाव को लेकर कांग्रेस दुविधा की स्थिति में है। हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर जहां पांचों नगर निगमों में मेयर और पार्षदों के चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़ाना चाहते हैं, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके समर्थकों की राय तंवर से जुदा है। अलग-अलग राय के चलते कांग्रेस के प्रांतीय नेतृत्व ने फैसला पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी पर छोड़ दिया है।

फरीदाबाद व गुरुग्राम नगर निगमों के चुनाव भी तंवर पार्टी सिंबल पर लडऩा चाहते थे, लेकिन पार्टी के दूसरे धड़े खासकर हुड्डा खेमे द्वारा विरोध करने के बाद वे अपने इरादों में कामयाब नहीं हो सके। अब फिर पांच नगर निगमों के चुनाव को लेकर तंवर और हुड्डा खेमों में टकराव के हालात हैं।

अशोक तंवर पांचों नगर निगमों के चुनाव पार्टी सिंबल पर लडऩे में अपना फायदा मान रहे हैं, जबकि हुड्डा के लिए यह किसी चुनौती से कम नहीं है। सूत्रों के अनुसार यदि पांचों नगर निगम में कांग्रेस जीत दर्ज कराने में कामयाब हो गई तो इसका श्रेय पार्टी प्रधान के नाते अशोक तंवर ले सकते हैं। यदि नगर निगम में कांग्रेस की हार होती है तो तंवर इसका ठीकरा हुड्डा पर फोड़ सकते हैं।

तंवर और हुड्डा में छत्तीस का आंकड़ा है। दोनों ही एक दूसरे के खिलाफ हमला करने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहते। ऐसे में हुड्डा और उनके समर्थक विधायकों की कोशिश है कि पांचों नगर निगम के चुनाव में अपनी ऊर्जा लगाने की बजाय विधानसभा और लोकसभा चुनाव की तैयारी की जाए।

दूसरी तरफ तंवर ने पांचों नगर निगमों के जिला प्रभारियों के संभावित उम्मीदवारों के नामों की रिपोर्ट तलब कर ली है।

 

पानीपत में सतविंद्र सिंह संधू, यमुनानगर में ओमप्रकाश देवीनगर, हिसार में बिजेंद्र सिंह कादियान, रोहतक में राजेंद्र शर्मा और करनाल में पवन गर्ग जिला प्रभारी नियुक्त हैं। करनाल को छोड़कर बाकी नगर निगमों की रिपोर्ट तंवर के पास आ चुकी है।

हुड्डा फिलहाल राजस्थान के चुनाव में व्यस्त हैं। लिहाजा दोनों खेमों में बढ़ते टकराव को देखते हुए फैसला कांग्रेस हाईकमान पर छोड़ दिया गया है।

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