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हरियाणा विधानसभा चुनाव

भाजपा-जजपा-कांग्रेस सबने टिकट देने में की बड़ी ग ड़बड़ी.. सारा खेल बि गाड़ा

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चुनाव में टिकटों के वितरण का दौर वह समय होता है, जिसमें सबसे ज्यादा नेता पार्टी छोड़ते हैं। नेताओं को जहां से टिकट की आस दिखती है उसी के हो जाते हैं। इनमें से कोई टिकट लेकर खुद को सिकंदर साबित करता है तो कइयों के अरमान आंसुओं में बह जाते हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में भी यही हुआ। कई नेताओं ने पार्टियां छोड़ी, कोई दूसरी पार्टी से टिकट लेकर चुनाव मैदान में उतरा तो कुछ ने निर्दलीय ही लड़ने का फैसला किया। इनमें से कुछ जीतकर विधानसभा पहुंच गए, कुछ के सपने अधर में रह गए। वहीं कुछ नेता न खुद जीते पाए न मूल पार्टी जीत पाई और फायदा दूसरी पार्टियों ने उठा लिया।

परमिन्द्र ढुल: इन्होने जुलाना में इनेलो छोड़ भाजपा के टिकट पर चुना लड़ा और हार गए। आलम यह रहा कि इनकी पुरानी पार्टी भी यहां नहीं जीत पाई और इसका फायदा जजपा को मिल गया।
जाकिर हुसैन : इन्होंने नूंह में इनेलो छोड़ कर भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ा और चुनाव हार गए।
राजवीर बराड़ा : मुलाना में इनेलो छोड़कर भाजपा से टिकट प्राप्त कर चुनाव लड़ा और चुनाव में हार गए।
लीलाराम गुर्जर : कैथल में इनेलो छोड़कर भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़े और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला को हराकर खुद जीते।
राम कुमार कश्यप : इनेलो छोड़कर भाजपा के टिकट पर इंद्री से चुनाव लड़े और जीत भी गए हैं।
रामचंद्र काम्बोज : इनेलो छोड़कर भाजपा के टिकट पर रानिया से चुनाव लड़े और हार गए। इनेलो का भी खेल बिगाड़ा।
रणबीर गंगवा : लोकसभा चुनाव से पहले ही इनेलो छोड़ी और भाजपा के टिकट पर नलवा से विधानसभा चुनाव लड़ा और
चुनाव जीत गए।
सतीश नांदल : इनेलो छोड़कर भाजपा में आए और गढ़ी सांपला किलोई से तीसरी बार भूपेंद्र हुड्डा के सामने चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।
नसीम अहमद : फिरोजपुर झिरका में इनेलो छोड़कर भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़े पर हार गए।
नागेन्द्र भडाना : फरीदाबाद एनआईटी में इनेलो छोड़कर भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़े पर हार गए।
जगदीश नैय्यर : होडल में इनेलो छोड़कर भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़े और जीत गए।
विनोद भ्याणा : कांग्रेस छोड़कर भाजपा की टिकट पर हांसी से चुनाव लड़े और जीत गए।
दूडाराम : चुनाव की घोषणा से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए और फतेहाबाद से चुनाव भी जीते।
बच्चन सिंह आर्य : कांग्रेस छोड़कर भाजपा की टिकट पर सफीदों से चुनाव लड़े लेकिन हार गए।
बलकौर सिंह : कालांवली से सिटिंग विधायक होते हुए अकाली दल छोड़ दिया और भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन हार गए।
देवेन्द्र बबली : नामांकन से पहले कांग्रेस से जजपा में आए और टोहाना से चुनाव लड़ कर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला को हराया।
महावीर गुप्ता : जींद में कांग्रेस छोड़कर जजपा में आए लेकिन चुनाव हार गए।
ईश्वर सिंह : नामांकन से ठीक पहले कांग्रेस से जजपा में आए और गुहला से चुनाव लड़ कर जीते।
सतविंद्र राणा : कांग्रेस छोड़कर जजपा में आए कलायत से चुनाव लड़े और हार गए।
रणधीर मलिक : गन्नौर में कांग्रेस छोड़कर जजपा की टिकट पर चुनाव लड़े और हार गए।
भूपेंद्र मलिक : कांग्रेस से टिकट नहीं मिली तो बरोदा से जजपा के टिकट पर चुनाव लड़े और हार गए।
शंकर भारद्वाज : भिवानी से कांग्रेस छोड़कर जजपा की टिकट पर लड़े और हार गए।
सम्राट यादव : अटेली से कांग्रेस से टिकट नहीं मिला तो जजपा से चुनाव लड़े और हार गए।
सतपाल सांगवान : नामांकन से ठीक पहले कांग्रेस से जजपा में आए और दादरी से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।
वीरेंद्र सिवाच : फतेहाबाद में भाजपा छोड़कर जजपा से चुनाव लड़े पर हार गए।
पवन खरखौदा : भाजपा से टिकट नहीं मिला तो अंतिम समय में जजपा सेटिकट लेकर खरखौदा से चुनाव लड़े लेकिन हार गए।
अशोक अरोड़ा : इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष रहे और अब कांग्रेस से थानेसर में चुनाव लड़े लेकिन हार गए।
प्रदीप चौधरी : कालका में इनेलो छोड़कर कांग्रेस से चुनाव लड़े और जीत गए।
रणधीर कापड़ीवास : भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो निर्दलीय चुनाव में लड़े। न तो खुद जीते और न भाजपा जीत पाई। फायदा कांग्रेस के चिरंजीव राव को मिला और जीत गए।
रणजीत सिंह : कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया तो निर्दलीय लड़े और रानियां से जीतकर विधायक बने हैं।
निर्मल सिंह : इनको और इनकी बेटी चित्रा को कांग्रेस से टिकट नहीं मिली तो दोनों ने अम्बाला शहर और कैंट से चुनाव लड़ा। दोनों ही जगह न तो खुद जीत पाए और न ही कांग्रेस जीत पाई। भाजपा को इसका फायदा मिला।
नयनपाल रावत : पृथला से भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो निर्दलीय चुनाव लड़े और जीत गए।
सोमवीर सांगवान : दादरी से भाजपा ने टिकट नहीं दी तो निर्दलीय चुनाव लड़े और जीत गए।
राकेश काम्बोज : इंद्री से कांग्रेस ने टिकट नहीं दी तो निर्दलीय चुनाव लड़े और हार गए।

  • भाजपा ने इनेलो से आए 11, कांग्रेस से आए 3 और शिअद के एक नेता समेत 15 ऐसे नेताओं को टिकट दिया था।
  •  जजपा ने कांग्रेस से आए 10, भाजपा से आए 3 और आप से आए एक नेता समेत 14 ऐसे नेताओं को मैदान में उतारा था।
  • कांग्रेस ने इनेलो से आए 2 नेताओं को उम्मीदवार बनाया था।
  • कांग्रेस से जाने वाले कुल 28 नेताओं ने चुनाव लड़ा, जिनमें से 16 विभिन्न पार्टियों से और शेष ने निर्दलीय लड़े।

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