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पानीपत

मंदिर प्रबंधन की ऐसी लापरवाही और कारोबारी सोच का नतीजा, पाथरी माता का मंदिर

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500 साल से भी ज्यादा समय से पाथरी माता की पूजा हाे रही है। कहते हैं यहां पर एक नागा जोगी बाबा ने धुनी लगाई थी। गांव के नत्थू भगत ने बाबा की खूब सेवा की। जाते वक्त बाबा ने उन्हें एक डिब्बी देते हुए कहा कि इसे हमेशा पास रखना। मुरादें पूरी होंगी। शर्त रखी कि डिब्बी को खोलना मत। इसके बाद नत्थू का रुतबा बढ़ता गया। उसकी पत्नी ने एक दिन डिब्बी खोल दी। उसके बाद गांव में बच्चे मरने लगे, पशु बीमार होने लगे। शादियां टूटने लगी। इसके बाद लाेग धूतनी माता के नाम से उस शक्ति की पूजा करने लगे। गांव का नाम पाथरी है। इसलिए बाद में पाथरी माता के नाम से प्रसिद्ध हाे गई।

हिसार के गांव बनभौरी में माता का प्राचीन मंदिर है। जहां पाथरी माता मंदिर की तरह ही हजारों भक्त आते हैं और चढ़ावा व प्रसाद चढ़ाते हैं। प्रसाद की बर्बादी न हो इसलिए बनभौरी माता मंदिर की मैनेजमेंट चढ़ाए हुए प्रसाद को भंडारे में वितरित करती है। साथ ही गांव के जरूरतमंदों में भी बांट दिया जाता है। अगर ऐसा ही पाथरी माता मंदिर के संचालक करें तो प्रसाद को पैरों तले आने से बचाया जा सकता है।

अगले बुधवार तक व्यवस्था ठीक कराएंगे: डीसी 

मंदिर टेकओवर का अधिकार पूर्ण रूप से सरकार के पास है। हम ताे उसी इंतजार में बैठे हैं कि कब सरकार नाेटिफिकेशन जारी कर रही है। मंदिराें में अव्यवस्था की हमें पूरी जानकारी है। अगले बुधवार के बाद हम कुछ न कुछ स्टेप जरूर लेंगे। इससे पहले एसपी के साथ मंदिर की व्यवस्था देखने जाएंगे। -सुमेधा कटारिया, डीसी पानीपत

पंचायत चाहती है सरकार करे टेकओवर : मोनू 

पंचायत काे सालाना एक कराेड़ से ज्यादा की आमदनीं हाे रही, जाे गांव के विकास में खर्च हाे रहे हैं। फिर भी पंचायत चाहती है कि मंदिराें काे सरकार टेकअाेवर कर यहां की व्यवस्था संभालें। मामला दाे गांव का है। इस कारण से विवाद है। बिना व्यवस्था ही प्रसाद की बेकद्री हो रही है। -माेनू, पंचायत समिति सदस्य

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