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पानीपत

मॉडल स्टेशन होने के बावजूद इतनी गंदगी और ख़राब पड़े उपकरण… पानीपत जंक्शन की हालत ख़राब

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पानीपत के रेलवे स्टेशन काे चार साल पहले मॉडल स्टेशन का दर्जा मिला था। मगर चार साल में स्टेशन के हालात बद से बदतर हो गए हैं। डिस्प्ले स्क्रीन खराब पड़े हैं। कोच इंडिकेटर शोपीस बन गए हैं। स्टेशन के गेट से लेकर अंदर तक हर तरफ गंदगी रहती है। तीन बार ब्लास्ट के बाद भी स्टेशन पर सुरक्षा मात्र दिखावे की है। सीसीटीवी कैमरे तक खराब हैं।

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पानीपत स्टेशन से पैसेंजर, सुपर फास्ट, एक्सप्रेस, शताब्दी और मालगाड़ी सहित 150 ट्रेनें प्रतिदिन गुजरती हैं। इनमें से 74 ट्रेनों का पानीपत स्टेशन पर ठहराव है। 14 पैसेंजर ट्रेन पानीपत से बन कर जाती हैं और 12 पैसेंजर ट्रेन दिल्ली, जींद, कुरुक्षेत्र, अंबाला आदि से आती हैं। इसके चलते 3900 टिकटों की प्रतिदिन की बिक्री है। इससे 14 लाख रुपए रोज का राजस्व आता है। पानीपत स्टेशन पर पांच प्लेटफार्म हैं। प्लेटफॉर्म नंबर एक को छोड़कर किसी भी प्लेटफॉर्म पर न ही शौचालय हैं और न ही वेटिंग रूम। प्लेटफार्म नंबर एक पर बने वेटिंग रूम के हालात भी काफी दयनीय हैं। अंदर और बाहर गंदगी पड़ी रहती है।

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मुख्य गेट और प्लेटफार्म नंबर एक पर लगी डिस्प्ले स्क्रीन काफी दिनों से खराब है। कोच इंडिकेटर भी बंद हैं। यह अधिकारियों को नजर नहीं आता है। इस कारण यात्रियों को ट्रेनों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए सिर्फ पूछताछ कार्यालय पर ही निर्भर रहना पड़ता हैै। ऐसे में किसी यात्री की ट्रेन छूट रही हो तो उसे काफी परेशानी उठानी पड़ती है। उसे ट्रेन की स्थिति नहीं पता लग पाती है और वेंडर से पूछना पड़ता है।

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पानीपत रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण अपराधी युवक दिनभर स्टेशन परिसर में ही घूमते रहते हैं। आए-दिन ट्रेन के अंदर यात्रियों का सामान चोरी होने की घटनाएं होती हैं। स्टेशन के बाहर से बाइक चोरी की घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं। 30 दिन में पांच बाइक चोरी हो चुकी हैं।

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