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रोहतक: सलाखों के पीछे जिंदगी बिताएगी साढ़े 3 साल की मासूम बच्ची, वजह चौंकाने वाली

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Spread the love साढ़े 3 साल की बच्ची सलाखों के पीछे रहेगी, अब उसकी जिंदगी जेल की चारदिवारी में ही कटेगी। ऐसा होने के पीछे की वजह चौंकाने वाली है। मामला हरियाणा के रोहतक का है। दो साल पहले विवाहिता की मौत के मामले में एडीजे सोनिका गोयल की अदालत ने कैलाश कॉलोनी निवासी पति […]

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साढ़े 3 साल की बच्ची सलाखों के पीछे रहेगी, अब उसकी जिंदगी जेल की चारदिवारी में ही कटेगी। ऐसा होने के पीछे की वजह चौंकाने वाली है। मामला हरियाणा के रोहतक का है। दो साल पहले विवाहिता की मौत के मामले में एडीजे सोनिका गोयल की अदालत ने कैलाश कॉलोनी निवासी पति अनिल, ससुर जय किशन व सास शीला को सात-सात साल की कैद व दहेज उत्पीड़न पर 3 साल की कैद व 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

तीनों के सलाखों के पीछे जाने से घर पर साढ़े तीन साल की बच्ची को संभालने वाला कोई नहीं था। इसके चलते अदालत ने बच्ची को भी उनके साथ रखने की अनुमति दे दी। हालांकि जब भी चाहे परिजन बच्ची को जेल से बाहर सुरक्षित हाथों में सौंप सकते हैं। अभियोजन के अनुसार चुन्नीपुरा निवासी कृष्ण सैनी ने 2016 में सिविल लाइन थाने में शिकायत दी थी कि उसने अपनी बेटी की शादी 2014 में कैलाश कॉलोनी निवासी अनिल के साथ की थी। शादी के बाद उसकी बेटी को पति व परिवार के दूसरे सदस्य दहेज के लिए तंग करने लगे। कई बार पैसे मांगे गए।

उन्होंने किसी तरह उसने डिमांड पूरी की, लेकिन उसकी बेटी का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ। यहां तक की कार की डिमांड की जाने लगी। मजदूरी करने वाला पिता डिमांड पूरी नहीं कर सका। कृष्ण ने पुलिस को बताया कि 28 अप्रैल 2016 को उसके पास फोन आया कि उसकी बेटी ने ने फांसी लगाकर जान दे दी है। वे तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचित किया। साथ ही बयान दर्ज कराए कि उसकी बेटी की दहेज के लिए हत्या कर शव फंदे पर लटकाया गया है।

पुलिस ने मृतका के पिता की शिकायत पर उसके पति अनिल, ससुर जयकिशन, सास शीला, जेठ सुनील, जेठानी व तायसरे राजकुमार के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 304बी, 498ए व 34 के तहत मामला दर्ज किया था। हालांकि की चार्जशीट दाखिल करने समय पुलिस ने मामले को हत्या की जगह दहेज के लिए हत्या माना।

इसके चलते आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304बी, 498ए व 34 के तहत केस चला। मंगलवार को एडीजे सोनिका गोयल की अदालत ने पति, सास व ससुर को दहेज उत्पीड़न व दहेज के लिए आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने का दोषी करार दिया, जबकि अन्य को बरी कर दिया था।

बेटी को साथ रखने की अनुमति मांगी

वीरवार को पुलिस ने दोषी करार अनिल, जयकिशन व शीला को अदालत में पेश किया। सजा पर दोनों पक्षों में अपना-अपना तर्क रखा। सजा के दौरान दोषियों ने अदालत को बताया कि उनके जेल जाने से घर पर कोई नहीं रह गया। ऐसे में साढ़े तीन साल की बच्ची की देखभाल करने वाला कोई नहीं रह गया है। ऐसे में उसे जेल में साथ रखने की अनुमति दी जाए।

अदालत ने इसकी अनुमति दे दी। साथ में साफ किया कि परिजन चाहें तो बच्ची को कभी भी जेल से बाहर सुरक्षित स्थान पर भेज सकते हैं।

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