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पानीपत

लूटने के लिए गाड़ी रुकवाई, अंदर बैठी थी पुलिस, पकड़ा गया बड़ा गिरोह

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Spread the love वो लूटने आए थे गाड़ी, खुद ही पकड़े गए। पुलिस ने जब इन्‍हें पकड़ा तो थानेदार भी सन्‍न रह गए। दरअसल, बहुत बड़ा चोर गिरोह उनके हाथ आ चुका था। दोनों बदमाशों पर चोरी के कुल 51 मामले दर्ज हैं। पानीपत, कैथल और जींद जिले में ये वारदात को अंजाम देते थे। […]

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वो लूटने आए थे गाड़ी, खुद ही पकड़े गए। पुलिस ने जब इन्‍हें पकड़ा तो थानेदार भी सन्‍न रह गए। दरअसल, बहुत बड़ा चोर गिरोह उनके हाथ आ चुका था। दोनों बदमाशों पर चोरी के कुल 51 मामले दर्ज हैं। पानीपत, कैथल और जींद जिले में ये वारदात को अंजाम देते थे। इन्‍होंने जेल में ही गैंग बनाया था। जमानत पर छूटे तो वारदात शुरू कर दीं।

पुलिस को निंबरी से ऊझा रोड पर दो संदिग्धों के बारे में सूचना मिली थी। तीन पुलिसकर्मियों को सरकारी गाड़ी से मौके पर भेजा। यहां रेडक्रॉस भवन के पास दोनों बदमाशों ने टॉर्च जलाकर रुकने का इशारा किया। गाड़ी रुकते ही एक ने चालक सिपाही अनिल की कनपटी पर पिस्तौल अड़ा दी और लूटने का प्रयास किया। इस दौरान, एएसआइ कृष्ण ने वाहन की लाइट अंदर से जला दी। रोशनी होते ही वर्दी देख बदमाशों के होश उड़ गए और भागने लगे। दोनों को दौड़ाकर पकड़ लिया गया।

लूट के बाद चोरी के वाहन से था भागने का प्लान

एक बदमाश की पहचान कैथल के गांव खेड़ीशेरू के अनिल के रूप में हुई। इसके पास से तमंचा व कारतूस मिला है। दूसरा बदमाश मांडी का रहने वाला सतीश है। दोनों की निशानदेही पर रेडक्रॉस भवन के पास से पिकअप बरामद की गई। इसे उन्होंने 27 दिसंबर को कैथल के धुंधरेहड़ी गांव से चुराया था। वारदात के बाद एक बदमाश को इसी वाहन से फरार होना था।

बाइक चोरी मामले में तीन दिन के रिमांड पर

पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया। उन्हें तीन दिन के रिमांड पर भेज दिया गया है। एसआइ छबील सिंह ने बताया कि रिमांड के दौरान आरोपित की निशानदेही पर चोरी की बाइक बरामद की जाएगी। ये बाइक उन्होंने 5 जून 2017 को आइबी कॉलेज के पास रहने वाले व्यवसायी शिशिर गर्ग के घर से चोरी की थी। गर्ग ने इसकी शिकायत थाना शहर में दर्ज कराई थी।

जेल में हुई दोस्ती, चोरी के रुपयों से करते थे मौजमस्ती 

आरोपित सतीश और अनिल शादीशुदा हैं। दोनों की करनाल जेल में दोस्ती हुई थी। करीब दो साल पहले दोनों जेल से छूटे थे। इसके बाद से उन्होंने बाइक, ट्यूबवेल की मोटर, पंखे और अन्य सामान की चोरी की। चोरी के सामान को बेचकर वे मौज-मस्ती करते थे। रुपये खत्म होते ही फिर से चोरी करने लग जाते थे।

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