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व्यापारी बोले काम करने दो, पूरा समर्थन देने को तैयार बस उद्योग बंद ना क़रो

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वातावरण में प्रदूषण के खतरनाक स्थिति पर पहुंचने के बाद से बंद पड़े उद्योगों को 10 दिन में 350 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। हर रोज 35 करोड़ का नुकसान हो रहा है। यदि और अधिक दिनों तक टेक्सटाइल उद्योग बंद रहते हैं तो निर्यातकों को बायर्स (विदेशी खरीदार) टूटने का खतरा है। निर्यातकों का कहना है कि उद्योग बंद करने का सबसे अधिक नुकसान निर्यातकों को उठाना पड़ रहा है। निर्यात टाइम बाउंड होने के कारण वह समय पर डिलीवरी नहीं हो रही। ऐसे में विदेशी व्यापारी अन्य देशों की तरफ जा सकते हैं। इन दिनों पीक पर सीजन होता है। उद्योग बंद होने से घरेलू मार्केट विशेषकर कंबल उद्योग पर असर पड़ रहा है।

उद्योगपतियों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी (आरओ) संदीप सिंह से मिला। उद्यमियों ने उद्योगों के बंद से होने वाले नुकसान से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि उद्योग बंद रहने से प्रदूषण स्तर पर कोई प्रभाव नहीं है। इसके लिए कंडम वाहन पर प्रतिबंध होने चाहिए।

चीन की तर्ज पर एयर प्यूरीफायर लगाएंगे

उद्यमियों ने कहा कि वे पानीपत में चीन की तर्ज पर एयर प्यूरीफायर लगाने के लिए तैयार है। इसके लिए सहयोग दिया जाए। आरओ से मिलने वालों में सरदार प्रीतम सिंह, राजीव अग्रवाल, राजू चुघ, भीम राणा, नवीन बंसल शामिल रहे। क्षेत्रीय अधिकारी संदीप सिंह ने कहा कि अभी 8 नवंबर तक के बंद करने के निर्देश हैं।

प्रदूषण में हल्का सुधार 359 से 321 पर एक्यूआइ स्तर

बृहस्पतिवार को प्रदूषण स्तर में हल्का सुधार रहा। शाम होते-होते प्रदूषण का स्तर एक्यूआइ 321 पर पहुंच गया। एक दिन पहले प्रदूषण का स्तर 359 था। पूरे प्रदेश में पानीपत, पलवल, सोनीपत, फरीदाबाद, मानेसर का प्रदूषण स्तर 300 से अधिक रहा।

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रात को भी हुआ उद्योगों का सर्वे 

बीती रात को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमों ने सेक्टर 2 5- सेक्टर 29 पार्ट-1-2, ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया, बबैल रोड, जीटी रोड पर पैन फूड्स तक सर्वे किया। इसमें तीन उद्योग चलते मिले, जांच अधिकारी एसडीओ विनीत ने बताया कि जांच में पाया गया कि इनमें हस्क जलाया जा रहा था। जो वैध ईंधन में गिना जाता है। कुछ उद्योगों ने बोर्ड की टीम के आने के आशंका को देखते हुए अपने उद्योग बंद कर लिए हैं।

पानी के 401 में से 224 सैंपल फेल

एनजीटी के निर्देश पर ज्वाइंट कमेटी ने प्रदेश के विभिन्न जिलों से 401 पानी के सैंपल लिए थे। बीआइएस स्टैंडर्ड के मानक के अनुरूप 224 सैंपल फेल निकले। पानीपत में केंद्रीय भूजल अथॉरिटी ने 54 उद्योगों की जांच की थी। इनमें से 34 के पास एनओसी नहीं मिली। 20 उद्योगों ने एनओसी के लिए आवेदन जमा करवा रखा है। एनजीटी ने इस मामले में सुनवाई करते हुए 11 फरवरी तक भूजल दोहन करने वालों की अंतरिम हर्जाना वसूलने के निर्देश दिए हैं। जहां का पानी पीने लायक नहीं है वहां बोर्ड लगाया जाएगा। 11 फरवरी तक इसकी रिपोर्ट एनजीटी में देनी होगी। साथ ही वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी गई है।