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पानीपत

सरकार और NHAI को देना होगा जल्द जवाब, क्या है प्लान… कैसे होगा शहर मुक्त

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रदेश सरकार व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से जीटी रोड किनारे अतिक्रमण की सूची और उसे हटाने के लिए एक्शन प्लान की रिपोर्ट मांगी है। जीटी रोड पर शहर में दोनों ओर 300 से अधिक अतिक्रमण हैं। पर्यावरण को लेकर काम कर रही एक सोसायटी की याचिका पर एनजीटी ने यह आदेश दिया है। एनजीटी के अादेश पर सरकार और एनएचएआई क्या रिपोर्ट देती है। क्योंकि अतिक्रमण प्रशासन को हटाना है। 2015 में एनएचएआई ने इस संबंध में प्रशासन को अतिक्रमण हटाने को भी कहा था, लेकिन प्रशासन ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की।

हाईवे किनारे पालीवाल हाउस, होटल रिजेंसी, मानसरोवर शोरूम वाले बड़े लोगों का भी कब्जा

एनजीटी ने एनएचएआई और सरकार से पूछा है कि हाईवे किनारे कंस्ट्रक्शन को लेकर क्या स्थिति है, यह भी स्पष्ट किया जाए। नियमों के तहत हाईवे किनारे जमीन छोड़कर कंस्ट्रक्शन का नियम है, लेकिन यहां तो हाईवे की जमीन पर ही कब्जा है। हाईवे किनारे कितने एरिए में ग्रीनरी डिवेलप की है। यह भी बताना होगा। केस की अगली सुनवाई 19 अगस्त को है। एनएचएआई ने अक्टूबर 2018 में जीटी रोड पर गांधी मंडी से होटल ग्रैंड तक दिल्ली-अंबाला लेन पर कब्जा करने वाले 153 की सूची जारी की। जिसमें होटल रिजेंसी, पालीवाल हाउस, हाईवे होटल, एनके टावर, एयरटेल, वोडाफोन, सैमसंग, ग्रीन होटल, मानसरोवर शोरूम सहित 153 दुकानें शामिल हैं। 

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1600 मीटर तक कब्जा बता चुका है एनएचएआई

लालबत्ती मानसरोवर पर 31.47 मीटर, पालीवाल हाउस पर 16.41 मीटर और अन्य जगहों पर इसी तरह से कब्जे की सूची जारी की थी एनएचएआई ने। यह सूची सिर्फ एक ओर दिल्ली-चंडीगढ़ लेन पर गांधी मंडी से सेक्टर-6 के पास होटल ग्रैंड तक की थी। बस अड्डा साइड की ओर की सूची अभी जारी नहीं हुई है।

हाईवे किनारे कितने एरिया में ग्रीनरी है, ये भी बताना है होगा 

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कितना महत्वपूर्ण है यह आदेश?

एनजीटी ने एक्शन प्लान भी मांगा है कि अतिक्रमण हटाने के लिए एनएचएआई और सरकार की क्या प्लानिंग है। देखना है कि इस बारे में सरकार और एनएचएआई क्या जवाब देता है। अतिक्रमण हटाने के लिए क्या प्लान बताता है या नहीं हटाने का बहाना क्या बताता है। दोनों ही स्थिति में एनजीटी का आदेश बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।

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2015 में ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी नियुक्त हुए, अतिक्रमण नहीं हटा : एनएचएआई ने 2015 में जिला प्रशासन को लिखकर दिया कि अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई की जाए। तहसीलदार नियुक्त हुए, लेकिन तत्कालीन डीसी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई।

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