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स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 पानीपत को 188वीं रैंक मिला । वही नगर निगम अधिकारी टॉप 50 में आने का दावा करते रहे

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नगर निगम अधिकारी सालभर स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 में टॉप 50 में आने का दावा करते रहे। सफाई से लेकर प्रचार-प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए। अधिकारियों के सब दावे स्वच्छता सर्वेक्षण के रिजल्ट में हवा हो गए। टेक्सटाइल नगरी के नाम से विश्व में पहचान रखने वाले पानीपत का 425 शहरों में 188वां रैंक आया है। जबकि प्रदेश के 18 शहरों में आठवां स्थान आया है। समालखा नगरपालिका नार्थ जोन के 1013 शहरों में से 167वां रैंक आया है। सरेआम चर्चा हैं कि जनप्रतिनिधि अपनी सेङ्क्षटग वाले अधिकारियों को सम्मानित कर कुर्सी पर बैठा देते हैं। अधिकारी काम करने के बजाय नेताओं की चाकरी में लगे रहते हैं।

स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 का बुधवार को परिणाम जारी किया गया। औद्योगिक शहर पानीपत को 5000 नंबर के सर्वे में 2387.59 नंबर आए हैं। सर्वेक्षण में यह रैंक 188वां रहा है। प्रदेश में पानीपत की आठवीं रैंकिंग रही। प्रदेश में 1934.32 अंक रहे हैं। जबकि नेशनल में यह एवरेज 1846 रहा।

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समालखा की भी स्थिति इतनी बेहतर नहीं 

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समालखा नगरपालिका को स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में शामिल किया था। इसका भी बुधवार को परिणाम जारी किया गया है। समालखा का नार्थ जोन में 167वां स्थान रहा है। नार्थ जोन के 1013 नगरपालिकाओं को इसमें शामिल किया था। प्रदेश की 62 नगरपालिकाओं में 17वां स्थान रहा।

स्वच्छता में 1078 नंबर

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स्वच्छता सर्वेक्षण चार कैटेगरी में किया गया था। डायरेक्टर आब्जेक्शन का चरण 1250 नंबर का रहा। पानीपत को इसमें 1078 नंबर मिले। सर्वे टीम ने इसके अंतर्गत शहर में कूड़े की स्थिति जांची थी। यह उस वक्त है जब शहर में सफाई पर हर महीने करीब चार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

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शहरवासियों की फीडबैक भी कम रैंक बनी कारण 

स्वच्छता सर्वेक्षण में सिटीजन फीडबैक भी थी। यह 1250 नंबर का था। इसमें 879.59 नंबर आए हैं। इससे स्पष्ट हो गया है कि शहरवासी भी स्वच्छता सर्वेक्षण के प्रति जागरूक नहीं थे। हालांकि निगम ने जागरूक अभियान चलाया था और सेक्टर-11-12 में तो एक राहगीरी स्वच्छता के नाम पर ही की थी।

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शहरवासियों जनप्रतिनिधि और अधिकारियों को मान रहे दोषी 

लोग शहर के इस हालात की दोषी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को मानते हैं। मॉडल टाउन निवासी मुकेश ने बताया कि वे प्रॉपर्टी टैक्स और दूसरे टैक्स बराबर दे रहे हैं। इससे आगे अधिकारियों को काम करना है। शहर में चारों तरफ कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। इसमें अधिकारी सीधे तौर पर दोषी हैं। उनको काम करने की जरूरत है।

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शहर की इस दशा के अधिकारी दोषी 

नगर निगम के अधिकारी स्वच्छता के लिए गंभीर नहीं है। शहर का 188वां रैंक आने में भी अधिकारी सीधे तौर पर दोषी हैं। वे इस रैंकिंग को बेहतर बता रहे हैं। उनको नंबर वन के लिए कंपटीशन करना चाहिए। वह पहले दिन से ही स्वच्छता के लिए काम कर रही हैं। इस बार पानीपत को नंबर-वन लाने का प्रयास करेंगे। अवनीत कौर, मेयर। 

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कमिश्नर का रटा-रटाया जवाब 
रैंकिंग में सुधार है, आगे और मेहनत करेंगे स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में पिछले साल से बेहतर हैं। इसमें और सुधार करेंगे। इस बार पहले दिन से ही स्वच्छता के क्षेत्र में काम किया जाएगा। टॉप-50 शहरों में पानीपत को लेकर आएंगे।

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