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चंडीगढ़

हड़ताल और मनमानी से पिछड़ रहा है हरियाणा, खट्टर भी लाचार अधिकारियों के आगे

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गरीबों और जरूरतमंदों को सरकार की घोषणाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रदेश में अब तक केवल 33 फीसद ही घोषणाएं पूरी हो पाई हैं। हैरान कर देने वाली बात है कि ये घोषणाएं अधिकारियों की ओर से अब तक पूरी नहीं हुई हैं।

जिले के अधिकारी सरकार से भी बड़े हो गए हैं। हालात यह हैं कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर ही काम नहीं हो पा रहा। चार वर्ष में 33 प्रतिशत योजना ही पूरी हो पाई है। यही नहीं छह ऐसी घोषणाएं हैं, जिन पर काम शुरू तक नहीं किया जा सकता। अधिकारियों के मनमाने ढंग से काम करने पर योजनाओं को मूर्त रूप नहीं मिल पा रहा।

किस वर्ष की कितनी घोषणाएं काम न होने की स्थिति में पहुंचीं

वर्ष  संख्या 
2015  ( 4  )
2016 ( 1  )
2018 ( 1  )

ये योजनाएं सिरे चढ़तीं तो लोगों को मिलता सीधा फायदा 

1: नगर निगम कार्यालय को एग्रो मॉल में शिफ्ट करना अटका 

नगर निगम के दो कार्यालय होने पर लोगों को अपने काम कराने में परेशानी आ रही थी। सीएम ने 2015 में घोषणा कर नगर निगम के दोनों कार्यालयों को जीटी रोड पर गोहाना रोड के सामने स्थित एग्रो मॉल में शिफ्ट करने की घोषणा की थी। सीएम की घोषणा के बाद स्थानीय अधिकारी पीछे हट गए। अधिकारियों की दलील है कि निगम एग्रो मॉल का किराया देने की स्थिति में नहीं है। स्थानीय अधिकारियों ने इसको नॉट फिजिएबल दिखा दिया।

2: सिवाह में 100 बेड का अस्पताल नहीं बन सकता 

सरकार ने आरक्षण आंदोलन के बाद अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 2016 सिवाह गांव में प्रदेश स्तरीय समारोह आयोजित किया था। इसमें शिक्षा मंत्री प्रो. रामविलास शर्मा पहुंचे थे। शिक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री की तरफ से गांव में 100 बेड का अस्पताल बनाने की घोषणा की थी। यह स्वास्थ्य विभाग के नियमों में उलझ गया। अधिकारियों ने इसको नॉट फिजिएबल कैटेगरी में डाल दिया।

3: जीपीएस रामनगर में तीन कमरों की घोषणा की थी 

सीएम ने राजकीय प्राथमिक पाठशाला रामनगर में तीन कमरे बनाने की घोषणा 20 जुलाई 2018 को की थी। शिक्षा विभाग से इसकी रिपोर्ट ली तो अधिकारियों ने बताया कि स्कूल में तीन कमरे बनाने के लिए जगह नहीं है। अधिकारियों ने स्कूल में कमरे बनाने की घोषणा को भी नॉट फिजिएबल बता दिया। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है

Source DJ

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चंडीगढ़

हादसाः नवविवाहित जोड़े की गाड़ी ने सात लोगों को कुचला, दो की मौके पर मौत

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नवविवाहित जोड़े की गाड़ी ने दो लोगों की जान ले ली। गाड़ी ने सात लोगों को कुचल दिया था। हादसा पंजाब के मोगा से करीब 4 किमी की दूरी पर गांव सिंघावाला के पास हुआ। हादसे की वजह धुंध बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, कार सवारों ने दो बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में चार लोग घायल हो गए। इन्हें बचने के लिए लोग आए तो पीछे से आ रही स्विफ्ट कार ने उन्हें कुचल दिया। 20 साल की लड़की और अन्य शख्स की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद स्विफ्ट कार सवार नवविवाहित जोड़ा फरार हो गया।

थाना चड़िक के एएसआई कुलवंत सिंह के अनुसार हादसे के चश्मदीद चरनजीत सिंह निवासी गांव फतेहगढ़ कोरोटाणा ने बताया कि वह अपनी मां हरपाल कौर और मौसी के बेटे थाना सिंह के साथ बाइक पर कस्बा बाघापुराना की ओर जा रहा था। घनी धुंध होने के कारण गांव सिंघावाला से पहले एक कार ने दो बाइक को टक्कर मार दी। वहीं कार के पीछे आ रहे एक कैंटर ने कार को टक्कर मार दी।

मोगा में सड़क हादसा

हादसे के दौरान दोनों बाइक पर सवार दो युवतियों समेत चार लोग मामूली घायल हो गए। बाइक को टक्कर मारने वाला कार चालक कार समेत मौके से फरार हो गया। जब आसपास मौजूद लोग घायलों को उठाने के लिए बीच सड़क पर आए तो इसी दौरान बाघापुराना की ओर से मोगा आ रही एक स्विफ्ट कार ने घायलों समेत सात लोगों को कुचल दिया।

हादसे में हरप्रीत सिंह (33) निवासी गांव चंदपुराना और पूजा शर्मा (20) निवासी गांव सिंघावाला की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं पूजा का भाई अभिषेक (18), सिमरनजीत कौर (20) निवासी सिंघावाला, राम कुमार निवासी बाघापुराना, गुरप्रीत सिंह, थाना सिंह निवासी फतेहगढ़ कोरोटाणा गंभीर रूप से घायल हो गए।

जांच अधिकारी का कहना है कि फिलहाल चश्मदीद चरनजीत सिंह के बयान पर अज्ञात कार चालक के खिलाफ केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वहीं अभिषेक उसकी बहन पूजा शर्मा और पड़ोस में रहने वाली सिमरनजीत कौर मोगा में एक हेल्थ क्लब में नौकरी करते थे।

हालत गंभीर होने पर सिमरनजीत कौर को फरीदकोट और अभिषेक को लुधियाना रेफर कर दिया गया। इन चारों के अलावा इनकी मदद के लिए बीच सड़क आए राहगीर थाना सिंह, राम कुमार और घटनास्थल के निकट टायरों का काम करने वाले गुरप्रीत सिंह को मोगा के निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया है।

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चंडीगढ़

बाबा के लिए जेल में तड़प रही हनीप्रीत के लिए खुशखबरी-काफी सोचने के बाद कोर्ट ने दे ही दी मंजूरी

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हनीप्रीत को बात करने की अनुमति तो मिल गई है लेकिन इन दोनों नंबर पर कॉल के दौरान जेल विभाग की नजर रहेगी। हनीप्रीत की तरफ से कोर्ट में भी आश्वासन दिया गया कि फोन पर किसी तरह की कोई गैरकानूनी बात नहीं होगी।

हनीप्रीत ने जेल में फोन की सुविधा न देने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि जब अन्य कैदियों को बात करने इजाजत है तो उसको क्यों नही। इस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि जेल नियमों के अनुसार कैदी दो नंबर पर बातचीत कर सकते हैं। ऐसे में हनीप्रीत को भी बात करने की इजाजत मिलनी चाहिए। हनीप्रीत ने हाईकोर्ट में वे दो नंबर भी दे दिए थे जिन पर बात करना चाहती है।

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने नियमों के अनुसार हनीप्रीत को जेल से फोन पर बात करने की इजाजत दे दी। हाईकोर्ट ने कहा कि जेल मैनुअल में जब प्रावधान है तो किसी कैदी को उसके माता-पिता से बात करने से नहीं रोका जाना चाहिए।

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चंडीगढ़

सरकार अगर रोडवेज़ में पारदर्शी तरीक़े से खोलें नौकरी का पिटारा तो युवाओं के लिए बढ़ेंगे अवसर

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हरियाणा रोडवेज कर्मियों ने अब विभाग में खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरने की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। कर्मचारियों का कहना है कि इसी वजह से बरसों से उनकी प्रमोशन भी लटकी पड़ी है।उन्होंने बेड़े में शामिल होने वाली नई 367 बसों की खरीद पर फिलहाल रोक लगाए जाने के फैसले का भी विरोध किया है। ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि यदि सरकार रिक्त पदों को नहीं भरती और नई सरकारी बसें नहीं खरीदती तो उन्हें मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा।

ऑल हरियाणा रोङवेज वर्कर्स यूनियन के राज्य प्रधान हरिनारायण शर्मा व महासचिव बलवान सिंह दोदवा ने संयुक्त ब्यान जारी करते हुए बताया कि हरियाणा रोङवेज में सभी श्रेणी के पद खाली पड़े हैं, लेकिन परिवहन अधिकारियों की लापरवाही के चलते  लंबे अरसे से किसी भी पद पर प्रमोशन नहीं हो रही।

शर्मा व दोदवा ने बताया कि अभी तक परिवहन विभाग में स्टेशन सुपरवाइजर के 58, मुख्य निरीक्षक के 52, निरीक्षक के 450, उप निरीक्षक के 160, अधीक्षक के 22 व वर्कशॉप में एसएसआई के सभी पद खाली पड़े हुए हैं।

उन्होंने बताया कि कर्मचारियों का 4 साल का बोनस व अन्य बहुत सी विभागीय मांगें भी एक लंबे अरसे से बकाया पड़ी हैं।

उन्होंने बताया कि परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार काफी समय से रोडवेज के बेड़े में 367 नई बसें लाने का दावा कर रहे थे। लेकिन अब अचानक इन बसों की खरीद पर रोक लगाने का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है।

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