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हरियाणा को कलंक दे रहें है कुछ युवा, दूध दही खाने वाला राज्य अब ज़हरीली चपेट में

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कभी कहा जाता था- देसां में देस हरियाणा, जित दूध-दही का खाणा। लेकिन, हरियाणा की यह प्रसिद्धि युवाओं के गलत राह पकड़ने से कलंकित हो रही है। दूध-दही व अन्य सेहतमंद खानपान के लिए प्रसिद्ध इस राज्‍य के युवा अब ओपियाड (हे रोइन, अ फीम, स्मैक व चि ट्टा) के आदी होते जा रहे हैं। 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्‍य में हे रोइन के न शेडिय़ों की संख्या 10 गुना से भी अधिक बढ़ गई है। यह आंकड़ा तो राज्य औषधि निर्भरता उपचार केंद्र (एसडीडीटीसी) और रोहतक पीजीआइ के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान का है। यहां इस न शे के रोगी उपचार के लिए पहुंचे हैं।

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दूध-दही नहीं, हे रोइन-चि ट्टा के आदी हो रहे हैं हरियाणा के युवा, 10 साल में 10 गुना बढ़े हे रोइन के न शेड़ी

रोहतक पीजीआइ के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में भर्ती मरीज से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि हे रोइन की लत अगर एक बार लग गई तो फिर उसके बिना इंसान रह नहीं सकता है। यह काफी महंगा नशा है, इसलिए वह इसे अकेले में नहीं बल्कि ग्रुप में लेते हैं, ताकि खर्चा शेयर किया जा सके। जिस क्षेत्र में आमदनी के साधन ज्यादा है, वहां के युवा इसकी गर्त में फंस रहे हैं।

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रोहतक जिले की बात करें तो बलियाना, बोहर, खेड़ी साध, नौनंद सहित अन्य गांव हैं, जहां के युवा इस न शे का सेवन करते हैं। इसके पीछे कारण यह कि यहां की जमीनों का अधिग्रहण हुआ था, जिसके कारण लोगों के पास एकदम से काफी रुपया आ गया। ऐसे में यहां के युवा न शे की गर्त में धंसते चले गए। पहले एनसीआर, जिसमें फरीदाबाद व गुरुग्राम में हे रोइन का नशा युवा करते थे।

 

रोहतक में 2500 रुपये प्रति ग्राम में बिकती है हे रोइन

नशा छोड़ने के लिए इलाज कराने आए एक युवक ने बताया कि हे रोइन की कीमत रोहतक में 2500 रुपये प्रति ग्राम है। दिल्ली में यह रेट 1000 रुपये है। दिल्ली में नाइजीरियंस से हे रोइन खरीदी जाती है। रोहतक में 500 रुपये में क्वार्टर मिलता है, जो एक ग्राम का चौथा हिस्सा है। न शे के सौदागर अब शिक्षण संस्थानों को टारगेट करके विद्यार्थियों को अपना ग्राहक बनाने में जुट गए हैं। पिछले दिनों कई नाइजीनियरंस को पुलिस ने काबू किया था, जो महर्षि दयानंद विश्विविद्यालय में नशा बेच रहे थे।

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