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चंडीगढ़

हरियाणा में अब भी इस्तेमाल हो सकेंगे पुराने स्टांप पेपर, जनवरी 2014 से पहले खरीदे

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हरियाणा में जनवरी 2014 से पहले खरीदे गए स्टांप पेपर तहसील कार्यों में मान्य होंगे। इसके लिए हरियाणा सरकार ने खास निर्देश जारी किए हैं। दरअसल, प्रदेश में बहुत से लोग ऐसे है, जिनके पास ये भौतिक  स्टांप पेपर मौजूद है। लेकिन ई-स्टांप के चलते तहसीलों में ये स्टांप पेपर इस्तेमाल नहीं किए जा रहे थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। हरियाणा सरकार ने निर्णय लिया है कि नागरिक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को अपनाकर समय-समय पर राजस्व विभाग द्वारा जारी दिशा निर्देशों, नियमों और विनियमों के अनुसार जनवरी 2014 से पहले खरीदे गए पुराने स्टांप पेपर या प्रमाण पत्र का उपयोग कर सकते हैं।

एसओपी के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के पास एसबीआई की अधिकृत शाखा द्वारा जारी वैध, खाली या निष्पादित पुराने भौतिक स्टांप पेपर या प्रमाण पत्र हैं और यदि वे इन पुराने स्टांप पेपरों का उपयोग करके अपनी डीड का पंजीकरण करना चाहते है तो वे इस उद्देश्य के लिए तहसीलदार या नायब तहसीलदार के माध्यम से संबंधित ट्रेजरी में आवेदन कर सकते हैं।

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चंडीगढ़

हादसाः नवविवाहित जोड़े की गाड़ी ने सात लोगों को कुचला, दो की मौके पर मौत

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नवविवाहित जोड़े की गाड़ी ने दो लोगों की जान ले ली। गाड़ी ने सात लोगों को कुचल दिया था। हादसा पंजाब के मोगा से करीब 4 किमी की दूरी पर गांव सिंघावाला के पास हुआ। हादसे की वजह धुंध बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, कार सवारों ने दो बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में चार लोग घायल हो गए। इन्हें बचने के लिए लोग आए तो पीछे से आ रही स्विफ्ट कार ने उन्हें कुचल दिया। 20 साल की लड़की और अन्य शख्स की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद स्विफ्ट कार सवार नवविवाहित जोड़ा फरार हो गया।

थाना चड़िक के एएसआई कुलवंत सिंह के अनुसार हादसे के चश्मदीद चरनजीत सिंह निवासी गांव फतेहगढ़ कोरोटाणा ने बताया कि वह अपनी मां हरपाल कौर और मौसी के बेटे थाना सिंह के साथ बाइक पर कस्बा बाघापुराना की ओर जा रहा था। घनी धुंध होने के कारण गांव सिंघावाला से पहले एक कार ने दो बाइक को टक्कर मार दी। वहीं कार के पीछे आ रहे एक कैंटर ने कार को टक्कर मार दी।

मोगा में सड़क हादसा

हादसे के दौरान दोनों बाइक पर सवार दो युवतियों समेत चार लोग मामूली घायल हो गए। बाइक को टक्कर मारने वाला कार चालक कार समेत मौके से फरार हो गया। जब आसपास मौजूद लोग घायलों को उठाने के लिए बीच सड़क पर आए तो इसी दौरान बाघापुराना की ओर से मोगा आ रही एक स्विफ्ट कार ने घायलों समेत सात लोगों को कुचल दिया।

हादसे में हरप्रीत सिंह (33) निवासी गांव चंदपुराना और पूजा शर्मा (20) निवासी गांव सिंघावाला की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं पूजा का भाई अभिषेक (18), सिमरनजीत कौर (20) निवासी सिंघावाला, राम कुमार निवासी बाघापुराना, गुरप्रीत सिंह, थाना सिंह निवासी फतेहगढ़ कोरोटाणा गंभीर रूप से घायल हो गए।

जांच अधिकारी का कहना है कि फिलहाल चश्मदीद चरनजीत सिंह के बयान पर अज्ञात कार चालक के खिलाफ केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वहीं अभिषेक उसकी बहन पूजा शर्मा और पड़ोस में रहने वाली सिमरनजीत कौर मोगा में एक हेल्थ क्लब में नौकरी करते थे।

हालत गंभीर होने पर सिमरनजीत कौर को फरीदकोट और अभिषेक को लुधियाना रेफर कर दिया गया। इन चारों के अलावा इनकी मदद के लिए बीच सड़क आए राहगीर थाना सिंह, राम कुमार और घटनास्थल के निकट टायरों का काम करने वाले गुरप्रीत सिंह को मोगा के निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया है।

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चंडीगढ़

बाबा के लिए जेल में तड़प रही हनीप्रीत के लिए खुशखबरी-काफी सोचने के बाद कोर्ट ने दे ही दी मंजूरी

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हनीप्रीत को बात करने की अनुमति तो मिल गई है लेकिन इन दोनों नंबर पर कॉल के दौरान जेल विभाग की नजर रहेगी। हनीप्रीत की तरफ से कोर्ट में भी आश्वासन दिया गया कि फोन पर किसी तरह की कोई गैरकानूनी बात नहीं होगी।

हनीप्रीत ने जेल में फोन की सुविधा न देने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि जब अन्य कैदियों को बात करने इजाजत है तो उसको क्यों नही। इस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि जेल नियमों के अनुसार कैदी दो नंबर पर बातचीत कर सकते हैं। ऐसे में हनीप्रीत को भी बात करने की इजाजत मिलनी चाहिए। हनीप्रीत ने हाईकोर्ट में वे दो नंबर भी दे दिए थे जिन पर बात करना चाहती है।

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने नियमों के अनुसार हनीप्रीत को जेल से फोन पर बात करने की इजाजत दे दी। हाईकोर्ट ने कहा कि जेल मैनुअल में जब प्रावधान है तो किसी कैदी को उसके माता-पिता से बात करने से नहीं रोका जाना चाहिए।

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चंडीगढ़

सरकार अगर रोडवेज़ में पारदर्शी तरीक़े से खोलें नौकरी का पिटारा तो युवाओं के लिए बढ़ेंगे अवसर

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हरियाणा रोडवेज कर्मियों ने अब विभाग में खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरने की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। कर्मचारियों का कहना है कि इसी वजह से बरसों से उनकी प्रमोशन भी लटकी पड़ी है।उन्होंने बेड़े में शामिल होने वाली नई 367 बसों की खरीद पर फिलहाल रोक लगाए जाने के फैसले का भी विरोध किया है। ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि यदि सरकार रिक्त पदों को नहीं भरती और नई सरकारी बसें नहीं खरीदती तो उन्हें मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा।

ऑल हरियाणा रोङवेज वर्कर्स यूनियन के राज्य प्रधान हरिनारायण शर्मा व महासचिव बलवान सिंह दोदवा ने संयुक्त ब्यान जारी करते हुए बताया कि हरियाणा रोङवेज में सभी श्रेणी के पद खाली पड़े हैं, लेकिन परिवहन अधिकारियों की लापरवाही के चलते  लंबे अरसे से किसी भी पद पर प्रमोशन नहीं हो रही।

शर्मा व दोदवा ने बताया कि अभी तक परिवहन विभाग में स्टेशन सुपरवाइजर के 58, मुख्य निरीक्षक के 52, निरीक्षक के 450, उप निरीक्षक के 160, अधीक्षक के 22 व वर्कशॉप में एसएसआई के सभी पद खाली पड़े हुए हैं।

उन्होंने बताया कि कर्मचारियों का 4 साल का बोनस व अन्य बहुत सी विभागीय मांगें भी एक लंबे अरसे से बकाया पड़ी हैं।

उन्होंने बताया कि परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार काफी समय से रोडवेज के बेड़े में 367 नई बसें लाने का दावा कर रहे थे। लेकिन अब अचानक इन बसों की खरीद पर रोक लगाने का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है।

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