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पानीपत

बैंक की तर्ज पर आरडी और एफडी बना 700 लाेगाें से एक कराेड़ ठगे, 3 साल में रकम दोगुना करने का दिया लालच

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बैंक की तर्ज पर आरडी और एफडी बना 700 लाेगाें से एक कराेड़ ठगे, 3 साल में रकम दोगुना करने का दिया लालच

जन चेतना मार्केटिंग नेटवर्क प्रा.लि. कंपनी ने बैंकाें की तर्ज पर आरडी और एफडी कराने पर मोटा मुनाफा का लालच देकर 700 लोगों के करीब एक करोड़ रुपए ठग लिए। एफडी कराने पर 3 साल में दोगुनी रकम और आरडी में बैंक से दोगुने ब्याज का लालच दिया। इसके साथ आकर्षित इनाम के सपने दिखाकर कंपनी ने लोगों की गाढ़ी कमाई डकार ली। सिवाह गांव की दो महिला एजेंटों पूनम रानी कादियान और शारदा ने इन लाेगों को कंपनी से जोड़ा था।

सितंबर 2019 में कंपनी असंध रोड पर लालबत्ती के पास अपना ऑफिस बंद कर भाग गई। पूनम ने कंपनी के डायरेक्टर सोनीपत के खेड़ीतगा निवासी सुशील त्यागी, उसकी पत्नी सिमरन, मैनेजर मोहित बजाज, पानीपत की सविता शर्मा और हरसाना गांव की नीलम के खिलाफ सेक्टर 29 थाना में जालसाजी का केस दर्ज कराया है। अभी शारदा ने शिकायत नहीं दी।

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पूनम ने कहा कि उसके जरिए कंपनी से जुड़े करीब 250 लोगों के आरोपियों ने 51.30 लाख रुपए ठग लिए। इसमें पुलिसकर्मी, गरीब महिलाएं पीड़ित हैं। कंपनी का हेेड ऑफिस सोनीपत की सिक्का कॉलोनी में था। उसकी एक ब्रांच यहां खोली गई थी। इससे 65 एजेंट जुड़े थे। एक एजेंट ने 200 से 1200 लोगों के रुपए कंपनी में लगा रखे थे। कंपनी पर 2017 से दो से 3 केस दर्ज हो चुके हैं।

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ये 4 बड़ी स्कीम थीं लोगों को ठगने के लिए-

  • ड्राॅ राशि: 200-200 सदस्यों के कई ग्रुप बनाए। लोगों को 21 महीने तक हर माह 500 रुपए जमा करने थे। हर माह 3 लोगों का लकी ड्राॅ निकलना था। पहले माह में लकी विजेता को 5 हजार, दूसरे में 6 हजार रुपए करके 18वें माह में 22 हजार रुपए मिलने थे। 19वें में 25, 20वें में 31 हजार और 21वें में 5 विजेताओं को 40 इंच की एलईडी या 21-21 हजार रुपए देने का वादा किया। जिन लोगों के लकी ड्राॅ नहीं निकला, उन्हें 10500 के बदले 11 हजार रुपए देने थे।
  • बैंक से डबल मुनाफा: 21 माह तक 1000-1000 और 5000-5000 रुपए जमा करने थे। किस्त पूरी होने पर एक हजार वाले 21 हजार के बदले 25 हजार और 5 हजार वाले को 1.05 लाख के बदले 1.25 लाख रुपए देने का वादा था।
  • 3 साल में दोगुनी रकम: कंपनी ने लोगों की एफडी भी की। पूनम ने कहा कि उसने 20 हजार और 50 हजार की दो एफडी कराई। जो 3 साल में पूरी होनी थी। कंपनी ने दावा किया कि एफडी पूरी होने पर 20 से 40 हजार और 50 के एक लाख रुपए मिलेंगे। पर कुछ नहीं मिला।
  • राशन सामग्री स्कीम: कंपनी ने अपने प्रोडक्ट की सेल बढ़ाने के लिए स्कीम बताई। इसमें 25 महीने तक हर माह 500 रुपए जमा करने थे। 26वें महीने में 40 इंच की एलईडी या 15 लीटर का आरओ या 20 हजार रुपए की कीमत का कंपनी का उत्पाद देना था। ये नहीं लेने पर 16500 रुपए कैश भी ले सकते थे। किस्त में देरी होने पर 10 रुपए प्रतिदिन जुर्माना था।

स्कीम बदल ऐंठे ज्यादा पैसे

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21 माह तक 500 रुपए जमा कराए। रुपए नहीं मिले। कंपनी ने कहा कि दूसरी स्कीम में बदल लो। फिर 21 की जगह 25 माह किस्त भरी। 16500 रुपए मिलने थे। कंपनी हर माह 550 रुपए का राशन देने लगी। कहा कि ये कुल राशि से कटेगा। सिर्फ 6 माह राशन दिया। -पीड़ित शर्मीला

बेटे की शॉप अब कैसे खुलेगी

इकलौता बेटा बेरोजगार था, सोचा कि रुपए एक साथ मिलेंगे तो उसे छोटी-मोटी दुकान खुलवा दूंगी। किराए के कमरे के रुपए देकर किस्त चुकाई। 21 माह के बाद 25 माह तक रुपए जमा कराए। 6 माह तक राशन दिया। फिर कंपनी भाग गई। अब कैसे बेटे की दुकान खुलेगी।-पीड़ित सुनीता देवी

दूध बेचकर भरी थी किस्तें

विधवा पोती स्कूल में चपरासी थी। उसकी दो बेटी थी। इसलिए वह किस्त भरने लगी। बेटा नशा करता था, इसलिए बहू ने दूध बेचकर किस्त भरी। दोनों ने 25-25 माह तक किस्त भरी और कंपनी रुपए लेकर भाग गई। -पीड़ित अंगूरी

10 लाख का चेक दिया, बाउंस हो गया

पूनम ने बताया कि मई 2017 में आरोपी सविता शर्मा और नीलम कंपनी के लिए काम करती थी। स्कीमों के लालच में आकर उसने 250 महिलाओं को कंपनी से जोड़ दिया। कस्टमर को वे मीटिंग के लिए ऑफिस भी ले जाती थी। सुशील, सिमरन व मोहित स्कीम बताते थे। आरोपी सुशील रुपए लौटाने का भरोसा देता रहा। 10 लाख रुपए का चेकर दिया था जो बाउंस हो गया। अब शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी देना लगा।

4 साल तक मार्केटिंग का काम, बाद में बैंक के नाम पर वसूली

कंपनी ने 2010 में अपना पंजीकरण कराया था। इसके मुताबिक उत्पाद की सेल बढ़ाने के लिए मार्केटिंग करनी थी। लेकिन वह बैंक की आरडी व एफडी की तर्ज पर लोगों से रुपए वसूलने लगी। पहले सोनीपत ऑफिस खोला। फिर पानीपत में असंध रोड पर ऑफिस खोला। यहां बंद करके आरोपियों ने लाल बत्ती के पास ऑफिस खोला। करीब 4 साल तक आरोपी लोगों को ठगते रहे, लेकिन जिम्मेदार अफसरों को पता तक नहीं चला। पहला केस हवलदार की पत्नी सुमन ने सिटी थाना में 2017 में दर्ज कराया। उसमें भी मुख्य आरोपी आज तक फरार है।

आंखें मूंद कर पैसे लगाने से बचें, बैंक का लाइसेंस जरूर चेक करें

सरकारी हो या निजी बैंक, कभी किसी ग्राहक को एलईडी नहीं देता। नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी इस तरह के लालच देकर लोगों को ठगती हैं। लोगों को रुपए इन्वेस्ट करने से पहले लाइसेंस की जांच करनी चाहिए। इससे पता चल जाएगा कि कंपनी किस काम के लिए रजिस्टर्ड हैं। हर बैंक को आरबीआई लाइसेंस देता है। जांच के बाद ही लोग रुपए इन्वेस्ट करें।-कमल गिरधर, लीड बैंक मैनेजर, पानीपत

 

 

Source : Bhaskar

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