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पानीपत में शो-पिस बनी 15 एंबुलेंस, जन सेवा में नहीं हो रही इस्तेमाल

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पानीपत में शो-पिस बनी 15 एंबुलेंस, जन सेवा में नहीं हो रही इस्तेमाल

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की गाइडलाइन के मुताबिक 60 हजार की जनसंख्या पर एक एंबुलेंस होनी चाहिए। जिले की आबादी लगभग 14 लाख और स्वास्थ्य विभाग के पास 28 एंबुलेंस (चार नई मिली) हैं। यानि, 50 हजार जनसंख्या पर एक है। चालक और इमरजेंसी मेडिकल टैक्निशियन (ईएमटी) के अभाव में आधी से ज्यादा शो-पीस बनी खड़ी रहती हैं।

दरअसल, आउटसोर्सिंग पर चालकों और ईएमटी की भर्ती होनी थी। प्रदेश सरकार ने आउटसोर्सिंग नीति पार्ट-वन और टू के तहत ठेकेदारी प्रथा को खत्म करने के उद्देश्य से भर्ती पर रोक लगा दी है। इस बाबत प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, बोर्ड-निगमों के मुख्य प्रशासकों, प्रबंध निदेशकों, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार, सभी जिलों डीसी, एसडीएम को पत्र भी भेजा जा चुका है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग पानीपत ने आउटसोर्सिंग पर भर्ती होने वालों से आवेदन भी ले लिए थे। सरकार के आदेश के बाद हाथ वापस खींच लिए। जिला में संख्या की बात करें तो मात्र 31 चालक हैं, जबकि कम से कम 56 होने चाहिए। ईएमटी 25 हैं, इनकी संख्या भी चालकों के समान होनी चाहिए। नतीजा, सिविल अस्पताल परिसर में लगभग 15 एंबुलेंस शो-पीस बनी खड़ी रहती हैं।

चालकों और ईएमटी के अभाव में शो-पीस बनीं 15 एंबुलेंस

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फ्लीट मैनेजर ऋषिपाल ने बताया कि चालकों-ईएमटी से 12-12 घंटे की ड्यूटी ले रहे हैं। 12 घंटे ड्यूटी करने वाले को 24 घंटे का आराम दिया जाता है। मैन पावर पूरी मिले, तभी सभी एंबुलेंस का शेड्यूल बनाया जा सकता है। एडवांस लाइफ सपोर्ट एक भी नहीं

विभाग के पास 15 पीटीएस (पेशेंट ट्रांसफर सपोर्ट), 13 बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस हैं। एडवांस लाइफ सपोर्ट(एएलएस) एक भी नहीं है। न्यू बोर्न एक्शन प्लान के तहत गंभीर बीमार बच्चों के लिए एक भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है। कोरोना की तीसरी लहर आई तो यह संकट सिरदर्द बन सकता है। एएलएस एंबुलेंस

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एएलएस को मिनी आइसीयू(गहन चिकित्सा यूनिट)कह सकते हैं। वेंटिलेटर, आक्सीजन सिलेंडर, कार्डियक मानिटर, पल्स आक्सीमीटर, फिटल डाप्लर, आटो लोडिग स्ट्रेक्चर, सक्शन पंप, सिरिज पंप, व्हील चेयर सहित तमाम आधुनिक चिकित्सा उपकरण, जीवन रक्षक दवा होती हैं।

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