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पानीपत

आंदोलन के 18 दिन, पानीपत में उद्योगों को 400 करोड़ का नुक़सान, सीज़न में मुश्किलें

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आंदोलन के 18 दिन, पानीपत में उद्योगों को 400 करोड़ का नुक़सान, सीज़न में मुश्किलें

पहले लॉकडाउन फिर किसान आंदोलन के कारण टेक्सटाइल नगरी को 400 करोड़ रुपये का झटका लगा है। इन 17 दिनों में न तो किसान बॉयर को माल दे पा रहे हैं और न ही उद्यमियों को कच्चा माल मिल पा रहा है। उद्यमियों को फिलहाल उत्पादन रोकना पड़ गया है। हर दिन उद्यमियों को औसतन 25-30 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। उत्तर प्रदेश-पानीपत रोड खुला है, लेकिन वहां भी माल नहीं भेजा जा रहा। क्योंकि उद्यमियों के पास माल तैयार करने के लिए रॉ मैटेरियल ही नहीं है। पानीपत उद्यमियों की 25 प्रतिशत लेबर भी दिल्ली के बॉर्डर पर फंसी हुई है। करीब 250 करोड़ रुपये कीमत का कच्चा माल दिल्ली बॉर्डर, पंजाब और जयपुर में फंसा हुआ है। हैंडलूम उद्योगपतियों को भय सता रहा है कि अगर आंदोलन और लंबा खिंचा तो विदेशों से मिले 550 करोड़ रुपये के ऑर्डर उनके हाथ से निकल जाएंगे। ऑर्डर कैंसल करने पड़ सकते हैं।
चीन के बहिष्कार के बाद आया था मार्केट में उछाल

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अमेरिका और यूरोपियन देशों ने चीन को अलग थलग किया है। इसलिए इस बार पानीपत का एक्सपोर्ट 3 हजार करोड़ रुपये बढ़कर 15 हजार करोड़ पहुंचने की उम्मीद थी। चीन को मिलने वाले ऑर्डर पानीपत को मिले थे। उद्यमियों ने ऑर्डर भी तैयार कर लिए, लेकिन किसान आंदोलन में दिल्ली के बॉर्डर सील होने के कारण माल की डिलिवरी नहीं हो पा रही है।
पानीपत में पैकेजिंग की 50 यूनिट, एक हजार करोड़ रुपये की इंडस्ट्री हुई ठप
किसान आंदोलन का सबसे बुरा प्रभाव पानीपत के पैकेजिंग उद्योग पर पड़ रहा है। उत्पादों की पैकिंग का काम 90 प्रतिशत तक बंद हो गया है। उद्यमियों को दिल्ली, राजस्थान और गुजरात की ओर से मिलने वाला रॉ मैटेरियल नहीं मिल रहा है। कंपनियों नेे पैकेजिंग के दाम 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं। कंबल, गद्दे, बेडशीट, तकिये, मशीन पैकेजिंग उत्पाद समेत सभी प्रकार के माल का स्टाफ पूरा हो चुका है। मजबूरन उद्यमियों को उत्पादन भी रोकना पड़ रहा है। इसलिए पैकेजिंग उद्यमियों को ऑर्डर भी मिलना बंद हो गया है।
आंदोलन और लंबा हुआ तो हालात बद से बदतर हो जाएगी : अग्रवाल
कंपनियों के पास माल की बहुत कमी हो गई है। अगर आंदोलन लंबा हुआ तो पैकेजिंग उद्योग के हालत बद से बदतर हो जाएंगे। स्थिति लॉकडाउन से भी खराब है, लेबर खाली बैठी है। उन्हें भी वेतन देना पड़े रहा है।
– श्री भगवान अग्रवाल, प्रधान सेक्टर 29 इंडस्ट्रीयल एस्टेट एसोसिएशन
अभी और होगा नुकसान : राणा
अगर अब इसी तरह के ब्रेक लगेंगे तो उद्योगों को बहुत नुकसान झेलना पड़ सकता है। पंजाब में कंटेनर की आवाजाही पर रोक से करोड़ों रुपये का नुकसान वहां के निर्यातकों को हुआ है। 100 प्रतिशत एक्सपोर्ट बंद है।
– भीम राणा, अध्यक्ष, डायर्स एसोसिएशन पानीपत
दिल्ली की मार्केट में सामान नहीं जा रहा है : धमीजा
हैंडलूम नगरी का माल बाहर नहीं जा रहा है। उद्यमियों को माल नहीं मिल रहा है। ऐसे में उद्योग कैसे चलेंगे। दिल्ली की मार्केट तक माल भेजना जरूरी है। दिल्ली के बॉर्डर सील हो चुके हैं, माल कैसे भेजें।
– विनोद धमीजा, उद्योगपति
पानीपत को 400 करोड़ का हो चुका है नुकशान : अग्रवाल
फिलहाल उद्योगों को हर रोज 30 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो रहा है। इस बार अच्छे ऑर्डर मिले थे, लेकिन बायर तक डिलीवरी नहीं दे पा रहे हैं। फैक्टरियों में माल स्टोर करना पड़ रहा है। उत्पादन रोकना पड़ गया है।
– मनीष अग्रवाल, सचिव चैंबर ऑफ कॉमर्स

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