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पावर प्लांट्स की 4 यूनिट बंद पड़ीं, 8 में क्षमता से कम उत्पादन

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पावर प्लांट्स की 4 यूनिट बंद पड़ीं, 8 में क्षमता से कम उत्पादन, कोयला स्टॉक 4-5 दिन का ही बचा, हरियाणा सप्लाई होने वाली 80% बिजली बाहर से खरीदता है, 20% ही खुद बनाता है

 

कोयले की कमी का असर हरियाणा में भी दिखने लगा है। यहां थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का 4-5 दिन का ही स्टॉक बचा है। यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही तो बिजली संकट गहरा सकता है। हरियाणा खुद 2582.40 मेगावाट बिजली का उत्पादन करता है। जो प्रदेश में सप्लाई होने वाली बिजली का 19.67% है। हम करीब 80% बिजली बाहर से लेते हैं। प्रदेश में बनने वाली बिजली में 60 मेगावाट सौर ऊर्जा से मिलती है।

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बाकी कोयला आधारित पावर प्लांट्स में बनती है। प्रदेश में फिलहाल पीक टाइम में करीब 8 हजार मेगावाट बिजली की जरूरत पड़ रही है। जबकि, बिजली उत्पादन क्षमता 12,218.40 मेगावाट की है। कोयले की कमी होने से जैसी स्थिति हरियाणा के बिजली प्लांट्स में पैदा हो रही है, वैसी ही प्राइवेट कंपनियों के पावर प्लांट्स के सामने है। हरियाणा में स्थित 5 पावर प्लांट में 12 यूनिट चलती हैं। लेकिन इनमें से 4 यूनिट कोयले की कमी या टेक्निकल दिक्कतों के चलते बंद हैं। अन्य 8 यूनिट में भी क्षमता से कम बिजली उत्पादन हो रहा है।

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हालांकि, बिजली विभाग के एसीएस पीके दास का कहना है कि यह स्थिति पूरे देश में एक जैसी है। फिलहाल प्रदेश में बिजली की कोई कमी नहीं है। उम्मीद है जल्द और कोयला मिल जाएगा। वहीं, बिजली मंत्री रणजीत सिंह चौटाला ने कहा कि पूरे मामले की समीक्षा की है। अभी 4-5 दिनों का कोयला है। उम्मीद है जल्द और आ जाएगा।

प्रदेश में रोज 45,936 टन कोयले की जरूरत

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यदि प्रदेश में सभी प्लांट्स को चलाया जाए तो हर दिन 12 रैक कोयले की जरूरत है। एक रैक में 3828 टन कोयला होता है। पर सभी प्लांट्स को एकसाथ नहीं चलाया जा सकता। ऐसा किया जाता है तो कोयला जल्द खत्म हो जाएगा।

बिजली के स्रोत

  • 2582.40 मेगावाट बिजली हरियाणा खुद बनाता है। यह सप्लाई का 19.67% है। 60 मेगावाट सौर ऊर्जा है।
  • 846.14 मेगावाट बिजली बीबीएसबी से पानी से बनाई जाने वाली बिजली में से मिलती है। यह प्रदेश की सप्लाई का 7.05% है।
  • 3027.66 मेगावाट 24.21% बिजली सेंट्रल पावर शेयर यूनिट से।
  • 5762.20 मेगावाट (47.98%) बिजली प्राइवेट प्लांट्स से खरीदी जाती है।

दो महीने से चली आ रही है कोयले की कमी

कोयले की कमी करीब दो माह से चल रही है। मॉनसून की बारिश की वजह से कोयला खदानों में पानी भर जाता है। अमूमन सितंबर मध्य तक बारिश रुक जाती है, पर इस बार यह 7 अक्टूबर तक रही है। इसलिए संकट ज्यादा बढ़ा।

संकट में रेलवे ने कोयला ढुलाई की रफ्तार बढ़ाई, 24 घंटे में ही हरियाणा-दिल्ली में 18 रैक पहुंचाए

बिजली संकट से उबारने के लिए रेलवे भी एक्शन मोड में आ गया है। काेयले से लदी मालगाड़ियां बगैर रोके दिल्ली-हरियाणा पहुंचाई जा रही हैं। दिल्ली डिवीजन के अधिकारियों की स्पेशल ड्यूटी लगाई गई है। 24 घंटे में फरीदाबाद सेक्शन से 18 मालगाड़ियों को दिल्ली व हरियाणा भेजा जा चुका है। सामान्य दिनों में कोयले से लदी 4-5 गाड़ियां ही निकलती थीं। लेकिन, अब मालगाड़ी के रैक को लोहा व अन्य सामान के बजाय काेयला ढोने में लगा दिया है।

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