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पानीपत

शहर के 50 प्रतिशत पर सड़कों पर चल रहा निर्माण, फिर भी नहीं हो पा रही मुख्य मार्गों की सफाई

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शहर के 50 प्रतिशत पर सड़कों पर चल रहा निर्माण, फिर भी नहीं हो पा रही मुख्य मार्गों की सफाई

शहर में सफाई के लिए स्थानीय शहरी निकाय की तरफ से रोड स्वीपिंग मशीन भेजी गई है। इस मशीन पर हर माह 8.50 लाख रुपए (किराया व तेल सहित) खर्च हो रहे हैं, लेकिन जितनी राशि खर्च हो रही है उतनी सफाई शहर की मुख्य सड़कों की नहीं हो पा रही है। इस समय शहर के 50 प्रतिशत मुख्य मार्गों पर निर्माण का काम चल रहा है, जिसके चलते इन सड़कों पर सफाई का काम ही नहीं हो पा रहा।

जींद शहर लगभग 10 किलोमीटर एरिया में बसा है। गोहाना व सफीदों रोड बाईपास से लेकर रेलवे रोड (पटियाला चौक) तक लगभग 8 किलोमीटर पड़ता है। इसी प्रकार रोहतक रोड, भिवानी रोड का एरिया है। मुख्य मार्गों की सफाई के लिए 76 लाख की कीमत की जून में नगर परिषद को रोड स्वीपिंग मशीन मिली थी, लेकिन आज तक अधिकतर मुख्य मार्गों पर मशीन से सफाई नहीं हो सका।

शहर के 5 मुख्य रोडो पर पाइप लाइन दबाने, आरओबी व सड़क निर्माण के कार्य चल रहे हैं, जिस कारण यहां मुख्य मार्गों पर सफाई संभव नहीं है। मशीन केवल मुख्य सड़क व डिवाइडर के नजदीक गंदगी को साफ करती है, लेकिन बर्म को साफ नहीं कर पाती, इसके चलते सुबह फिर से कर्मचारियों को दुकानदारों द्वारा फेंकी गई गंदगी को साफ करना पड़ता है।

मशीन के जरिए प्रतिदिन 30 किलोमीटर एरिया की सफाई करनी होती है, लेकिन जींद शहर का एरिया बहुत कम है। ऐसे में दोनों तरफ की मिलाकर 30 किलोमीटर की सफाई हो पाती है। रोड स्वीपिंग मशीन में जीपीएस लगा हुआ है, जिसकी कनेक्टिविटी मुख्यालय से है। 30 किलोमीटर से कम सफाई होने पर अगले दिन मुख्यालय की तरफ से कम सफाई होने का मैसेज भेज दिया जाता है। ऐसे में मजबूरन एक ही रोड की सफाई का काम सप्ताह में कई बार करना पड़ता है।

इधर नरवाना नप ने रूट न बनने पर वापस भेजी मशीन
स्थानीय शहरी निकाय विभाग की तरफ से यह मशीन नगर परिषद को दी गई थी, जिसमें जींद व नरवाना शामिल था। नरवाना में ऐसे बहुत कम मुख्य मार्ग हैं, जहां का रूट बनाकर सफाई करवाई जा सके। इसके अलावा मशीन पर हर माह साढ़े 8 लाख रुपए खर्च आ रहा था। नरवाना नप में पहले ही कर्मचारियों को वेतन समय पर नहीं दिया जा रहा, ऐसे में मशीन का किराया व तेल की खपत का बोझ नहीं उठाया जा रहा था। ऐसे में नप प्रशासन की तरफ से मुख्यालय को पत्र भेजकर मशीन वापस भिजवा दी गई। नरवाना नप में मशीन केवल 45 दिन ही चल सकी। अब 122 कर्मचारियों द्वारा ही सफाई का काम संभाला जा रहा है।