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पानीपत

प्राइवेट अस्पतालों में सभी बेड फुल, सरकारी में 554 खाली, लेकिन ऑक्सीजन की कमी, वेंटिलेटर बंद पड़े

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प्राइवेट अस्पतालों में सभी बेड फुल, सरकारी में 554 खाली, लेकिन ऑक्सीजन की कमी, वेंटिलेटर बंद पड़े

जिले में शनिवार काे 490 नए केस मिले और 165 रिकवर हुए। वहीं, 7 लाेगाें ने काेराेना से जान गंवा दी। केसाें की बढ़ती संख्या के बीच अब निजी अस्पतालाें में सामान्य बेड से लेकर आईसीयू में बेड तक फुल हाे चुके हैं। निजी अस्पतालाें में हर 15 मिनट में एक काेराेना मरीज के लिए बेड लेने काे फाेन जरूर अा रहा है।

सिविल सर्जन डाॅ. संजीव ग्राेवर ने बताया कि व्यवस्थाएं बढ़ाने पर जाेर दिया जा रहा है। जल्द सिविल अस्पताल में रखे वेंटिलेटराें काे चलवाया जाएगा। इसके लिए डाॅक्टराें की ड्यूटी का राेस्टर तैयार किया जा रहा है। सरकार काे सुविधाओं की डिमांड करते रहेंगे। - Dainik Bhaskar

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फाेन करने पर एक ही बात सुनने काे मिल रही- काेई बेड खाली नहीं है। डॉक्टर हाथ जोड़ कहते हैं कि बेड नहीं हैं। आप मरीज को कहीं और ले जाओ, लेकिन कहीं और कहां? हर निजी अस्पताल में यही हाल है। बचे सरकारी अस्पताल। यहां लाेग जाना नहीं चाहते, क्याेंकि सिविल अस्पताल और समालखा अस्पताल में वेंटिलेटर की व्यवस्था ही नहीं है।

ऑक्सीजन वाले बिस्तर सिविल अस्पताल में फुल हाे चुके हैं। समालखा अस्पताल में एक भी मरीज भर्ती नहीं है। सिविल अस्पताल की इमरजेंसी के पीछे बना 12 बिस्तराें का आइसाेलेशन वार्ड फुल हाे चुका है। मरीज कुर्सी पर बैठकर ही ऑक्सीजन लगाने को मजबूर हैं। पानीपत में हर 20वें मिनट में एक एंबुलेंस राेड से इधर से उधर गुजर रही है। एनसी काॅलेज में विभाग मरीज भेज रहा है, लेकिन बहुत कम संख्या में।

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वहां 216 बिस्तर ऑक्सीजन वाले खाली हैं, लेकिन सीधे ताैर पर वहां बेड नहीं मिलते। क्याेंकि वहां सिविल सर्जन की अनुमति पर ही बेड दिए जाते हैं। राेजाना माैताें का अांकड़ा बढ़ रहा है। पिछले 4 दिन में 26 लाेग काेराेना से जान गवां चुके हैं। 24 दिन में ही रिकाॅर्ड 5 हजार 332 केस मिल चुके हैं और 44 लाेगाें की माैत हाे चुकी है। ये किसी भी महीने का सबसे बड़ा आंकड़ा है। असल में जब सरकार या विभाग के पास तैयारी का माैका था वाे लापरवाही में ही गंवा दिया।

हाथ जोड़ मां बोली- भर्ती कर लो साहब! बेटी को कोरोना नहीं है

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सिविल अस्पताल परिसर में बेटी सृष्टि के इलाज के लिए हाथ जाेड़कर लाेगाें से मदद मांगती मां बोलीं- अस्पताल वाले कह रहे- इसे काेराेना है और वापस लाैटा दिया। मां रोती रही, हाथ जोड़ती रही, न किसी ने मदद की, न अस्पताल वालों ने बेटी को भर्ती किया।

हर 20वें मिनट में राेड पर एक एंबुलेंस अस्पतालों में भटक रही

इसलिए लाेग निजी अस्पतालाें में भाग रहे

निजी अस्पतालाें में ऑक्सीजन बेड, वेंटिलेटर, कोविड टेस्ट की सुविधा, एक्स-रे, इलेक्ट्रोकार्डिओग्राम (इसीजी), व्हील चेयर, स्ट्रेचर व अन्य सुविधाएं, सीटी स्कैन सहित अन्य सुविधाएं हैं। जबकि सरकारी अस्पतालाें में इन सबका टोटा है।

सिविल अस्पताल में सुविधा बढ़ा रहे

सिविल सर्जन डाॅ. संजीव ग्राेवर ने बताया कि व्यवस्थाएं बढ़ाने पर जाेर दिया जा रहा है। जल्द सिविल अस्पताल में रखे वेंटिलेटराें काे चलवाया जाएगा। इसके लिए डाॅक्टराें की ड्यूटी का राेस्टर तैयार किया जा रहा है। सरकार काे सुविधाओं की डिमांड करते रहेंगे।

 

 

Source : Bhaskar

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