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पानीपत

शहर में 56 पॉज़िटिव केस लापता, ग़लत फ़ोन नंबर व पता बनी मुसीबत – ये लोग बेहद ख़तरनाक

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शहर में 56 पॉज़िटिव केस लापता, ग़लत फ़ोन नंबर व पता बनी मुसीबत – ये लोग बेहद ख़तरनाक

जिले में संक्रमण रोकने में जिला प्रशासन और सेहत विभाग की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। जिले में काेराेना के 56 केस अनट्रेस चल रहे हैं, यानी ये वाे लाेग है जाे पाॅजिटिव मिलने के बाद विभाग काे नहीं मिले हैं। 9 केस एक महा से भी एम समय के हैं। ये ऐसे केस है जिन्हाेंने सैंपल देने के समय अपने अड्रेस और मोबाइल नंबर तक गलत दर्ज करवाए हैं। अब वे पॉजिटिव हैं और समाज में दूसरों के लिए खतरा बने हुए हैं। विभाग काे इन केसाें के बारे में काेई डिटेल नहीं पता है कि ये काैन है, कहां रहते हैं, पानीपत में है या नहीं, ऐसे ही घूम रहे है ठीक हाे चुक हैं।

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56 अनट्रेस केसाें में से 95 प्रतिशत केस पिछले 3-4 महीनाें के हैं। टेस्ट कराने के बाद काेई अपना माेबाइल नंबर गलत दे रहा है, ताे वहीं कई का ताे माेबाइल नंबर ही बंद मिलता है। फिर दिए गए पताें पर भी वाे नहीं मिलते। कई मरीजाें का ताे आधार कार्ड ही फर्जी निकलता है। ताे वहीं कई लाेग ताे आधार कार्ड पुराने एड्रेस वाला दे जाते हैं। इन एड्रेस पर टीम पहुंची ताे पता चलता है कि इस पते पर ताे काेई है नहीं है। ताे वहीं कुछ कई महीने पहले ही किराए के मकानाें काे छाेड़कर जा चुके हैं।

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जब मरीज कोरोना वायरस का सैंपल देने के लिए आता है तो स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर, डेटा ऑपरेटर अधिकारी और कर्मचारी व्यक्ति का वहीं मोबाइल नंबर और घर का पता दर्ज करते हैं, जो लोग बताते हैं। पांच माह से कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई है कि जब संदिग्ध मरीज अपना सैंपल देने के लिए आता है तो उसका स्थाई पता या पहचान पत्र और अन्य आईडी प्रूफ देखा जाए।

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पिछले तीन महीनाें से आधार कार्ड की काॅपी ली जाती है लेकिन काेई चैक भी नहीं करता कि ये काॅपी उसके आधार कार्ड की है या नहीं। इसी के चलते जब व्यक्ति को संक्रमण की पुष्टि होती है तो वह अधिकतर लोगों के मोबाइल नंबर ही गलत आते हैं। टीमें घर जाती भी या नहीं इस बारे में नहीं इस बारे में काेई नहीं जानता। लेकिन विभाग का दावा है कि टीमें जाती हैं।

पहले मरीज और फिर विभाग के पास जाती है रिपोर्ट

अधिकारियों का कहना है कि जो लोग प्राइवेट लैब से कोरोना वायरस का टेस्ट करवा रहे हैं, उनकी रिपोर्ट पर मरीज का सही पता ही लिखा होता। अगर किसी व्यक्ति ने अपना टेस्ट करवाया है तो लैब अधिकारी रिपोर्ट पर एड्रेस वाले कॉलम में पानीपत लिख रहे हैं। इसके चलते मरीज को ढूंढने में भी काफी दिक्कतें आ रही हैं। विभाग के पास ऐसे कई मामले हैं, जिन पर संक्रमित मरीज का मोबाइल और पता गलत लिखा है। वहीं प्राइवेट लैब की रिपोर्ट पहले मरीज को भेजी जाती है, उसके बाद रिपोर्ट की कॉपी अगले दिन विभाग के पास जाती है। तब तक कई लोग फोन बंद कर चुके होते हैं, जबकि मरीज को कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है।

नंबर और पता गलत मिलता है

काेराेना महामारी के जिला नाेडल अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ डाॅ. सुनील संडूजा ने बताया कि 56 केस अनट्रेस है ये ज्यादातर पहले के हैं। इनके माेबाइल नंबर व पता गलत मिला है। क्याेंकि पहले सैंपल लेते समय सिर्फ माेबाइल नंबर लेते थे। आधार कार्ड की व्यवस्था नहीं थी। लेकिन जब ये व्यवस्था आई तब भी फर्जी पते भी मिले हैं। कई बार रैपिड टेस्ट में किसी का पता नहीं लेते, सिर्फ माेबाइल नंबर ले लेते है। इससे भी दिक्कत बड़ी है। कई लाेग बाद में नाम बदलकर भी सैंपल करवा लेते हैं।

 

Source : Bhaskar

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