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पानीपत में हर महीने 61 लाख रुपए बाज़ार की सफ़ाई पर हुए खर्च, कहाँ गया पैसा

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हर माह 61 लाख रुपए सिर्फ बाजारों और नालों की सफाई पर नगर निगम खर्च करता है। फिर भी न नालाें की सफाई हाे रही है न बाजाराें की। ठेकेदारी प्रथा को पब्लिक भ्रष्टाचार का मुख्य मुद्दा मान रही है। पब्लिक और एक्सपर्ट कहते हैं कि ठेकेदारों के नाम पर तो पैसा लुटाया जा रहा है। यहीं अगर डीसी रेट के कर्मचारियों को सफाई में लगाया जाए तो बेहतर रिजल्ट आएगा।

जैसा कि करनाल व अन्य शहरों में है। शहर के 50 हजार से अधिक लोग सालाना 100 करोड़ के करीब इनकम टैक्स देते हैं। इसके अलावा 7 लाख शहरवासी 50 करोड़ रुपए से ज्यादा का नगर निगम को टैक्स देते हैं। प्रॉपर्टी टैक्स से लेकर कई अन्य मदों में, लेकिन शहर रहने लायक नहीं है।

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क्याेंकि थाेड़ी सी बारिश में ही बाजार डूब जाते हैं। गलियाें में पानी भर जाता है। नालियों से बहने वाला पानी, सड़कों के ऊपर अा जाता है। बड़ा सवाल है कि सफाई पर 5 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी शहर के यह हाल क्यों हैं। आपने देखा कि सफाई का कुल हिसाब हर माह 5 करोड़ रुपए का बनता है।

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बड़ा सवाल है कि 5 करोड़ खर्च करने पर भी यह हाल आखिर क्यों है? इसका जवाब आपको पब्लिक व एक्सपर्ट की बातों से समझ में आ जाएगा। दावा किया जा रहा है कि 150 कर्मचारी रोजाना नालों की सफाई कर रहे हैं। लेकिन वह सफाई हो कहां रही है, ये तो ठेकेदार को ही पता है।

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हर माह सफाई के मद में कहां कितने खर्च हो रहे, आप भी जानिए…

  • निगम के पास 181 पक्के और 390 कच्चे कर्मचारी हैं। इनकी हर माह की सैलरी पर करीब 1.50 करोड़ रुपए खर्च हो रहे।
  • 53 बाजारों की रात को सफाई के नाम पर ठेकेदार के पास 144 लोग काम करते हैं। ठेकेदार को इसकी एवज में 34 लाख रुपए महीना जाता है।
  • जीटी रोड, असंध रोड, जाटल रोड, गोहाना रोड, बरसत रोड और ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया की मुख्य सड़क की सफाई के नाम पर 94 लाख हर महीना खर्च होते हैं। यहां मशीन से सफाई होती है।
  • सेक्टर-11/12, सेक्टर-25, सेक्टर-13/17 व सेक्टर-29 पार्ट-1 व 2 की सफाई के नाम पर हर माह 45 लाख रुपए खर्च होते हैं। यहां भी मशीन से सफाई के दावे किए जा रहे हैं।
  • नालों की सफाई के लिए हर माह ठेकेदार को 27.13 लाख रुपए दिए जा रहे हैं।

जेबीएम भी हर माह ले जाती है 1 से 1.15 करोड़

कूड़ा उठाने वाली कंपनी जेबीएम भी हर माह 1 से 1.15 करोड़ रुपए शहर से ले जा रही है। इसमें 55-60 लाख रुपए निगम से लेती है। वहीं, पब्लिक से भी घर-घर 60-70 लाख रुपए वसूले जा रहे हैं।

जानिए… कॉलोनी, बाजार व सेक्टरों से जुड़े लोग क्या कहते हैं-

सब मजाक बना हुआ है। सेक्टरों में आलीशान बिल्डिंग तो लोगों ने बना ली, लेकिन पानी निकासी का प्रावधान नहीं है। एचएसवीपी को सीवर व बरसाती पानी निकासी की जिम्मेदारी निगम को दे रखी है। दोनों के दोनों विभाग के अफसरों की नाकामी का खामियाजा सेक्टरवासी भुगत रहे हैं।-विरेंद्र सोनी, सेक्टर-12 निवासी।

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पब्लिक का पैसा लुटाया जा रहा है, लेकिन सुविधा एक भी नहीं। बाजारों की सफाई के लिए ठेका दे रखा है। नाले की सफाई के नाम पर हर माह लाखों रुपए लुटाए जा रहे हैं। पैसा लुटाने वाले अफसरों व जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई करें। इस भ्रष्ट निगम के बारे में तो बात करने की इच्छा भी नहीं हो रही। -जितेंद्र नारंग, तहसील कैंप निवासी।

नाला सफाई के नाम पर लूट हो रही है। हर माह 27 लाख रुपए नाला साफ करने वालों को दे रहे हैं। क्या बात करूं, अगर ये नाला साफ करें तो मजाल है कि शहर में पानी जमा हो। बाजारों में तो नाला है ही नहीं। दुकानदारों ने नाले बंद कर रखे हैं। अधिकांश जगह यही स्थिति है। प्रशासन सबसे पहले नाले खुलवाने के लिए थड़े तुड़वाए। -अशोक नारंग, प्रधान, शॉल मार्केट एसोसिएशन।

एक्सपर्ट व्यू- डीसी रेट वाले बेहतर रिजल्ट दे सकते हैं

डीसी रेट के कर्मचारी हड़ताल करेंगे, ठेकेदारी चलाने का यह सिर्फ बहाना है। निगम पहले भी तो डीसी रेट पर रखता था। अभी भी है और दूसरे शहर में भी हैं। यहां भी डीसी रेट पर कर्मचारियों को रखो। कर्मचारियों को पूरे पैसे मिलेंगे तो हड़ताल क्यों करेंगे। दूसरे निगम के अफसर इन कर्मचारियों की मॉनिटरिंग करें तो शहर में बेहतर रिजल्ट मिलेगा।
-एनके जिंदल, रिटायर्ड एमई।

sachin kapoor (@sachinkapoor2) | Twitter

अब पढ़िए, निगम से जुड़े 2 लोगों की प्लानिंग-

सफाई बहुत बड़ा मुद्दा बना हुआ है। यह सही है कि रिजल्ट ठीक नहीं आ रहे हैं। इसलिए, आने वाले दिनों में सभी ठेके खत्म किए जाएंगे। हर वार्ड के लिए अलग-अलग टेंडर देने की प्लानिंग है। डीसी रेट पर कर्मचारी रखें या नहीं, इस पर भी पार्षदों से एक बार फिर से राय लेंगे।-अवनीत कौर, मेयर।

थोड़ी सी बारिश में शहर की सड़कें डूब गई। इससे स्पष्ट हाे रहा है कि नाला गैंग की टीम की कार्यप्रणाली कैसी है। जल्दी ही सफाई की प्रक्रिया का अध्ययन करने के लिए मीटिंग बुलाई जाएगी। इसके बाद सफाई पर बड़ा फैसला लिया जाएगा। फिलहाल नाला गैंग काे सफाई और भी तेज गति से करने के निर्देश दिए हैं। -आरके सिंह, कमिश्नर, नगर निगम, पानीपत।

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