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पानीपत

17 दिन से लगातार घट रहे हैं एक्टिव केस; नए केस मिलने की रफ्तार भी घटी, क्या यही जिले में महामारी का पीक है

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17 दिन से लगातार घट रहे हैं एक्टिव केस; नए केस मिलने की रफ्तार भी घटी, क्या यही जिले में महामारी का पीक है

पिछले दो हफ्ते से तकरीबन रोज ही कोरोनावायरस के नए केस सामने आने की संख्या घट रही है। इससे विशेषज्ञों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या महामारी का पीक आ गया है? आंकड़े भले ही यह संकेत दे रहे हों, मगर विशेषज्ञ कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं। वे सतर्क रहने को जरूर कह रहे हैं। पानीपत जिले में पिछले 17 दिनों में 52 की औसत से केस मिल रहे है। 20 सितंबर से 4 अक्टूबर तक 887 केस मिले हैं।

वहीं ठीक होने वालों की संख्या इन्हीं 17 दिनों में 2 गुना रही है। इस दौरान 1810 केस स्वस्थ हुए हैं। तो वहीं 19 की मौत भी हुई है। इससे 1 सितंबर से 19 सितंबर के बीच केसों के मिलने की रफ्तार इन 15 दिनों के मुकाबले ढाई गुना रही है। इन 19 दिनों में 2788 केस मिले थे। वहीं रिकवरी की बात करें तो रिकवरी में भी 13 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है। जिले में 19 सितंबर कुल केस 6687 थे, इनमें 77.02 प्रतिशत केस यानी 5150 केसों की रिकवरी हुई थी। अब 4 अक्टूबर तक रिकवरी का प्रतिशत कुल 90 प्रतिशत के पार हो चुका है।

सबसे पहले, यह पीक क्या होता है?
महामारी के दौर में अधिकारी और वैज्ञानिक अक्सर पीक की बात करते हैं। इसका मतलब है कि नए मामलों में स्थिरता आ गई है और गिरावट आ रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, जब कोई संक्रमण अनियंत्रित तरीके से बढ़ता है तो हर दिन पिछले दिन से ज्यादा केस आते हैं। मौतें भी बढ़ती जाती हैं। यह स्थिति हमेशा नहीं रहती। कहीं न कहीं जाकर सिलसिला टूटता ही है। नए केस की संख्या पिछले दिन के बराबर या उससे कम होने लगती है। इसे महामारी से जुड़ी शब्दावली में पीक कहते हैं, लेकिन यह नियमित होना चाहिए। ऐसा नहीं है कि एकाध दिन नए मामले कम आए तो उसे पीक मान लें।

 

क्या कह रहे हैं एनालिस्ट?
अभी कोई दावे के साथ कुछ नहीं कह रहा। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट ने रिकवरी रेट को आधार बनाया। कहा कि भारत में रिकवरी रेट 75त्न को पार करेगा, तब शायद हम पीक की ओर बढ़ते हुए नजर आएं। यह दावा गलत निकला। रिकवरी रेट 75त्न क्रॉस करने के बाद भी सितंबर में केस बढ़ते चले गए। जिले की बात करें तो रिकवरी रेट अब भी 90 प्रतिशत पार के हो चुका है।

 

क्या कह रहे हैं एनालिस्ट?
अभी कोई दावे के साथ कुछ नहीं कह रहा। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट ने रिकवरी रेट को आधार बनाया। कहा कि भारत में रिकवरी रेट 75त्न को पार करेगा, तब शायद हम पीक की ओर बढ़ते हुए नजर आएं। यह दावा गलत निकला। रिकवरी रेट 75त्न क्रॉस करने के बाद भी सितंबर में केस बढ़ते चले गए। जिले की बात करें तो रिकवरी रेट अब भी 90 प्रतिशत पार के हो चुका है।

 

क्या सैंपल कम होने की वजह से केस कम मिल रहे हैं?
यह सही नहीं है। नए इंफेक्शन की संख्या में गिरावट दिख रही है, जबकि जांच के सैंपल बढ़े हैं। जिले में 19 सितंबर तक 60 हजार सैंपल हो गए थे। उसके बाद भी जिले में 18 हजार से ज्यादा सैंपल हो गए हैं।

 

लोगों को अलर्ट रहना होगा : सीएमओ
सीएमओ डाॅ. संतलाल वर्मा ने कहा कि जिले में केसों की संख्या लगातार कम हो रही है, लेकिन इसे हल्के में भी नहीं ले सकते। किसी भी मरीज के अंदर कोरोना के लक्षण दिखाई दे तो वह जांच जरूर कराएं। अगर जांच न कराई तो स्थिति बिगड़ सकती है। लोगों को अलर्ट रहने की जरूरत है। मास्क पहनकर ही घर से निकले। सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन करें। इससे ही बचाव होगा और आप और आपका परिवार सुरक्षित रहेगा।

 

 

 

Source : Bhaskar

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