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प्रशासन से मीटिंग फेल होने के बाद हाईवे पर पहुंची भीड़ चौथा नाका तोड़कर आगे बढ़ी

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प्रशासन से मीटिंग फेल होने के बाद हाईवे पर पहुंची भीड़ चौथा नाका तोड़कर आगे बढ़ी; किसान नेताओं को हिरासत में लिया पर बाद में छोड़ा

 

करनाल में जिला प्रशासन से तीसरे दौर की वार्ता विफल होने के बाद जिला सचिवालय के घेराव को निकले किसान हाईवे पर चौथा नाका तोड़कर आगे बढ़ गए। वहीं पुलिस ने हिरासत में लिए गए किसानों को छोड़ दिया है।

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इससे पहले कूच पर निकले किसानों को तीन नाके पार करने के बाद रोक लिया था। नमस्ते चौक पर लगे चौथे नाके पर प्रशासन ने 40 रोडवेज बसें बुलाईं थी। किसान गिरफ्तारी के लिए तैयार हो गए। वहीं आधे से ज्यादा किसान फ्लाईओवर से होकर नमस्ते चौक से आगे निकल गए। वहीं गिरफ्तारी के बाद बसों में बैठाए किसानों को अन्य किसानों ने जाने नहीं दिया। वहां मौजूद अन्य किसानों ने तीनों बसों की हवा निकाल दी, उसके बाद सभी उतर आए।

इससे पहले अनाज मंडी के मंच से किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल के जिला सचिवालय घेराव के ऐलान के बाद किसानों ने कूच किया। राजेवाल ने मंच से ऐलान किया था कि किसान पहले मार्च निकालेंगे और फिर जिला सचिवालय का घेराव करेंगे। सभी किसान नेताओं ने अनाज मंडी में मंच पर जाने से पहले एक दुकान में मीटिंग की और घेराव का फैसला लिया। मीटिंग के बाद किसान नेता महापंचायत के मंच पर पहुंचे। वार्ता के दौरान किसान नेता ​तत्कालीन SDM आयुष सिन्हा को सस्पेंड कर कार्रवाई की मांग कर रहे थे, प्रशासनिक अफसरों ने इस बात को मानने से इंकार कर दिया। उसके बाद किसान नेता उठकर बाहर आ गए और अनाज मंडी की ओर निकल गए थे।

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दो दौर की वार्ता के बाद भी बाहर आ गए थे सारे किसान नेता

इससे पहले दो दौर की वार्ता के बाद चढूनी-टिकैत समेत 11 सदस्य उठकर कुछ देर के लिए बाहर आए थे। बाहर आकर किसान नेताओं ने कहा था कि – जो हम मांग रहे वह प्रशासन नहीं दे रहा और जो प्रशासन दे रहा वह हम नहीं ले रहे। पहली वार्ता के बाद भी एक ब्रेक भी लिया गया था। दूसरे दौर की वार्ता के बाद भी जब बात नहीं बनी तो सभी किसान नेता उठकर बाहर आ गए। हालांकि कुछ ही देर बाद प्रशासन ने किसान नेताओं को तीसरे दौर की वार्ता के लिए भीतर बुला लिया। अब तीसरे दौर की वार्ता भी विफल हो गई है।

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टिकैत समर्थकों से धक्का-मुक्की

किसान नेता चार बैरिकेड हटने के बाद सचिवालय पहुंचे। सबसे पहले निर्मल कुटिया पर लगा बैरिकेड हटाया गया, उसके बाद सेक्टर 12, फिर कोर्ट और सबसे अंत में सचिवालय पर लगे बैरिकेड हटाए गए। सचिवालय पर पैरामिलिट्री फोर्स तैनात थी, जब तक फोर्स के पास प्रशासन से मैसेज नहीं पहुंचा उन्होंने किसान नेताओं को वहां पांच मिनट तक रोके रखा। मैसेज आने के बाद बैरिकेड हटाकर किसानों को भीतर जाने दिया गया। अब प्रशासनिक अधिकारियों और किसान नेताओं की मीटिंग चल रही है। वहीं, साथ जाने की बात कह रहे टिकैत के समर्थकों से सचिवालय बैरिकेड पर धक्का-मुक्की हुई। पैरामिलिट्री फोर्स ने उन्हें भीतर नहीं जाने दिया और कहा कि सिर्फ 11 लोग ही प्रशासन से बात करेंगे।

अनाज मंडी में मंच से तय हुए वार्ता के लिए 11 नाम

अनाज मंडी के मंच पर प्रशासन के बुलावे के बाद किसान नेता राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी, सुरेश कौथ, दर्शन पाल, रामपाल चहल, बलबीर सिंह राजेवाल, योगेंद्र यादव, इंद्रजीत सिंह, अजय राणा, सुखबिंदर चहल, विकास शिखर के नाम प्रशासन से वार्ता करने के लिए तय हुए हैं। सभी नेता जिला सचिवालय में प्रशासन के अफसरों से बात करने के लिए पहुंच चुके हैं। इससे पहले किसान महापंचायत के लिए अनाज मंडी पहुंचे चढूनी ने कहा है कि जिला सचिवालय घेराव का फैसला संयुक्त किसान मोर्चा लेगा। वहीं किसानों का जमावड़ा भी लगने लगा है। अनाज मंडी में किसानों के प्रवेश पर कोई रोक-टोक नहीं है। लेकिन उनकी शहर में एंट्री बैन है।

सभी पांचों प्रवेश द्वारों पर पैरामिलिट्री फोर्स लगाई

अनाज मंडी के सभी पांचों प्रवेश द्वारों पर पैरामिलिट्री फोर्स लगाई गई है। साथ लगते इलाकों को भी सील कर दिया है। अनाज मंडी में व्यवस्था की जानकारी लेने के लिए आईजी, डीसी व एसपी सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने दौरा किया है। बसताड़ा टोल पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में महापंचायत हो रही है। इसके बाद किसान अनिश्चितकाल के लिए मिनी सचिवालय का घेराव करेंगे। घेराव के ऐलान के मद्देनजर हरियाणा सरकार और करनाल प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हुए हैं।

इन 18 जगहों पर लगाए गए नाके

सेक्टर-6, मेरठ रोड, नमस्ते चौक, हांसी चौक, रेलवे स्टेशन चौक, पीडब्ल्यूडी, एनडीआरआई, सेक्टर-3, मंडी के चारों गेटों पर नाका, निर्मल कुटिया चौक, लघु सचिवालय समेत 18 जगहों पर नाके लगाए गए हैं। जीटी रोड से लघु सचिवालय तक आने वाले रास्ते और शहर से लघु सचिवालय तक पहुंचने वाले रास्तों को ब्लॉक किया गया है। पुलिस जवानों को रात को ही रेत से भरे ट्रक मिल गए थे, जिन्हें नाकों पर अड़ाकर रास्ते ब्लॉक किए गए हैं। मेवात, भिवानी, रेलवे अंबाला, कैथल व पानीपत के एसपी भी ड्यूटी पर लगाए गए हैं।

मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद
प्रदेश के 5 जिलों में सभी मोबाइल कंपनियों की इंटरनेट और बल्क SMS सेवाएं बंद कर दी गई हैं। गृह सचिव-1 डॉ. बलकार सिंह के आदेश के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पांच जिलों में करनाल के अलावा कुरुक्षेत्र, कैथल, पानीपत और जींद में सोमवार रात 12 बजे से मंगलवार रात 11:59 बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद रहेगी।

धारा 144, सुरक्षा बल तैनात
करनाल के SP गंगाराम पुनिया ने बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने को लेकर पुलिस पूरी मुस्तैद है। धारा-144 लागू है। किसानों को मिनी सचिवालय तक पहुंचने से रोकने के लिए पैरामिल्ट्री फोर्स समेत सुरक्षाबलों की 40 कंपनियां तैनात की गई हैं। पुलिस की 30 कंपनियां नियुक्त की गई हैं। पैरामिलिट्री फोर्स की 10 कंपनियां अलग से लगाई गई हैं। 5 SP और 25 HPS कम DSP की ड्यूटी लगाई है। इनके साथ वाटर कैनन और ड्रोन भी तैनात किए गए हैं। शहर का लगभग पूरा हिस्सा सील है। करनाल, गुड़गांव, रोहतक, हिसार, रेवाडी रेंज की फोर्स आई हुई है।
10 कंपनियों में बीएसएफ, सीआरपीएफ, आरएएफ, आईटीबीपी शामिल हैं।

रूट डायवर्ट करेंगे और बसों की आवाजाही कम
रोडवेज बसों का संचालन और आवागमन कम कर दिया गया है। सोमवार रात से ही दर्जनभर बसों को उनके मूल मार्गों पर नहीं भेजा जा रहा है। बसें कम आने से पब्लिक शहर में नहीं आ पाएगी और भीड़ से राहत मिलेगी। फिलहाल चंडीगढ़-नई दिल्ली नेशनल हाईवे चल रहा है, लेकिन हाईवे से उतरकर करनाल शहर में लोगों को आने नहीं दिया जा रहा है। अगर किसानों का प्रदर्शन उग्र हुआ तो हाईवे बंद करके मार्ग अवरुद्ध किया जा सकता है। उस स्थिति में लोगों को परेशानी से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने ट्रैफिक डायवर्ट प्लान तैयार किया हुआ है। हाईवे बंद होने की स्थिति में जीटी रोड पर दिल्ली से आने वाले ट्रैफिक को पानीपत से और चंडीगढ़ की तरफ से आने वाले ट्रैफिक को कुरुक्षेत्र से ही डाइवर्ट कर दिया जाएगा। वाहनों के आने-जाने के लिए अलग-अलग 4 रूट बनाए गए हैं।

लोगों से नेशनल हाईवे से नीचे न उतरने की अपील
डीसी निशांत कुमार यादव ने बताया कि किसानों की महापंचायत की वजह से नई दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे (नेशनल हाईवे-44) से करनाल शहर में आवाजाही बाधित रहेगी। हाईवे के ऊपर से निकल सकते हैं, लेकिन हाईवे से उतरकर करनाल शहर में एंट्री बैन है। शहरवासियों से भी अपील है कि वे शहर में ही रहें। यदि जरूरी काम की वजह से लोगों को हाईवे पर आना पड़े और कहीं पर किसी वजह से ट्रैफिक अवरुद्ध हो तो जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से तय किए वैकल्पिक रूट का इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि हाईवे पर किसी तरह की कोई बाधा हो तो ट्रैफिक थाना प्रभारी से उनके मोबाइल नंबर-9729990722 और सिटी ट्रैफिक इंचार्ज से उनके मोबाइल नंबर- 9729990723 पर संपर्क किया जा सकता है।

भाकियू और जिला प्रशासन की बैठक बेनतीजा
बता दें कि सोमवार दोपहर को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेताओं और करनाल के प्रशासनिक अफसरों के बीच मिनी सचिवालय में बैठक हुई थी, जो बेनतीजा रही। एक घंटे चली इस बैठक में जिला प्रशासन की ओर से डीसी निशांत कुमार यादव, एसपी गंगाराम पुनिया और किसानों की ओर से भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी, जिला प्रधान जगदीप औलख समेत 6 सदस्य शामिल हुए। बैठक के बाद चढ़ूनी ने कहा कि जिला प्रशासन ने 30 अगस्त के पुलिस लाठीचार्ज में मारे गए किसान सुशील काजल के बेटे को डीसी रेट पर नौकरी देने का ऑफर किया है, जो स्वीकार करने योग्य नहीं है। उनकी अन्य मांगों पर जिला प्रशासन ने कोई चर्चा नहीं की।

8 किसान संगठनों को कोर्ट का नोटिस
करनाल जिला कोर्ट की तरफ से सोमवार को 8 किसान संगठनों को नोटिस जारी किया गया। नोटिस में गुरनाम सिंह चढ़ूनी ग्रुप, अजय राणा ग्रुप, रतनमान ग्रुप, गन्ना समिति, भाकियू, भाकिसं वगैरह को आदेश दिया गया है कि वह कानून को हाथ में न लें और न ही किसी सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाएं। कोर्ट की ओर से करनाल के डीसी व एसपी को भी नोटिस जारी किया गया कि महापंचायत की वजह से आमजन को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। इससे जुड़ी उचित व्यवस्था की जाए।

बसताड़ा टोल प्लाजा पर लाठीचार्ज : कब क्या हुआ
पुलिस ने 28 अगस्त को बसताड़ा टोल प्लाजा पर किसानों पर लाठीचार्ज किया था, जिसमें कई किसान घायल हो गए थे। आरोप है कि पुलिस लाठीचार्ज में घायल हुए करनाल के रायपुर जाटान गांव के किसान सुशील काजल ने अगले दिन दम तोड़ दिया था। 30 अगस्त को भाकियू ने घरौंडा अनाज मंडी में महापंचायत करके हरियाणा सरकार से तीन मांगें की थी। इनमें सुशील काजल के परिवार को 25 लाख रुपए मुआवजा व एक मेंबर को सरकारी नौकरी देना, घायल किसानों को 2-2 लाख रुपए मुआवजा और लाठीचार्ज के आदेश देने वाले SDM, DSP व दूसरे पुलिसवालों पर कार्रवाई की मांग शामिल थी। भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने सरकार को अल्टीमेटम दिया था कि अगर 6 सितंबर तक उनकी ये तीनों मांगे पूरी नहीं की गई तो 7 सितंबर को करनाल में दोबारा महापंचायत कर मिनी सचिवालय का घेराव किया जाएगा, लेकिन 6 सितंबर को हुई बैठक बेनतीजा रही। परिणामस्वरूप किसान प्रदर्शन करने जा रहे हैं।

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