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किसान नेताओं का ऐलान- जब तक दिल्ली से सभी वाहन नहीं लौट जाते, तब तक नहीं उठेंगे

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किसान नेताओं का ऐलान- जब तक दिल्ली से सभी वाहन नहीं लौट जाते, तब तक नहीं उठेंगे

हरियाणा के करनाल जिले में बसताड़ा टोल पर धरनारत किसान अभी कुछ दिन और उठने वाले नहीं है। बसताड़ा टोल शुरू से ही सुर्खियों में रहा है। कभी लाठीचार्ज तो कभी टोल प्रशासन के साथ कहासुनी। अब यहां पर सबसे आखिर में धरना समाप्त करने का ऐलान किया गया है।

किसानों ने ऐलान किया कि वे तब तक यहां पर बैठे रहेंगे, जब तक दिल्ली गए किसानों के सभी वाहन वापस न आ जाएं। तब तक टोल पहले जैसे बंद ही रहेगा। किसानों ने इस बारे में टोल प्रशासन को भी सूचित कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ टोल प्रशासन भी किसानों की बात को मान चुके हैं।

प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जगदीप औलख ने बताया कि 11 दिसंबर से ट्रालियां व किसानों के अन्य वाहन घर वापसी के लिए बॉर्डर से निकलेंगे। उनका बसताड़ा टोल पर स्वागत किया जाएगा। टाेल पर धरना समाप्त है, लेकिन जब तक किसानाें के सभी वाहन बसताड़ा टोल को क्रॉस नहीं कर जाते, तब तक वे यहीं पर जमे रहेंगे।

वाहन चालकों को कुछ दिनों की राहत

एक साल से बिना टोल दिए वाहनों की आवाजाही हो रही है, लेकिन लगभग सभी टोल 11 दिसंबर को शुरू हो जाएंगे। बसताडा टोल पर अभी कुछ दिनाें की राहत रहेगी। टोल मैनेजर भानु प्रताप ने कहा कि किसानों ने अभी टोल शुल्क लेने से मना किया है। किसानों की सहमति के बाद ही टोल को शुरू किया जाएगा।

क्या था पूरा मामला

28 अगस्त को करनाल में सीएम मनोहर लाल की अध्यक्षता में भाजपा की समीक्षा बैठक थी। इस दौरान बसताडा टोल पर बैठे किसानों ने प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड को काले झंडे दिखाकर विरोध किया। कुछ समय बाद किसान भाजपा की बैठक का विरोध जताने के लिए शहर के तरफ बढ़ने लगे। इस दौरान पुलिस के साथ तकरार हो गई। पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज शुरू कर दिया। अगले दिन 29 अगस्त को एक किसान रायपुर जाटान निवासी सुशील काजल की मौत हो गई। किसानों ने सुशील की मौत का कारण लाठीचार्ज की चोटों को बताया।

इसके विरोध में घरौंडा की अनाज मंडी में महापंचायत का आयोजन करके निर्णय लिया गया कि 7 सितंबर से सचिवालय का घेराव करेंगे। 7 सितंबर को घेराव किया भी किया और किसान लघु सचिवालय के सामने धरने पर बैठे। 11 सितंबर को एसीएस के नेतृत्व में किसानों की बातचीत पर समझौता हुआ कि मृतक के परिवार से दो सदस्यों को नौकरी दी जाएगी। मामले की जांच रिटायर्ड जज से होगी। 22 सितंबर को सुशील काजल के बेटे और पुत्रवधू को नौकरी दी जा चुकी है। 25 सितंबर को रिटायर्ड जज सोमनाथ अग्रवाल की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया गया।

एसडीएम ने दिए थे सिर फोड़ने के आदेश

IAS आयुष सिन्हा का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह कह रहे हैं कि बैरिकेड के आगे कोई किसान जाए तो उसका सिर फोड़ देना। कोई यहां से निकलने की कोशिश करे तो लठ उठा के मारना बस। वह स्पष्ट ऑर्डर दे रहे हैं, उसका सिर फोड़ देना। कोई डाउट नहीं है, किसी डायरेक्शन की जरूरत नहीं है। ये नाका किसी हालत में तोड़ने नहीं देंगे। पीछे और फोर्स लगी है। यहां आपको लगा रखा है शुरू में। हेलमेट पहन लो। यहां से एक बंदा भी नहीं जाना चाहिए और अगर गया तो सिर फूटा होना चाहिए उसका।

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