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अंबाला

बॉर्डर पर हरियाणा का एक और जवान शहीद, आतंकवादियों से लोहा लेते हुए दी शहादत

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बॉर्डर पर हरियाणा का एक और जवान शहीद, आतंकवादियों से लोहा लेते हुए दी शहादत

 

कल हरियाणा के रोहतक जिले के एक जवान आइजोल बॉर्डर पर दिल का दौरा पड़ने से शहीद हो गया था और आज फिर हरियाणा के एक और जवान के शहीद होने की खबर आ गई।

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पाकिस्तान की ओर से की गई फायरिंग में अंबाला शहर के जनसूई गांव के रहने वाले सीनियर हवलदार निर्मल सिंह क्रास फायरिंग के दौरान शहीद हो गए हैं। निर्मल सेना की 10 जेके राइफल्स यूनिट में तैनात थे। उन्हें मौके पर ही प्राथमिक उपचार देकर यूनिट बेस में ले जाया गया लेकिन उन्हें नहीं बचाया जा सका।

आतंकवादियों से लोहा लेते हुए हरियाणा का बेटा शहीद, नम आंखों से दी गई अंतिम  विदाई - subedar satyanarayan martyred in encounter with terrorists

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जानकारी के अनुसार सुबह 11 बजे अचानक पाकिस्तानी सेना से सीजफायर तोड़ दिया। लाइन ऑफ कंट्रोल पर कृष्णा घाटी सेक्टर में बनी फॉरवर्ड पोजिशन पर की गई इस फायरिंग में हवलदार निर्मल सिंह घायल हो गए थे। बाद में उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।  जेएंडके राइफल्स से रिटायर्ड हुए कैप्टन वजीर सिंह भी जनसूई के रहने वाले हैं। वजीर सिंह के मोबाइल पर निर्मल सिंह के शहीद होने की सूचना आई।

सूचना अप्रत्याशित थी, इसलिए बुजुर्ग माता भजन कौर, पत्नी गुरविंदर को इसकी जानकारी नहीं दी गई। स्वजनों को बताया गया कि निर्मल सिंह चोटिल हो गया है और अस्पताल में दाखिल है। दो से तीन घंटे में परिवार को समझाना शुरू किया गया और बता दिया कि निर्मल सिंह देश के लिए शहीद हो गए हैं। निर्मल सिंह का एक बेटा तीन साल और बेटी सात साल की है।

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आज 11 बजे शहीद का शव हेलीकॉप्टर से अंबाला पहुंचेगा। शव यहां हेडक्वार्टर के सुपुर्द किया जाएगा। इसके बाद तमाम औपचारिकता पूरी करने के बाद शव को सम्मान के साथ गांव जनसूई पहुंचाया जाएगा। ऑनरेरी कैप्टन बजीर सिंह ने बताया कि सुबह 8 बजे करीब दो मिनट के लिए सरकारी फोन से निर्मल सिंह ने अपनी पत्नी से बातचीत की थी और कहा था कि यहां सब ठीक है। कैप्टन बजीर सिंह ने बताया कि निर्मल सिंह करीब 3 महीने पहले ही अंबाला अपने घर से वापस ड्यूटी पर आया था।

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निर्मल सिंह (हवलदार) को फौज में जाने के लिए दादा भगवान सिंह ने ही प्रेरित किया था। पांच साल की उम्र में ही निर्मल सिंह के पिता तरलोक सिंह की हादसे में मौत हो गई थी। दादा और चाचा फौज से ही रिटायर्ड थे, इसलिए निर्मल सिंह ने भी फौज में भर्ती होने की ठान ली थी। करीब 16 साल पहले निर्मल सिंह की सेना में भर्ती हुई थी।

वह नौ माह पहले ही एक महीने की छुट्टी पर घर अपने घर अंबाला आए थे। उस समय निर्मल सिंह ने कहा था कि अपनी सर्विस पूरी करने के बाद जल्द ही वह रिटायरमेंट लेकर घर लौटेंगे। गांव में वीरवार दोपहर करीब दो बजे निर्मल सिंह के शहीद होने की सूचना आ गई थी, लेकिन स्वजनों को पांच बजे के करीब इसका पता चला।

 

 

Source : IBN 24

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