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महंगाई की एक और मार! अब बढ़े कागज़ के दाम, जानिए क्यों?

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महंगाई की एक और मार! अब बढ़े कागज़ के दाम, जानिए क्यों? आखिर कैसे बनता है पेपर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में पल्प की कीमतें बढ़ने के बाद घरेलू स्तर पर कंपनियों ने कागज़ के दाम बढ़ा दिए है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेपर के दाम 2000-3000 रुपये प्रति टन तक बढ़ गए है. पेपर मिलों ने अक्टूबर डिलीवरी के दाम बढ़ाए है. पिछले 1 महीने में दाम 12 फीसदी बढ़े है.

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पेपर महंगा होने से क्या होगा?

देश में अब कई काम भले ही ऑनलाइन होते हो. लेकिन कागज़ की खपत तेजी से बढ़ रही है. सुबह अखबार, मेल, कॉपियर कॉपी, कार्डबोर्ड बॉक्स में पिज्जा, पेपर नैपकिन के साथ सफाई, किसी भी मैग्जीन को पढ़ना, कार्डबोर्ड अनाज बॉक्स इत्यादि. एक्सपर्ट्स का कहना है कि कागज़ की कीमतें बढ़ने के बाद इन सभी सामान के दाम भी बढ़ सकते है.

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क्यों महंगा हुआ पेपर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेपर बनाने के लिए पल्प का इस्तेमाल किया जाता है. बीते कुछ दिनों में पल्प की कीमतें तेजी से बढ़ी है. इसीलिए दामों पर इसका असर हुआ है.

पेपर शेयरों में जोरदार तेजी

इस खबर के बाद पेपर कंपनियों के शेयरों में तेजी बनी हुई है. जे के पेपर का शेयर 6 फीसदी, वेस्ट कॉस्ट पेपर 7 फीसदी, सेशाशाही पेपर 5 फीसदी, इमामी, आंध्रा पेपर के शेयर में 5 फीसदी की तेजी है.

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कैसे बनता है पेपर

पेड़ की लकड़ी को छोटे टुकड़ों में बांटा जाता है. जिसे पानी और विभिन्न रसायनों के साथ एक टैंक में गर्म किया जाता है. ये रसायन लुगदी के उत्पादन के लिए जिम्मेदार हैं.

लुगदी को गर्म और सूखने से पहले, स्टार्च और मिट्टी जैसी सामग्री को मिश्रण में जोड़ा जाता है. यह कागज में चमक और शक्ति जोड़ने का काम करता है.

अंत में, इसे ब्लीच या ब्लीच या किसी प्रकार के क्लोरीन के साथ ब्लीच किया जा सकता है. हाइड्रोजन पेरोक्साइड का उपयोग विरंजन के लिए भी किया जा सकता है, हालांकि यह एक उत्पाद को भी प्रदूषित कर रहा है.

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