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हरियाणा में मार्च में अप्रैल जैसी गर्मी, तेजी से बढ़ रहा तापमान, जानें गेहूं की फसल पर क्या पड़ेगा असर

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हरियाणा में मार्च में अप्रैल जैसी गर्मी, तेजी से बढ़ रहा तापमान, जानें गेहूं की फसल पर क्या पड़ेगा असर

करनाल में मार्च माह में ही अप्रैल जैसी गर्मी का अहसास होना शुरू हो गया है। तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इस समय जो मौसम बना हुआ है यह 25 अप्रैल के बाद या फिर अप्रैल के पहले सप्ताह में देखने को मिलता है। लगातार बढ़ रहे तापमान को कृषि की दृष्टि से ठीक नहीं माना जा रहा है। कृषि एवं कल्याण विभाग के पूर्व तकनीकी अधिकारी डा. एसपी तोमर ने बताया कि ज्यादातर गेहूं की फसल मिल्किंग स्टेज से निकल चुकी है, हालांकि कुछ पिछेती किस्में अभी भी बची हुई हैं। तापमान में बढ़ोतरी जारी रही ओर हवा का संचालन तेज हुआ तो निश्चित तौर पर गेहूं की फसल के लिए यह नुकसानदायक साबित हो सकता है। उत्पादन पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

हरियाणा में सामान्य से 5.0 डिग्री अधिक दर्ज किया गया है तापमान।

फसलों को हो सकता है नुकसान

अमूमन हीट वेव जो आमतौर पर मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में होती है, लेकिन इस बार, यह देश के कई हिस्सों में शुरू हो चुकी है। पिछले 4 से 5 दिनों में तापमान में अचानक 5 से 6 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी ने गर्मी की लहर शुरू कर दी है। यदि यह उच्च तापमान एक या दो सप्ताह तक बना रहता है तो वे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के कुछ हिस्सों और उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में रबी फसल की उपज पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे। इसके अलावा, तीव्र गर्मी से तीव्र मानसून पूर्व गतिविधियां जैसे गरज, ओलावृष्टि या धूल भरी आंधी हो सकती है। ये गतिविधियां उन फसलों को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं, जो कटाई के लिए तैयार हैं।

देशभर में यह बना हुआ है मौसमी सिस्टम 

दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे दक्षिण अंडमान सागर पर गहरे कम दबाव के क्षेत्र के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के साथ-साथ उत्तर की ओर बढ़ने की संभावना है। 20 मार्च तक यह एक डिप्रेशन में और 21 मार्च तक एक चक्रवात में तेज हो सकता है। इसके बाद यह उत्तर-पूर्व दिशा में बांग्लादेश और उत्तरी म्यांमार तट की ओर बढ़ेगा। उत्तरी अफगानिस्तान पर पश्चिमी विक्षोभ और एक अन्य पश्चिमी विक्षोभ लद्दाख और आसपास के क्षेत्रों पर है। विदर्भ और आसपास के इलाकों में निचले स्तर पर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र देखा जा सकता है। एक टर्फ रेखा विदर्भ के ऊपर सर्कुलेशन से दक्षिण तमिलनाडु तक फैली हुई है।

 

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