पानीपत लाइव ब्यूरो: हरियाणा के रेल यात्रियों और दैनिक रेल यात्रियों (Daily Passengers) के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। दिल्ली से अंबाला के बीच चलने वाली ट्रेनों की लेटलतीफी अब बीते जमाने की बात होने वाली है। उत्तर रेलवे ने दिल्ली-पानीपत-अंबाला रेलखंड को पूरी तरह से फोरलेन (चार लाइन) में बदलने की योजना पर धरातल पर काम शुरू कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत मौजूदा दो लाइनों के साथ तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी, जिससे रेल यातायात का दबाव कम होगा और ट्रेनों की रफ्तार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इस पूरी परियोजना पर लगभग 5,983 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। लगभग 197 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। रेलवे ने संबंधित जिला प्रशासनों को जमीन के रिकॉर्ड और अधिग्रहण के लिए प्रस्ताव भेज दिए हैं। इस परियोजना के पूरा होने से न केवल हरियाणा, बल्कि दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर की ओर जाने वाले लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।
परियोजना का विवरण और परिचालन क्षमता में सुधार
वर्तमान में दिल्ली-अंबाला रेलखंड देश के सबसे व्यस्ततम मार्गों में से एक है। इस रूट पर प्रतिदिन लगभग 200 मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और मालगाड़ियों का आवागमन होता है। केवल दो लाइनें होने के कारण अक्सर शताब्दी, राजधानी और अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों को रास्ता देने के लिए पैसेंजर ट्रेनों को छोटे स्टेशनों पर घंटों खड़ा रखा जाता है। पिछले 10 वर्षों में इस मार्ग पर यात्रियों की संख्या में 40 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है, जिससे मौजूदा बुनियादी ढांचा छोटा पड़ने लगा है।
तीसरी और चौथी लाइन बनने के बाद, मालगाड़ियों और पैसेंजर ट्रेनों के लिए अलग-अलग ट्रैक उपलब्ध होंगे। इससे परिचालन क्षमता (Operational Capacity) बढ़ेगी और ट्रेनों के समय पालन (Punctuality) में सुधार होगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस विस्तार के बाद एक्सप्रेस ट्रेनों को पास देने के चक्कर में अन्य ट्रेनों को रोकने की समस्या लगभग समाप्त हो जाएगी।
| जिला | प्रमुख प्रभावित क्षेत्र और गांव | अधिग्रहण का दायरा |
|---|---|---|
| सोनीपत | मुनीरपुर, कालूपुर, गन्नौर, राजपुर, अकबरपुर बारोटा, जफरपुर | लगभग 15.52 हेक्टेयर |
| पानीपत | समालखा, झटीपुर, दिवाना, सिवाह, काबड़ी, निजामपुर, कचरौली | प्रस्तावित प्रक्रिया जारी |
| करनाल | घरौंडा, कोहंड, बसताड़ा, नीलोखेड़ी, उचाना, शामगढ़ | चिह्नित गांव |
| कुरुक्षेत्र | थानेसर, अमीन, शाहाबाद, सुंदरपुर, धीरपुर | सर्वेक्षण पूर्ण |
| अंबाला | मोहरा, शाहपुर, नन्हेड़ा, अंबाला कैंट | अंतिम चरण |
पानीपत और समालखा में जमीन अधिग्रहण की स्थिति
परियोजना का एक बड़ा हिस्सा पानीपत जिले से होकर गुजरता है। पानीपत लाइव की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, समालखा तहसील के झटीपुर सहित सात गांवों की जमीन इस विस्तार की जद में आएगी। इसके अलावा पानीपत शहर के बाहरी इलाकों जैसे दिवाना, सिवाह, काबड़ी, निजामपुर, कचरौली और बाबरपुर में भी रेलवे ट्रैक के साथ लगती जमीन को चिह्नित किया गया है।
"रेलवे की ओर से दिल्ली-अंबाला मार्ग को फोरलेन करने का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। सोनीपत जिले की तीन तहसीलों - राई, गन्नौर और सोनीपत के गांवों का रिकॉर्ड मांगा गया है। राजस्व विभाग की टीमें जमीन के रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं, जिसके बाद अधिग्रहण की अग्रिम कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।" - सुशील शर्मा, डीआरओ, सोनीपत।
पहले चरण के लिए ₹3,612 करोड़ के टेंडर आमंत्रित
रेलवे ने इस परियोजना को गति देने के लिए पहले चरण की निविदाएं (Tenders) भी जारी कर दी हैं। सब्जी मंडी (दिल्ली) से अंबाला कैंट के बीच सिविल निर्माण, सिग्नलिंग, टेलीकम्युनिकेशन और ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) के कार्यों के लिए 3,612 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 1 फरवरी निर्धारित की गई है। रेलवे का लक्ष्य है कि अगले चार वर्षों के भीतर चारों लाइनों पर ट्रेनों का संचालन सुचारू रूप से शुरू कर दिया जाए।
स्थानीय जनजीवन और आर्थिक विकास पर प्रभाव
इस रेल परियोजना का सीधा असर पानीपत के टेक्सटाइल उद्योग और स्थानीय व्यापार पर पड़ेगा। मालगाड़ियों के सुगम आवागमन से कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार माल के निर्यात में तेजी आएगी। साथ ही, दिल्ली और चंडीगढ़ के बीच रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों और छात्रों के लिए यात्रा का समय कम हो जाएगा। इस विस्तार से जीटी रोड बेल्ट के शहरों में शहरीकरण और औद्योगिक विकास को नई ऊर्जा मिलने की संभावना है।
प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान किसानों और जमीन मालिकों को उचित मुआवजा देने के लिए जिला प्रशासन द्वारा सर्वे किया जा रहा है। राजस्व विभाग के अधिकारी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि अधिग्रहण के कारण किसी भी रिहायशी इलाके को कम से कम नुकसान हो। आने वाले हफ्तों में प्रभावित गांवों में सार्वजनिक सूचना जारी कर आपत्तियां मांगी जा सकती हैं, जिसके बाद जमीन का कब्जा रेलवे को सौंपने की प्रक्रिया शुरू होगी।




