त्योहारी सीजन के बीच हरियाणा के अन्नदाताओं के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने दीवाली के इस पावन अवसर से ठीक पहले किसानों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरते हुए उनकी मेहनत का पूरा फल खातों में पहुंचाना शुरू कर दिया है। चालू खरीफ सीजन के दौरान धान बेचने वाले प्रदेश के दो लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से कुल 4,263 करोड़ रुपये की आश्वस्त राशि जमा कराई जा चुकी है। इस वित्तीय हस्तांतरण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है और किसान अपने परिवारों के साथ इस बार बेहद उत्साह के साथ प्रकाश पर्व मनाने की तैयारी में जुट गए हैं।
प्रदेशभर की कृषि उपज मंडियों में इन दिनों धान की आवक और खरीद प्रक्रिया पूरी गति के साथ संचालित हो रही है। कृषि विपणन बोर्ड और संबंधित सरकारी खरीद एजेंसियों से मिले आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक कुल 37.27 लाख टन धान मंडियों में पहुंच चुका है, जिसमें से लगभग 30.69 लाख टन यानी करीब 82 प्रतिशत हिस्से की खरीद प्रशासनिक मानदंडों के अनुसार पूरी की जा चुकी है। इसके अलावा, किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए खरीदी गई फसल का त्वरित उठान भी सुनिश्चित किया जा रहा है, जिसके तहत अब तक लगभग 23.34 लाख टन यानी 76 प्रतिशत धान का मंडियों से सुरक्षित उठाव किया जा चुका है ताकि भंडारण और नई आवक के लिए पर्याप्त जगह बनी रहे।
विभिन्न खरीद एजेंसियों का प्रदर्शन और खरीद का विस्तृत विवरण
राज्यभर में किसानों की उपज को सुचारू रूप से खरीदने के लिए विभिन्न सरकारी और सहकारी एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। भारत सरकार द्वारा इस वर्ष तय किए गए कुल 58 लाख टन के समग्र खरीद लक्ष्य के मुकाबले प्रदेश में अब तक 53 प्रतिशत से अधिक की खरीद का मील का पत्थर पार किया जा चुका है। मंडियों में रोजाना लगभग एक लाख टन धान की आवक दर्ज हो रही है, जबकि एक दिन में करीब 0.36 लाख टन धान की खरीद सरकारी और गैर-सरकारी माध्यमों से पूरी की जा रही है। खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से चलाने के लिए प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद होकर काम कर रहा है।
एजेंटीवार आंकड़ों की बात करें तो खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने अब तक सबसे अधिक 16.53 लाख टन धान की खरीद की है। इसके साथ ही, सहकारी संस्था 'हैफेड' ने 9.29 लाख टन और हरियाणा राज्य भंडारण निगम ने 4.87 लाख टन धान किसानों से खरीदा है। दूसरी ओर, खुली मंडियों में सक्रिय निजी व्यापारियों ने भी अपनी भागीदारी निभाते हुए अब तक 38,770 टन धान की खरीद दर्ज कराई है। निजी क्षेत्र में बिकने वाले इस धान का औसत बाजार भाव 2,516 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है, जबकि गुणवत्ता और किस्म के आधार पर विभिन्न लेन-देन में यह भाव न्यूनतम 2,461 रुपये से लेकर अधिकतम 2,965 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा है।
| खरीद एजेंसी / क्षेत्र | खरीद मात्रा (टन में) | विशेष विवरण / बाजार भाव |
|---|---|---|
| खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग | 16.53 लाख टन | सरकारी लक्ष्य के तहत सबसे बड़ी खरीद |
| हैफेड (HAFED) | 9.29 लाख टन | सहकारी संस्था द्वारा किसानों को सीधा समर्थन |
| हरियाणा राज्य भंडारण निगम | 4.87 लाख टन | सुरक्षित भंडारण और खरीद व्यवस्था |
| निजी व्यापारी (Private Traders) | 38,770 टन | औसत भाव 2,516 रुपये प्रति क्विंटल (रेंज: ₹2461-₹2965) |
इस पूरी व्यवस्था की निगरानी और संचालन पर बात करते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री राजेश नागर ने बताया कि राज्य सरकार किसानों के एक-एक दाने की खरीद और उनके समय पर भुगतान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फसल कटाई के तुरंत बाद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य उनके बैंक खातों में बिना किसी अनावश्यक विलंब के मिल जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी कड़े निर्देश दिए हैं कि मंडियों में किसानों को पेयजल, रोशनी, साफ-सफाई और तिरपाल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कोई कमी न खले, ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपनी फसल बेच सकें।
मंत्री ने आगे स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों के कल्याण को सर्वोपरि मानती है। धान के उठान में आ रही मामूली बाधाओं को दूर करने के लिए ट्रांसपोर्टर्स और मिलर्स के साथ निरंतर समन्वय बैठकें की जा रही हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को यह स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि मंडियों में धान का उठाव तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए ताकि किसानों को अपनी बारी के लिए ज्यादा इंतजार न करना पड़े। सरकार की इन दूरदर्शी नीतियों और समय पर भुगतान मिलने से किसानों में भारी संतोष का माहौल देखा जा रहा है।
"प्रदेश सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह समर्पित है। दीवाली के पावन अवसर पर दो लाख से अधिक किसानों के खातों में 4263 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जा चुके हैं और हर एक दाने की खरीद व समय पर भुगतान हमारी प्राथमिकता है।" - राजेश नागर, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री, हरियाणा
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय बाजारों पर दीवाली का सकारात्मक प्रभाव
किसानों के खातों में फसल बिक्री की इतनी बड़ी राशि एकमुश्त आ जाने से हरियाणा के ग्रामीण इलाकों और कस्बों के स्थानीय बाजारों में जबरदस्त रौनक लौट आई है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले इस राज्य में जब किसानों के पास नकदी पहुंचती है, तो उसका सीधा लाभ छोटे दुकानदारों, आढ़तियों, ट्रांसपोर्टर्स और स्थानीय कारीगरों को मिलता है। दीवाली के इस त्योहारी सीजन में इस वित्तीय सहयोग के कारण बाजारों में कपड़ों, इलेक्टॉनिक्स, आभूषणों और कृषि उपकरणों की खरीद में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिल रही है, जिससे व्यापारिक वर्ग में भी खुशी की लहर है।
स्थानीय स्तर पर अर्थशास्त्रियों और व्यापार मंडलों का मानना है कि समय पर हुआ यह भुगतान बाजार में तरलता (Liquidity) को बनाए रखने में सबसे बड़ा कारक साबित हुआ है। मंदी की आशंकाओं को दरकिनार करते हुए उपभोक्ता और किसान दोनों ही इस बार खुलकर खरीदारी कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों के युवाओं और परिवारों के लिए यह दीवाली दोगुनी खुशियां लेकर आई है, क्योंकि एक तरफ जहां उनके खेतों की मेहनत रंग लाई है, वहीं दूसरी तरफ पर्व मनाने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन भी समय पर उपलब्ध हो गए हैं।
प्रशासनिक सतर्कता और आगामी दिनों की रणनीति
आगामी दिनों में खरीद और उठान प्रक्रिया को और अधिक गति देने के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर एक सुदृढ़ कार्ययोजना तैयार की है। मंडियों में नमी की मात्रा (Moisture Content) की जांच के लिए स्थापित किए गए सुगम केंद्रों को और अधिक प्रभावी बनाया गया है ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी भी प्रकार की तकनीकी या व्यावहारिक अड़चन का सामना न करना पड़े। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सीजन के अंत तक एक-एक पात्र किसान की फसल का शत-प्रतिशत उठाव और पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।




