हरियाणा के ग्रामीण अंचलों में आधारभूत बुनियादी ढांचे के विकास को तीव्र गति प्रदान करने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक बड़ा वित्तीय निर्णय लिया है। राज्य सरकार द्वारा स्टेट फाइनेंस कमीशन (राज्य वित्त आयोग) के अंतर्गत कुल 579 करोड़ रुपये की भारी-भरकम ग्रांट का आवंटन कर दिया गया है। इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम का मुख्य उद्देश्य गांवों की तस्वीर बदलना और स्थानीय स्तर पर नागरिकों को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस फंड के जरिए गांवों के भीतर टूटी सड़कों, संपर्क मार्गों, जल निकासी प्रणालियों और स्वच्छता से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों को अमलीजामा पहनाया जाएगा, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आने की पूरी उम्मीद है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष में सितंबर माह तक दूसरी किस्त जारी की जानी थी, परंतु राज्य वित्त आयोग की विस्तृत रिपोर्ट समयानुसार प्राप्त न होने के कारण पुराने और निर्धारित नियमों के तहत ही यह ग्रांट जारी की गई है। हालांकि प्रक्रिया में तकनीकी देरी के चलते स्थानीय स्तर पर होने वाले विकास कार्यों में मामूली विलंब की आशंका जरूर जताई जा रही है, लेकिन इतनी बड़ी राशि के एकमुश्त आने से ग्रामीण क्षेत्रों के रुके हुए प्रोजेक्ट्स को एक नई रफ्तार मिल जाएगी। सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आवंटित धन का सदुपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ धरातल पर होना चाहिए ताकि ग्रामीण जनता को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।
वित्तीय आबंटन का त्रि-स्तरीय ढांचा और वितरण प्रणाली
इस बहुप्रतीक्षित विकास पैकेज का वितरण त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तीनों अंगों के बीच उनकी स्थानीय आबादी और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुपात में तय किया गया है। निर्धारित नियमों के तहत इस कुल 579 करोड़ रुपये की राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर राज्य की तमाम ग्राम पंचायतों के खातों में भेजा जाएगा। इसके अतिरिक्त, 15 प्रतिशत हिस्सा पंचायत समितियों के विकास कार्यों के लिए और शेष 10 प्रतिशत हिस्सा जिला परिषदों को आवंटित किया गया है। इस स्पष्ट और पारदर्शी फॉर्मूले से यह सुनिश्चित किया गया है कि ग्रांट का लाभ ब्लॉक स्तर से लेकर जिला और ग्राम स्तर तक की जनता तक समान रूप से पहुंचे।
विशेष रूप से इस बात का भी विशेष ध्यान रखा गया है कि समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों की बस्तियों का विकास भी मुख्य धारा के साथ गति पकड़े। इसी नीति के तहत, कुल राशि में से 97.87 करोड़ रुपये की एक बड़ी रकम केवल और केवल गांवों की एससी बस्तियों के बुनियादी ढांचे के विकास पर ही खर्च की जाएगी। शेष 481.12 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग संपूर्ण ग्रामीण क्षेत्र के सामान्य विकास कार्यों, गलियों के निर्माण और पेयजल निकासी जैसी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए किया जाएगा।
| संस्था का प्रकार | कुल संख्या | आवंटित कुल राशि (करोड़ रुपये में) |
|---|---|---|
| ग्राम पंचायत | 6230 | 434.25 करोड़ रुपये |
| पंचायत समिति | 143 | 86.85 करोड़ रुपये |
| जिला परिषद | 22 | 57.90 करोड़ रुपये |
बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और स्वच्छता अभियानों को मिलेगी मजबूती
इस नव-आवंटित बजट का सबसे बड़ा फायदा गांवों में जलभराव की समस्या से जूझ रहे आम नागरिकों को मिलने वाला है। ग्रामीण अंचलों में अक्सर बरसात के दिनों में पानी निकासी की गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है, जिससे आवागमन बाधित होता है। इस ग्रांट के माध्यम से पक्की नालियों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा ताकि गंदे पानी का सही ढंग से निकास हो सके। इसके साथ ही, गांवों को जोड़ने वाले कच्चे खेतों के रास्तों को भी पक्का या चलने योग्य बनाने का प्रावधान रखा गया है, जिससे किसानों को अपनी फसल मंडियों तक ले जाने में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
स्वच्छ भारत मिशन और ग्रामीण स्वच्छता अभियानों को भी इस वित्तीय पैकेज से बल मिलेगा। गांवों में कचरा प्रबंधन और साफ-सफाई से जुड़े संसाधनों को जुटाने के लिए स्थानीय निकाय इस राशि का उपयोग कर सकेंगे। जानकारों का मानना है कि यदि इस बजट का उपयोग पूरी ईमानदारी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया जाए, तो हरियाणा के गांवों की सूरत और नीयत दोनों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। ग्रामीण इलाकों में रोजगार के स्थानीय अवसरों के साथ-साथ जीवन सुगमता (Ease of Living) सूचकांक में भी सुधार दर्ज किया जाएगा।
"पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने और गांवों के चहुंमुखी विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। स्टेट फाइनेंस कमीशन के तहत जारी 579 करोड़ रुपये की यह ग्रांट ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी और हर वर्ग के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगी।" - प्रशासनिक प्रवक्ता, हरियाणा सरकार
प्रशासनिक निगरानी और आगामी कार्ययोजना
वित्तीय अनुदान जारी होने के बाद अब जिला प्रशासन और पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। सरकार के स्पष्ट आदेश हैं कि सभी पंचायतों और स्थानीय निकायों को निर्धारित समय सीमा के भीतर विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार कर उन्हें धरातल पर उतारना होगा। कार्यों में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या लापरवाही को रोकने के लिए उच्चाधिकारियों की एक विशेष मॉनिटरिंग कमेटी का गठन भी किया गया है, जो समय-समय पर चल रहे कार्यों की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करेगी।
आगामी दिनों में सभी जिलों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO Zila Parishad) और जिला विकास एवं पंचायत अधिकारियों (BDPO) को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर उन कार्यों की सूची तैयार करें जो लंबे समय से अटके हुए थे। पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से इन कार्यों को जल्द से जल्द शुरू करवाया जाएगा ताकि ग्रामीण जनता को जल्द से जल्द इन आधुनिक विकास कार्यों का सीधा लाभ मिल सके।




