दिवाली के पावन पर्व से ठीक पहले हरियाणा के लाखों संविदा कर्मचारियों के लिए एक बेहद सकारात्मक प्रशासनिक अपडेट सामने आया है। राज्यभर के विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों में अपनी सेवाएं दे रहे हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएनएल) के कार्मिकों के मानदेय में संशोधन की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस नीतिगत बदलाव से प्रदेशभर के लगभग एक लाख बीस हजार से अधिक कर्मचारियों को प्रत्यक्ष तौर पर वित्तीय लाभ मिलने की उम्मीद बंध गई है, जिससे प्रशासनिक गलियारों और कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे प्रस्ताव की रूपरेखा युवा सशक्तीकरण एवं उद्यमिता विभाग द्वारा तैयार की गई थी। विभाग ने मानदेय में संशोधन से जुड़ा यह अहम प्रशासनिक प्रस्ताव राज्य के वित्त विभाग और मानव संसाधन विभाग के विचारार्थ प्रेषित किया था। दोनों प्रमुख विभागों की उच्चस्तरीय बैठकों और गहन समीक्षा के उपरांत इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है। अब इस संचिका को अंतिम अनुमोदन के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है, जिनकी सैद्धांतिक सहमति पहले ही इस विषय पर प्राप्त हो चुकी है।
वेतन वृद्धि का गणित और श्रेणीवार निर्धारण
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कर्मचारियों के मानदेय में होने वाली यह बढ़ोतरी पूरी तरह से उनके कार्य अनुभव और जिलों के वर्गीकरण पर निर्भर करेगी। राज्य को विभिन्न श्रेणियों के जिलों में विभाजित किया गया है, जिसके आधार पर वेतन का नया ढांचा तय किया गया है। संशोधित प्रावधानों के मुताबिक, प्रथम श्रेणी के जिलों में तैनात और लेवल-1 के अंतर्गत आने वाले पांच साल तक के अनुभव वाले कर्मियों को अब 21 हजार 950 रुपये प्रतिमाह तक मिल सकते हैं।
इसी प्रकार, इसी श्रेणी में दस वर्ष तक का अनुभव रखने वाले संविदा कर्मचारियों का मानदेय बढ़कर 24 हजार 150 रुपये हो जाएगा। वहीं, दस वर्ष से अधिक का लंबा अनुभव रखने वाले अनुभवी कर्मियों के लिए यह संशोधित राशि 26 हजार 340 रुपये प्रति माह तक निर्धारित की गई है। एचकेआरएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कार्यालय से किसी भी वक्त इन बढ़े हुए वेतनमानों को लागू करने के संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए जा सकते हैं, जिसके बाद अगली मासिक सैलरी में यह बढ़ी हुई धनराशि जुड़कर आएगी।
| कर्मचारी अनुभव व स्तर | जिला श्रेणी | संशोधित प्रस्तावित मासिक वेतन |
|---|---|---|
| 5 वर्ष तक का अनुभव (लेवल-1) | प्रथम श्रेणी जिले | ₹21,950 |
| 10 वर्ष तक का अनुभव (लेवल-1) | प्रथम श्रेणी जिले | ₹24,150 |
| 10 वर्ष से अधिक अनुभव (लेवल-1) | प्रथम श्रेणी जिले | ₹26,340 |
प्रशासनिक सक्रियता और विभागों का समन्वय
इस पूरी प्रक्रिया को गति देने में राज्य सरकार के विभिन्न प्रशासनिक अंगों ने सराहनीय समन्वय का परिचय दिया है। त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए जिस तेजी से फाइल को वित्त विभाग से पास कराया गया है, उससे स्पष्ट है कि सरकार कर्मचारियों के आर्थिक कल्याण को लेकर गंभीर है। अधिकारियों का मानना है कि संविदा आधारित इन कर्मियों की सेवाओं को बेहतर बनाने और उन्हें महंगाई के दौर में आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए यह निर्णय मील का पत्थर साबित होगा।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के तुरंत बाद पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा ताकि किसी भी कर्मचारी को अपने बढ़े हुए वेतन के भुगतान के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े। जिला स्तर पर भी तैनात अधिकारियों को इस बाबत अनौपचारिक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं ताकि आदेश जारी होते ही बिना किसी तकनीकी बाधा के इसका क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
"राज्य के संविदा कर्मचारियों का हित हमारी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। कौशल निगम के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रहे हमारे साथियों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं और प्रशासनिक प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं।" - प्रशासनिक प्रवक्ता, हरियाणा सरकार
आम जनजीवन और कार्य संस्कृति पर पड़ने वाला सकारात्मक प्रभाव
इस फैसले से न केवल कर्मचारियों के घरों में खुशियों का माहौल बनेगा बल्कि सरकारी कार्यालयों में कार्यरत इन श्रमजीवियों की कार्यक्षमता और मनोबल में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। लंबे समय से अपने मानदेय में संशोधन की प्रतीक्षा कर रहे इन कर्मियों के लिए यह किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है। आर्थिक मजबूती मिलने से वे अपने परिवारों के साथ इस बार की दिवाली अधिक उत्साह के साथ मना सकेंगे और इसका सकारात्मक प्रभाव सरकारी योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन पर भी पड़ेगा।
आगामी दिनों में जैसे ही मुख्य कार्यकारी अधिकारी के हस्ताक्षर से आदेश सार्वजनिक होंगे, प्रदेशभर के विभिन्न महकमों में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। सरकार के इस कदम को कुशल व अकुशल दोनों श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए एक बड़ा सामाजिक सुरक्षा कवच माना जा रहा है, जिससे भविष्य में भी अन्य संवर्गों के लिए ऐसे सकारात्मक निर्णयों की उम्मीद बंध गई है।




