हरियाणा प्रशासनिक सेवा में एक महत्वपूर्ण फेरबदल के तहत राज्य सरकार ने वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी डॉ. अमित कुमार अग्रवाल को दो बड़े प्रशासनिक संस्थानों की कमान सौंपी है। सरकार की ओर से जारी किए गए नए आधिकारिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक, उन्हें हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (HSIIDC) के साथ-साथ EEC के चेयरमैन पद का अतिरिक्त दायित्व भी सौंपा गया है। डॉ. अग्रवाल वर्तमान समय में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में आयुक्त तथा सचिव के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं और इन नए दायित्वों के जुड़ने के बाद उनके प्रशासनिक कार्यक्षेत्र का दायरा और अधिक विस्तृत हो गया है।
यह प्रशासनिक व्यवस्था राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के हस्ताक्षर से जारी आदेशों के तहत लागू की गई है। सरकार द्वारा तय की गई नीति के अनुसार, यह अतिरिक्त कार्यभार किसी स्थायी नियुक्ति के बजाय एक अंतरिम व्यवस्था के रूप में रहेगा। जब तक प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रधान सचिव के पद पर किसी नियमित अधिकारी की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ही इन दोनों महत्वपूर्ण निगमों के चेयरमैन के रूप में कार्यभार संभालते रहेंगे। इस आदेश के बाद से प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है कि सरकार औद्योगिक नीतियों को अमलीजामा पहनाने के लिए अनुभवी अधिकारियों को प्राथमिकता दे रही है।
औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे को मिलेगी नई रफ्तार
डॉ. अमित कुमार अग्रवाल के कंधों पर आई इन दोहरी जिम्मेदारियों का राज्य के औद्योगिक और आर्थिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। HSIIDC यानी हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड प्रदेशभर में औद्योगिक घरानों, निवेशकों और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए नोडल एजेंसी की तरह काम करता है। ऐसे में इस निगम के शीर्ष पद पर एक अनुभवी आईएएस अधिकारी की मौजूदगी से नई परियोजनाओं को गति मिलने और औद्योगिक निवेश के प्रस्तावों पर तेजी से निर्णय होने की पूरी संभावना है।
इसके अलावा, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त और सचिव के रूप में उनका पहले से कार्यरत होना इन दोनों पदों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने में मददगार साबित होगा। विभाग और निगम के बीच निर्णयों में एकरूपता आने से निवेशकों को सहूलियत मिलेगी और राज्य में व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) के मानकों में भी सुधार देखा जा सकेगा। सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम को राज्य में औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम प्रशासनिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
| प्रशासनिक विवरण | तथ्य एवं जानकारी |
|---|---|
| जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी | डॉ. अमित कुमार अग्रवाल (IAS) |
| सौंपे गए नए पद | HSIIDC और EEC के चेयरमैन (अतिरिक्त प्रभार) |
| वर्तमान मूल पद | आयुक्त एवं सचिव, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग |
| आदेश जारीकर्ता | अनुराग रस्तोगी, मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार |
| आदेश जारी होने की तिथि | 3 नवंबर |
| व्यवस्था की अवधि | मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की नियुक्ति तक |
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा और भविष्य की कार्ययोजना
राज्य सरकार के इस फैसले से प्रशासनिक मशीनरी में यह संदेश गया है कि सरकार महत्वपूर्ण और संवेदनशील पदों पर त्वरित निर्णय लेने वाले सक्षम अधिकारियों को आगे बढ़ा रही है। डॉ. अमित कुमार अग्रवाल अपनी कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं और उद्योग विभाग में उनके पास पहले से ही कई बड़ी योजनाओं की जिम्मेदारी है। अब HSIIDC और EEC का अतिरिक्त कार्यभार मिलने से उन्हें उन सभी प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग करने में आसानी होगी जो राज्य के आर्थिक विकास से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।
जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में हरियाणा के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में अधोसंरचना के विकास को लेकर कुछ बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। निवेशक लंबे समय से प्रक्रियाओं के सरलीकरण की मांग कर रहे हैं और एक ही वरिष्ठ अधिकारी के पास इन अहम विभागों की कमान होने से लालफीताशाही पर लगाम लगने की उम्मीद है। हालांकि, यह व्यवस्था तब तक ही जारी रहेगी जब तक सीएम के प्रधान सचिव की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक डॉ. अग्रवाल अपने दोनों मोर्चों पर प्रभावी रूप से नीतियां लागू करेंगे।
"हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक दक्षता को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. अमित कुमार अग्रवाल को HSIIDC और EEC के चेयरमैन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है, जो मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की नियुक्ति तक प्रभावी रहेगा।" - प्रशासनिक प्रवक्ता
प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक परिदृश्य पर संभावित प्रभाव
इस प्रशासनिक फेरबदल का सीधा असर राज्य के औद्योगिक विकास और नीतिगत फैसलों पर दिखाई देगा। हरियाणा देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शुमार है और यहाँ निवेशकों को आकर्षित करना सरकार की प्राथमिकता रही है। डॉ. अग्रवाल के पास उद्योग विभाग के साथ-साथ HSIIDC का नेतृत्व होने से राज्य में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, प्लग-एंड-प्ले इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास और एमएसएमई (MSME) सेक्टर को मिलने वाले प्रोत्साहन में तेजी आएगी।
स्थानीय व्यापारिक संगठनों और उद्योगपतियों ने भी इस प्रशासनिक व्यवस्था का सकारात्मक स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे फैसलों में होने वाली देरी कम होगी और फाइलें तेजी से आगे बढ़ेंगी। पानीपत समेत पूरे हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों में इस निर्णय को लेकर सकारात्मक चर्चा है, क्योंकि बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई परियोजनाएं सीधे तौर पर HSIIDC के अधीन आती हैं।
आगामी प्रशासनिक कदम और कार्यभार की स्थिति
फिलहाल सरकार की तरफ से केवल अतिरिक्त प्रभार सौंपने के आदेश जारी किए गए हैं और उद्योग विभाग के मौजूदा स्वरूप में किसी अन्य बदलाव के संकेत नहीं हैं। जब तक राज्य सरकार पूर्णकालिक या नियमित प्रधान सचिव की नियुक्ति नहीं करती, तब तक डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ही इन अतिरिक्त जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा और प्रशासनिक मुस्तैदी के साथ करते रहेंगे।




