राज्य में बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करवाने के लिए हरियाणा सरकार ने एक बेहद सख्त प्रशासनिक निर्णय लिया है। प्रदेश भर में लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता और बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बेधड़क दौड़ रहे वाहनों पर नकेल कसने के वास्ते परिवहन विभाग ने कमर कस ली है। आगामी पहली नवंबर से राज्य के विभिन्न जिलों में बिना पीयूसी और बिना स्पष्ट नंबर प्लेट के चलने वाले मोटर वाहनों के खिलाफ डिजिटल माध्यम से स्वचालित चालान काटने की प्रक्रिया आरंभ की जा रही है, जिससे वाहन चालकों में हड़कंप मच गया है।
इस अभिनव और हाई-टेक व्यवस्था के तहत शुरुआत में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुनिंदा जिलों को चुना गया है, जहाँ ईंधन भरवाने आने वाले प्रत्येक वाहन की तकनीकी निगरानी की जाएगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस मुहिम की शुरुआत नारनौल जिले से की जा रही है, जहाँ स्थानीय प्रशासन द्वारा जिला सीमा के भीतर स्थित दो सौ से अधिक पेट्रोल पंपों पर अत्याधुनिक तकनीक से लैस कैमरे लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों के माध्यम से न केवल वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी जाएगी, बल्कि मौके पर ही वाहन के प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता का डिजिटल सत्यापन भी सुनिश्चित किया जाएगा।
पेट्रोल पंपों पर लगेंगे हाई-टेक एएनपीआर कैमरे और होगी सीधी मॉनिटरिंग
प्रशासनिक तैयारियों के तहत पेट्रोल पंपों पर ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं। इससे पहले राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के प्रमुख शहर गुरुग्राम में इस प्रकार की तकनीक सफलतापूर्वक कार्य कर रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अब इसी तर्ज पर हरियाणा के अन्य हिस्सों में भी इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाया जा रहा है। पेट्रोल पंपों पर लगने वाले इन कैमरों की तकनीकी बनावट इस प्रकार की है कि वे पंप पर प्रवेश करने वाले प्रत्येक वाहन की नंबर प्लेट को पलक झपकते ही स्कैन कर लेंगे और केंद्रीय सर्वर से डेटा का मिलान करेंगे।
जब भी कोई ऐसा वाहन किसी पेट्रोल स्टेशन पर ईंधन डलवाने पहुंचेगा जिसका पीयूसी अपडेट नहीं होगा या जिसकी समयावधि समाप्त हो चुकी होगी, तो ये कैमरे तुरंत एक विशेष चेतावनी संकेत उत्पन्न करेंगे। यह सिग्नल तुरंत संबंधित जिला पुलिस और परिवहन विभाग के मुख्य सर्वर तक पहुंच जाएगा। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता न्यूनतम होगी और डेटा सीधा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पास उपलब्ध रहेगा, जिससे बिना किसी विलंब के नियमानुसार आर्थिक दंड या चालान की कार्रवाई अमल में लाई जा सकेगी।
| व्यवस्था का पहलू | विवरण एवं तकनीकी ब्योरा |
|---|---|
| कार्यान्वयन की तिथि | 1 नवंबर से होगी औपचारिक शुरुआत |
| मुख्य तकनीकी उपकरण | ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे |
| प्रशासनिक विभाग | हरियाणा परिवहन विभाग एवं पुलिस विभाग |
| प्रारंभिक केंद्र | नारनौल जिला (260 से अधिक पेट्रोल पंप) |
| निगरानी का दायरा | बिना पीयूसी और बिना नंबर प्लेट वाले वाहन |
प्रशासनिक और वैधानिक स्तर पर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकें
इस पूरी योजना को धरातल पर उतारने से पहले पर्यावरण संरक्षण से जुड़े तमाम आयोगों और विभागों के बीच गहन विचार-विमर्श हो चुका है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) की ओर से भी हाल ही में इस संबंध में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की गई। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) और अन्य प्रदूषण रोधी नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी निगरानी का दायरा बढ़ाना अनिवार्य हो गया है।
परिवहन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त रूप से इस बात की पुष्टि की है कि बिना वैध दस्तावेजों के वाहन चलाने वालों को अब किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। राज्य के कई हिस्सों में इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए पेट्रोल पंप संचालकों को भी प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस डिजिटल सख्ती के बाद वाहन मालिक अपने वाहनों के कागजात दुरुस्त रखने के लिए स्वतः प्रेरित होंगे, जिससे सड़कों पर निकलने वाले जहरीले धुएं की मात्रा में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की जाएगी।
"प्रशासन द्वारा इस हाई-टेक व्यवस्था को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है। आगामी एक नवंबर से पेट्रोल पंपों पर कैमरे सक्रिय हो जाएंगे और नियमों की अवहेलना करने वालों पर ऑनलाइन माध्यम से सीधी कार्रवाई की जाएगी।" - आरटीए कार्यालय, हरियाणा प्रशासन
आम जनजीवन, वाहन चालकों और यातायात व्यवस्था पर पड़ने वाला दूरगामी प्रभाव
सरकार के इस कड़े कदम से आम वाहन चालकों की दिनचर्या में बड़ा बदलाव आना तय है। अब तक बड़ी संख्या में लोग अपने वाहनों का प्रदूषण प्रमाणपत्र समय पर अपडेट नहीं करवाते थे, क्योंकि मैनुअल चेकिंग सीमित होती थी और हर वाहन तक ट्रैफिक पुलिस की पहुंच संभव नहीं थी। परंतु अब पेट्रोल पंपों को ही डिजिटल चेकपॉइंट बना दिए जाने के कारण वाहन चालकों के पास अपने दस्तावेजों को दुरुस्त रखने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचेगा। जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था से जहां एक ओर सरकारी राजकोष में राजस्व की वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले पुराने और अनफिट वाहनों की सड़कों पर आवाजाही पर स्वतः रोक लग जाएगी।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस प्रकार की डिजिटल पहलों से नागरिकों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ती है। यद्यपि शुरुआती दौर में कुछ वाहन चालकों को तकनीकी खामियों या जागरूकता के अभाव में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टिकोण से यह कदम प्रदेश की आबोहवा को सुधारने में एक मील का पत्थर साबित होगा। आम जनता से भी अपील की जा रही है कि वे समय रहते अपने वाहनों का पीयूसी और अन्य जरूरी कागजात पूरे करवा लें ताकि किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सके।




