भारतीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प उद्योग के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले प्रख्यात पद्मश्री विजेता खेमराज सुंदरियाल को मंगलवार को स्थानीय जिला सचिवालय में एक गरिमामयी समारोह के दौरान सम्मानित किया गया। पानीपत की पारंपरिक कला को वैश्विक फलक तक पहुँचाने वाले इस महान शिल्पी के योगदान को रेखांकित करते हुए जिला प्रशासन ने उनकी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस किया है। इस विशेष अवसर पर जिले के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिन्होंने बुनकर समुदाय के इस प्रेरणास्त्रोत का अभिनंदन किया।
जिला मुख्यालय पर आयोजित इस कार्यक्रम में पानीपत के उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने पद्मश्री खेमराज सुंदरियाल को औपचारिक रूप से प्रशस्ति पत्र भेंट किया। इस दौरान प्रशासनिक मुखिया ने उनके अब तक के सफर, समर्पण और हथकरघा सेक्टर में किए गए नवाचारों की खुले दिल से प्रशंसा की। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह से स्थानीय संस्कृति और हस्तशिल्प कला के गौरव को समर्पित नजर आया, जहाँ हर कोई इस दिग्गज शिल्पकार की उपलब्धियों की सराहना कर रहा था।
हथकरघा परंपरा को सुदृढ़ करने में आजीवन योगदान
पद्मश्री खेमराज सुंदरियाल के जीवन का प्रत्येक अध्याय कड़े परिश्रम, अटूट समर्पण और सामाजिक सरोकारों की अनूठी दास्तां कहता है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश की पारंपरिक हथकरघा विरासत को सहेजने और स्थानीय बुनकरों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में समर्पित कर दिया है। पानीपत के पारंपरिक खेस उद्योग को आधुनिक तकनीकों और समकालीन डिजाइनों के साथ जोड़कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाना उनकी एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी उपलब्धि मानी जाती है।
प्रशासनिक स्तर पर यह माना गया कि उनका यह प्रतिष्ठित सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत गौरव नहीं है, बल्कि यह पानीपत के पूरे टेक्सटाइल और हैंडलूम इकोसिस्टम के साथ-साथ देश के उन तमाम मेहनतकश कारीगरों का मान है जो रात-दिन मेहनत कर इस उद्योग को जीवंत रखते हैं। पिछले छह दशकों से अधिक के अपने सुदीर्घ अनुभव के बल पर उन्होंने अनगिनत युवाओं और कारीगरों को प्रशिक्षित किया है, जिससे क्षेत्र में रोजगार के नए और व्यापक द्वार खुले हैं।
| सम्मानित हस्ती | सम्मानकर्ता अधिकारी | विशेष उपलब्धि | प्रमुख उपस्थिति |
|---|---|---|---|
| पद्मश्री खेमराज सुंदरियाल | डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ (डीसी) | हथकरघा उद्योग को वैश्विक पहचान | एसडीएम और अन्य प्रशासनिक अधिकारी |
प्रशासनिक अधिकारियों और गणमान्य लोगों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस सम्मान समारोह के दौरान जिले के प्रशासनिक ढांचे से जुड़े कई प्रमुख अधिकारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से एसडीएम मनदीप कुमार, एसडीएम समालखा अमित कुमार, एसडीएम इसराना नवदीप नैन, और नगराधीश टीनू पोसवाल ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अलावा सांसद प्रतिनिधि गजेंद्र सलूजा और पद्मश्री सुंदरियाल के सुपुत्र अजय सुंदरियाल भी इस अवसर पर विशेष तौर पर मौजूद रहे, जिन्होंने इस पल को और अधिक यादगार बनाया।
अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पानीपत की पहचान केवल औद्योगिक नगरी के रूप में ही नहीं, बल्कि यहाँ के कुशल बुनकरों की उंगलियों से रचे जाने वाले कलात्मक उत्पादों के कारण भी पूरी दुनिया में है। इस प्रकार के आयोजनों से नई पीढ़ी के कारीगरों को अपनी पारंपरिक कला से जुड़े रहने की प्रेरणा मिलती है और वे इसे आधुनिकता के दौर में भी आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
"पद्मश्री खेमराज सुंदरियाल का जीवन परिश्रम, समर्पण, नवाचार और सामाजिक दायित्व की एक गौरवशाली मिसाल है। उन्होंने पानीपत के पारंपरिक खेस को आधुनिक तकनीक के जरिए वैश्विक स्तर पर पहुँचाया है।" - डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, उपायुक्त, पानीपत
स्थानीय जनजीवन और बुनकर समुदाय पर सकारात्मक प्रभाव
इस प्रकार के सम्मान समारोहों से पानीपत के स्थानीय बुनकर समाज, कारीगरों और छोटे कपड़ा व्यापारियों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। हथकरघा उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि जब देश और जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी इस प्रकार आगे आकर पारंपरिक कलाकारों का सम्मान करते हैं, तो इससे पूरी इंडस्ट्री का मनोबल बढ़ता है। पानीपत के स्थानीय बाजारों और ग्रामीण अंचल के उन कारीगरों को भी एक सकारात्मक संदेश मिलता है जो वर्षों से इस पैतृक कला को जीवित रखे हुए हैं।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि पद्मश्री सुंदरियाल जैसे दिग्गजों के अनुभवों का लाभ यदि नई पीढ़ी को मिलता रहे, तो आने वाले समय में पानीपत का हैंडलूम और होम फर्निशिंग सेक्टर अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में और अधिक मजबूती से टिक सकेगा। स्थानीय युवाओं के लिए यह इस बात का प्रमाण है कि लगन और रचनात्मकता के बल पर स्थानीय स्तर से शुरू हुआ सफर वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकता है।
प्रशासनिक सहयोग और आगामी विकास की दिशा
जिला प्रशासन द्वारा इस प्रकार के आयोजनों को बढ़ावा देना यह स्पष्ट करता है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन पारंपरिक उद्योगों के संरक्षण के प्रति पूरी तरह गंभीर हैं। आने वाले समय में पानीपत के बुनकरों को आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर विपणन अवसर और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुँचाने के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे इस ऐतिहासिक उद्योग को और अधिक विस्तार मिल सके।



