पानीपत के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में शुमार आर्य पीजी कॉलेज ने अकादमिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में एक और नया मील का पत्थर हासिल कर लिया है। शहर के जीटी रोड स्थित इस प्रमुख कॉलेज के संगीत विभाग की कमान संभाल रही डॉ. नीलू रानी ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयू) के प्रशासनिक और सांस्कृतिक पटल पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज कराई है। विश्वविद्यालय परिसर में हाल ही में संपन्न हुई कल्चरल काउंसिल की वार्षिक बैठक और चुनाव प्रक्रिया में डॉ. नीलू रानी को आगामी सत्र 2026-27 के लिए सर्वसम्मति से कल्चरल काउंसिल का उपाध्यक्ष चुना गया है। यह चयन न केवल उनके व्यक्तिगत कलात्मक सफर का सम्मान है, बल्कि पानीपत जिले के पूरे शैक्षणिक और सांस्कृतिक समुदाय के लिए भी अत्यंत गौरव का क्षण है।
इस नियुक्ति का सबसे खास पहलू यह है कि आर्य कॉलेज के दशकों पुराने इतिहास में यह पहला अवसर है जब संस्थान से जुड़ा कोई शिक्षक इस महत्वपूर्ण और गरिमामयी पद तक पहुंचा है। इससे भी बढ़कर, डॉ. नीलू रानी इस पद की जिम्मेदारी संभालने वाली कॉलेज की पहली महिला प्रोफेसर बन गई हैं। पानीपत के स्थानीय बौद्धिक हलकों और शिक्षण संस्थानों में इस खबर के पहुंचते ही खुशी की लहर दौड़ गई। कॉलेज प्रबंधन से लेकर विद्यार्थियों तक, सभी ने इस ऐतिहासिक चयन पर प्रसन्नता व्यक्त की है और इसे पानीपत की सांस्कृतिक प्रतिभाओं की बड़ी जीत बताया है।
सांस्कृतिक विस्तार और भविष्य की रूपरेखा
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के शीर्ष नेतृत्व ने भी डॉ. नीलू रानी के इस चयन पर अपनी प्रसन्नता और मुहर लगाई है। विभाग के अध्यक्ष डॉ. विवेक चावला और उपाध्यक्ष डॉ. सलोनी दीवान ने विधिवत रूप से उन्हें नई जिम्मेदारी की बधाई दी। अपने संदेश में उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि डॉ. नीलू रानी के पास कला, संगीत और सांस्कृतिक आयोजनों का लंबा और समृद्ध अनुभव रहा है। उनके इस व्यापक अनुभव का सीधा लाभ कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले तमाम संबद्ध महाविद्यालयों को मिलेगा। आने वाले दिनों में यूनिवर्सिटी बेल्ट के युवाओं को अपनी कला दिखाने के लिए और अधिक सुव्यवस्थित और उन्नत मंच मिलने की उम्मीद बंध गई है।
स्थानीय स्तर पर आर्य पीजी कॉलेज के प्रबंध तंत्र ने भी इस उपलब्धि को भुनाने और शहर की सांस्कृतिक धरोहर को और मजबूत करने की बात कही है। कॉलेज परिसर में आयोजित एक विशेष स्वागत और सम्मान समारोह के दौरान प्रबंध समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंगला, महासचिव सीए कमल किशोर, उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंगला और कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. जगदीश गुप्ता ने डॉ. नीलू रानी को फूलों का गुलदस्ता भेंट कर उनका अभिनंदन किया। वक्ताओं ने कहा कि एक छोटे से औद्योगिक शहर के रूप में पहचान रखने वाला पानीपत अब शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में भी बड़े मुकाम हासिल कर रहा है, जिसका ताज़ा उदाहरण डॉ. नीलू रानी की यह सफलता है।
| विशेष विवरण | विवरण विवरण |
|---|---|
| चयनित पदाधिकारी | डॉ. नीलू रानी (संगीत विभागाध्यक्षा) |
| संस्थान | आर्य पीजी कॉलेज, पानीपत |
| विश्वविद्यालय | कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयूके) |
| पद एवं सत्र | उपाध्यक्ष, कल्चरल काउंसिल (2026-27) |
| ऐतिहासिक तथ्य | आर्य कॉलेज से इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला |
प्रशासनिक और अकादमिक जगत की प्रतिक्रियाएं
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की कल्चरल काउंसिल का यह चुनाव हर वर्ष अकादमिक कैलेंडर का एक अहम हिस्सा होता है, जिसमें विभिन्न कॉलेजों के प्रतिनिधि हिस्सा लेते हैं। इस बार पानीपत के खाते में यह बड़ी सफलता आना यह दर्शाता है कि यहाँ के शिक्षक केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कला और संस्कृति को सहेजने और आगे बढ़ाने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. जगदीश गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह सफलता हमारे कॉलेज की सुदृढ़ शैक्षणिक और सांस्कृतिक नींव का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने विश्वास जताया कि डॉ. नीलू रानी के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय स्तर पर होने वाले युवा उत्सव और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का स्तर और अधिक ऊंचे पायदान पर पहुंचेगा।
इस अवसर पर कॉलेज की अन्य महिला प्राध्यापक और स्टॉफ सदस्य भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस पल को ऐतिहासिक बताया। कॉलेज प्रांगण में उपस्थित प्राध्यापिका आस्था गुप्ता, डॉ. सोनिया सोनी, डॉ. रजनी शर्मा, डॉ. अकरम खान और प्राध्यापिका दीक्षा नंदा ने डॉ. नीलू रानी को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि महिला सशक्तिकरण और कला के क्षेत्र में महिलाओं के नेतृत्व का एक बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में पानीपत के युवा छात्र-छात्राएं कला और संगीत के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन करेंगे।
"डॉ. नीलू रानी का कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की कल्चरल काउंसिल का उपाध्यक्ष बनना न केवल हमारे महाविद्यालय बल्कि पूरे पानीपत क्षेत्र के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। यह उनकी कलात्मक उत्कृष्टता और समर्पण का परिणाम है, जिससे हमारी सांस्कृतिक गतिविधियों को एक नई दिशा मिलेगी।" - प्रो. डॉ. जगदीश गुप्ता, प्राचार्य, आर्य पीजी कॉलेज पानीपत
पानीपत की सांस्कृतिक पहचान को मिला नया फलक
पानीपत को अमूमन टेक्सटाइल हब, हथकरघा और ऐतिहासिक युद्धों की भूमि के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यहाँ की शैक्षणिक और सांस्कृतिक उपलब्धियाँ भी राष्ट्रीय फलक पर अपनी जगह बना रही हैं। डॉ. नीलू रानी का यह चयन शहर के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक नया अध्याय जोड़ता है। आने वाले सत्र में जब वे विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक नीतियों और आयोजनों की रूपरेखा तय करने में अपनी भूमिका निभाएंगी, तो इसका प्रत्यक्ष लाभ पानीपत के विद्यार्थियों को भी मिलेगा। स्थानीय कला प्रेमियों और संगीत साधकों का मानना है कि इस पद पर पानीपत के प्रतिनिधि के होने से यहाँ के युवाओं को बड़े मंचों तक पहुँचने में सुगमता होगी और क्षेत्रीय प्रतिभाओं को पंख मिलेंगे।




